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असम में NRC जैसा सख्त कानून लागू होने से बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़, पश्चिम बंगाल क्यों नहीं कर रहा ऐसी ही कार्रवाई

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Last updated: July 26, 2025 5:06 pm
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असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के एनआरसी (NRC) और डिटेंशन सेंटर संबंधी बयान के बाद राज्य में अवैध प्रवासियों के बीच भगदड़ मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, सैकड़ों बांग्लादेशी मूल के लोग अपना सामान समेटकर रातों-रात सीमा पार भागने लगे हैं। कई लोग ट्रकों और अन्य वाहनों में सवार होकर बॉर्डर की ओर जा रहे हैं। बोगाई गांव रेलवे स्टेशन से करीब 8 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने खुलकर कबूल किया कि वे जमालपुर (बांग्लादेश) के रहने वाले हैं और असम के रास्ते भारत में घुसकर पश्चिम बंगाल जाने की योजना बना रहे थे।

पश्चिम बंगाल में क्यों नहीं दिख रही ऐसी ही कार्रवाई

जहां असम में सरकार की सख्त नीति के कारण अवैध प्रवासी डर के मारे भाग रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल में ऐसा कोई दबाव नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह यह है कि पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार खुलेआम चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे पश्चिम बंगाल में NRC या मतदाता सूची की समीक्षा नहीं होने देंगी। यही वजह है कि बंगाल में अवैध प्रवासियों को लगता है कि वे सुरक्षित हैं और उन्हें किसी कानूनी कार्रवाई का डर नहीं है।

क्या है अवैध प्रवासियों का राजनीतिक खेल

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2004 तक भारत में करीब 50 लाख अवैध बांग्लादेशी प्रवासी थे, जबकि 2016 तक यह संख्या बढ़कर 2 करोड़ के करीब पहुंच गई। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से 60% से अधिक लोग भारत के मतदाता बन चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वोट बैंक उन पार्टियों को समर्थन देता है जो उन्हें सुरक्षा और संरक्षण का भरोसा दिलाती हैं। इसी वजह से पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अक्सर राजनीतिक विवादों में घिर जाता है।

क्या भारत के लोकतंत्र के लिए खतरा बन रहे हैं अवैध प्रवासी

अवैध प्रवासी न सिर्फ देश के संसाधनों पर बोझ बन रहे हैं, बल्कि वे भारतीय लोकतंत्र को भी प्रभावित कर रहे हैं। इनकी बढ़ती संख्या और मतदाता सूची में घुसपैठ से चुनावी नतीजे भी प्रभावित होते हैं। असम में जहां सरकार ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है, वहीं पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संरक्षण के चलते ऐसी कोई कार्रवाई नहीं दिख रही। सवाल यह है कि क्या देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता करके राजनीतिक फायदा उठाना उचित है?

 जब तक पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह समस्या और गहराती रहेगी। असम की तरह ही पूरे देश में एक समान नीति बनाने की जरूरत है, ताकि देश की सुरक्षा और लोकतंत्र दोनों सुरक्षित रह सकें।

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