उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म ‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि फिल्म की रिलीज पर कोई फैसला लेने से पहले जज खुद इसे देखेंगे। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह फिल्म है क्या? इसे बनाने वाली कंपनी कौन है? सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ विवाद की वजह क्या है? और जजों को फिल्म दिखाने की नौबत क्यों आई? आइए, इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।
फिल्म क्या है और कौन बना रहा है?
‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ एक ऐसी फिल्म है, जो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन से प्रेरित बताई जा रही है। इसे सम्राट सिनेमैटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है। निर्माताओं का कहना है कि यह फिल्म शांतनु गुप्ता की किताब ‘द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर: द डेफिनिटिव बायोग्राफी ऑफ योगी आदित्यनाथ’ पर आधारित है। इस किताब को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी आधिकारिक तौर पर मान्यता दी थी।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
फिल्म की रिलीज को लेकर सेंसर बोर्ड (CBFC) और निर्माताओं के बीच तनातनी शुरू हुई। निर्माताओं ने CBFC पर फिल्म के टीजर, ट्रेलर, प्रोमो गाने और पूरी फिल्म के सर्टिफिकेशन में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया। इस मामले ने तब तूल पकड़ा, जब CBFC ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया। इसके बाद निर्माताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट में अब तक क्या हुआ?
- 16 जुलाई 2025: सम्राट सिनेमैटिक्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें CBFC की देरी को ‘अनुचित और अस्पष्ट’ बताया। जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और नीला के. गोखले की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि CBFC को कानून के तहत तय समय में सर्टिफिकेशन देना चाहिए। अगले दिन CBFC ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि दो कार्यदिवसों में फैसला ले लिया जाएगा। इसके बाद फिल्म की रिलीज डेट 1 अगस्त तय हुई।
- 21 जुलाई 2025: CBFC ने फिल्म के सर्टिफिकेशन आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद निर्माता फिर से हाईकोर्ट पहुंचे।
- 1 अगस्त 2025: कोर्ट ने पाया कि CBFC ने फिल्म देखे बिना ही 21 जुलाई का फैसला लिया था। CBFC ने कहा कि यह फिल्म एक संवैधानिक पद (यूपी सीएम) पर आधारित है और यूपी के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने इस पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने CBFC को फिल्म देखकर सर्टिफिकेशन पर फैसला लेने को कहा।
- 6 अगस्त 2025: CBFC ने अपने आदेश में कहा कि फिल्म सर्टिफिकेशन नियमों और सार्वजनिक चित्रण के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है। बोर्ड का आरोप था कि फिल्म के दृश्य और डायलॉग नस्लीय, धार्मिक और अन्य समूहों के लिए अपमानजनक हैं, साथ ही यह कुछ लोगों और समूहों की मानहानि करती है। निर्माताओं ने इसके खिलाफ CBFC की रिवाइजिंग कमेटी में अपील करने का फैसला किया। कोर्ट ने CBFC को निर्देश दिया कि वह आपत्तिजनक सामग्री या डायलॉग की जानकारी निर्माताओं को दे। साथ ही, निर्माताओं को भी कहा गया कि वे कोई बदलाव करना चाहते हैं तो CBFC को बताएं।
- 17 अगस्त 2025: CBFC की रिवाइजिंग कमेटी ने भी निर्माताओं के आवेदन को खारिज कर दिया। बोर्ड ने फिल्म के शीर्षक और कुछ डायलॉग्स को भड़काऊ बताया। कुल 29 आपत्तियों में से 8 को बाद में हटा लिया गया।
- 21 अगस्त 2025: CBFC ने कोर्ट में दलील दी कि निर्माता सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत रिवाइजिंग कमेटी के फैसले को चुनौती दे सकते हैं। लेकिन निर्माताओं ने कहा कि CBFC का फैसला उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि CBFC ने मनमाने ढंग से सीएम योगी आदित्यनाथ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मांगकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर काम किया। निर्माताओं ने तर्क दिया कि CBFC किसी निजी व्यक्ति के अधिकारों का संरक्षक नहीं है।
कोर्ट ने CBFC को फटकार लगाते हुए कहा कि उसने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया। जजों ने यह भी साफ किया कि भले ही निर्माताओं के पास अपील का विकल्प हो, लेकिन उनकी मौजूदा याचिका पर सुनवाई की जा सकती है। इसके बाद कोर्ट ने फैसला लिया कि वह 25 अगस्त को अगली सुनवाई से पहले फिल्म देखेगा और CBFC की आपत्तियों पर विचार करेगा।
क्यों जज देखेंगे फिल्म?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह अनोखा कदम उठाया है कि वह खुद फिल्म देखेगा ताकि CBFC की आपत्तियों का सही संदर्भ समझा जा सके। कोर्ट का मानना है कि बिना फिल्म देखे आपत्तियों का मूल्यांकन करना मुश्किल है। जजों ने निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे फिल्म की एक कॉपी जमा करें, जिसमें CBFC द्वारा आपत्तिजनक बताए गए दृश्यों और डायलॉग्स को हाइलाइट किया जाए। इस प्रक्रिया के बाद कोर्ट 25 अगस्त को फैसला सुनाएगा।