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भारत स्थित iPhone प्लांट्स से 300 से अधिक चीनी इंजीनियरों और तकनीशियनों को चीन ने वापस बुलाया

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Last updated: July 15, 2025 5:56 pm
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हाल ही में, ताइवानी कंपनी फॉक्सकॉन, जो Apple के iPhone की सबसे बड़ी निर्माता है, ने अपने भारत स्थित प्लांट्स से 300 से अधिक चीनी इंजीनियरों और तकनीशियनों को वापस चीन बुला लिया है। ये इंजीनियर तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में फॉक्सकॉन के कारखानों में iPhone की प्रोडक्शन लाइन, फैक्ट्री डिजाइन और भारतीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल थे। इस घटना ने भारत की महत्वाकांक्षी मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं और Apple की iPhone 17 उत्पादन रणनीति पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इसे एक चुनौती के रूप में लेते हुए एक मजबूत कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है, जिसने न केवल स्थिति को नियंत्रित करने का भरोसा दिलाया, बल्कि भारत की वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता को भी रेखांकित किया। इस लेख में हम इस पूरे मामले को गहराई से समझते हैं और इसके भारत, Apple, और फॉक्सकॉन पर प्रभाव का विश्लेषण करते हैं।

चीनी इंजीनियरों की वापसी: पृष्ठभूमि

रिपोर्ट्स के अनुसार, मई 2025 से शुरू हुए इस कदम के तहत फॉक्सकॉन ने अपने चीनी कर्मचारियों को भारत छोड़कर वापस जाने का निर्देश दिया। ये कर्मचारी iPhone उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, जिसमें असेंबली लाइन प्रबंधन, फैक्ट्री डिजाइन, और भारतीय कर्मचारियों को हाई-टेक मशीनों के संचालन का प्रशिक्षण देना शामिल था। ब्लूमबर्ग और अन्य स्रोतों के अनुसार, इस वापसी के पीछे चीनी सरकार का दबाव है, जो अपनी तकनीक और कुशल श्रम को भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे देशों में स्थानांतरित होने से रोकना चाहती है।

चीन ने हाल के वर्षों में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों, तकनीकी उपकरणों, और कुशल श्रम के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम भारत जैसे देशों को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने से रोकने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर जब भारत-चीन सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं।

भारत सरकार की कूटनीतिक प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस मामले पर त्वरित और आत्मविश्वास भरा रुख अपनाया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। Apple के पास वैकल्पिक विकल्प हैं और उन्हें इस स्थिति को संभालने में कोई दिक्कत नहीं होगी। यह मुद्दा मुख्य रूप से Apple और फॉक्सकॉन के बीच है।” यह बयान न केवल भारत की स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी बढ़ती भूमिका को लेकर आश्वस्त है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉक्सकॉन और Apple ने इस संभावना के लिए पहले से तैयारी कर ली थी, क्योंकि पिछले चार-पांच महीनों से चीनी इंजीनियरों की वापसी की आशंका थी। इस दौरान, फॉक्सकॉन ने ताइवानी, वियतनामी, और दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों को लाने की योजना बनाई और चीनी भाषा में संचालित होने वाली मशीनों को अंग्रेजी भाषा में रिकॉन्फिगर करने का काम शुरू किया।

Apple और फॉक्सकॉन की रणनीति

फॉक्सकॉन और Apple ने इस चुनौती को अवसर में बदलने की दिशा में कदम उठाए हैं:

  1. वैकल्पिक कर्मचारी: फॉक्सकॉन ने चीनी इंजीनियरों की जगह ताइवान, वियतनाम, और ब्राजील जैसे देशों से विशेषज्ञों को लाने की योजना बनाई है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि प्रोडक्शन लाइन में कोई बड़ी रुकावट न आए।
  2. मशीनों का रिकॉन्फिगरेशन: फॉक्सकॉन ने अपनी चीनी भाषा आधारित मशीनों को अंग्रेजी भाषा में संचालित करने के लिए रीट्रोफिटिंग शुरू की है, ताकि भारतीय और अन्य गैर-चीनी कर्मचारी इन्हें आसानी से चला सकें। यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी होने की उम्मीद है।
  3. नए निवेश और विस्तार: फॉक्सकॉन तमिलनाडु में एक नया iPhone असेंबली प्लांट बना रहा है और कर्नाटक में 25,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ शुरू कर रहा है, जो 50,000 से अधिक नौकरियां पैदा करेगा। इसके अलावा, तमिलनाडु में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए एक नई सुविधा की योजना है।
  4. स्थानीय प्रशिक्षण पर जोर: फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारतीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि दीर्घकाल में चीनी विशेषज्ञों पर निर्भरता कम हो।

iPhone उत्पादन पर प्रभाव

हालांकि चीनी इंजीनियरों की वापसी से असेंबली लाइन की दक्षता पर अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है, विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों का मानना है कि यह उत्पादन की गुणवत्ता या iPhone 17 के उत्पादन समय पर असर नहीं डालेगा।

  • वर्तमान स्थिति: वित्तीय वर्ष 2024-25 में, भारत में 14 अरब डॉलर मूल्य के iPhone असेंबल किए गए, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 20% है। इस साल, Apple का लक्ष्य 60 मिलियन iPhone उत्पादन का है, जो पिछले साल के 35-40 मिलियन से काफी अधिक है।
  • निर्यात वृद्धि: मार्च 2025 में, भारत से निर्यात किए गए 97.6% iPhone अमेरिका गए, जो 219% की वृद्धि दर्शाता है। यह भारत की Apple की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
  • रोजगार सृजन: Apple का भारत में मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, और अन्य वेंडरों के माध्यम से 2 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जो इसे देश का सबसे बड़ा तकनीकी रोजगार सृजनकर्ता बनाता है।

भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षा

भारत की “मेक इन इंडिया” पहल ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2017 से शुरू हुआ iPhone उत्पादन अब इस स्तर पर पहुंच गया है कि दुनिया का हर सातवां iPhone भारत में बनता है। फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे साझेदारों के साथ, भारत ने न केवल iPhone उत्पादन में वृद्धि की है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों, डिजिटल स्वास्थ्य, और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना बनाई है।

हालांकि, चीनी इंजीनियरों की वापसी और उपकरणों के निर्यात पर चीन के प्रतिबंध भारत के लिए चुनौतियां पेश करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने से रोकना है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता काइल चैन ने कहा, “चीन भारत को एक भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखता है, और वह भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को सीमित करने के लिए कदम उठा रहा है।”

भारत सरकार और Apple की दीर्घकालिक रणनीति

भारत सरकार और Apple दोनों इस स्थिति को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। सरकार ने न केवल फॉक्सकॉन और Apple को वैकल्पिक संसाधनों के लिए समर्थन देने का वादा किया है, बल्कि स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए नई सब्सिडी और टैरिफ कटौती की भी योजना बनाई है। इसके अलावा, Apple ने भारत में डेटा प्रोसेसिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए 35 मिलियन डॉलर की सहायक कंपनी स्थापित की है, जो भारत की तकनीकी क्षमता को और मजबूत करेगी।

चीनी इंजीनियरों की वापसी और उपकरण निर्यात पर प्रतिबंध निश्चित रूप से भारत के लिए एक चुनौती हैं, लेकिन भारत सरकार, फॉक्सकॉन, और Apple ने इसे अवसर में बदलने की पूरी तैयारी कर ली है। फॉक्सकॉन की ताइवानी और वियतनामी विशेषज्ञों को लाने की रणनीति, मशीनों का रिकॉन्फिगरेशन, और स्थानीय कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान भारत की दीर्घकालिक मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। भारत अब वैश्विक iPhone उत्पादन का 20% हिस्सा संभाल रहा है और 2026 तक अमेरिका के लिए अधिकांश iPhone भारत में बनाने का लक्ष्य रखता है।

यह घटना भारत-चीन के बीच आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और उजागर करती है। हालांकि, भारत का आत्मविश्वास और Apple की वैकल्पिक रणनीतियां यह संदेश देती हैं कि कोई भी बाधा भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने से नहीं रोक सकती। क्या भारत इस दौड़ में चीन को पीछे छोड़ पाएगा? यह समय बताएगा, लेकिन वर्तमान में भारत की प्रगति और रणनीति इसे एक मजबूत दावेदार बनाती है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय साझा करें।

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