भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जो बाजार की उम्मीदों से काफी नीचे रहे। कंपनी का शुद्ध लाभ 36% गिरकर ₹246.88 करोड़ रह गया, जबकि ब्याज आय में 29% की वृद्धि दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे खर्चों में 60% की भारी बढ़ोतरी और बढ़ते गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
IREDA के वित्तीय प्रदर्शन का विश्लेषण
- राजस्व में वृद्धि, लेकिन लाभ में गिरावट: IREDA का राजस्व पिछली तिमाही की तुलना में बढ़कर ₹10,947.60 करोड़ हो गया, लेकिन शुद्ध लाभ ₹501.55 करोड़ से घटकर ₹246.88 करोड़ रह गया।
- खर्चों में भारी उछाल: कंपनी के खर्च 60% बढ़कर ₹1,655 करोड़ हो गए, जिसने लाभ मार्जिन को प्रभावित किया।
- NPA की समस्या बढ़ी: ग्रॉस NPA 2.5% से बढ़कर 5.25% हो गया, जबकि नेट NPA 1.5% से बढ़कर 2% से अधिक पर पहुँच गया।
जसोल इंजीनियरिंग घोटाले का असर
IREDA ने जसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड के साथ हुए लोन घोटाले का खुलासा किया है। सेबी की रिपोर्ट के बाद कंपनी ने पाया कि जसोल ने दस्तावेजों में हेराफेरी की थी। इसके बाद IREDA ने ₹81.62 करोड़ की गारंटी को लोन में बदल दिया और ₹510.01 करोड़ की वसूली के लिए दिवालिया प्रक्रिया शुरू की। इसके अलावा, जसोल की सहयोगी कंपनी से ₹218.95 करोड़ की वसूली की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
शेयर प्रदर्शन और विशेषज्ञों की राय
IREDA के शेयरों में 11 जुलाई को 6.2% की गिरावट देखी गई। पिछले एक साल में यह शेयर 43% से अधिक गिर चुका है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में कंपनी की विकास कहानी मजबूत है। 2019 से 2025 के बीच IREDA का राजस्व ₹19 करोड़ से बढ़कर ₹6,743 करोड़ हो गया, जबकि शुद्ध लाभ ₹249 करोड़ से बढ़कर ₹1,698 करोड़ पर पहुँच गया।
निवेशकों के लिए सलाह
- लंबी अवधि के निवेशक: IREDA के मजबूत विकास ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, विशेषज्ञ लंबी अवधि में स्टॉक में संभावित उछाल की उम्मीद कर रहे हैं।
- अल्पकालिक निवेशक: जसोल घोटाले और बढ़ते NPA के कारण अगले कुछ तिमाहियों में स्टॉक में अस्थिरता बनी रह सकती है।
IREDA की वर्तमान चुनौतियों के बावजूद, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत सरकार के फोकस को देखते हुए कंपनी के भविष्य को लेकर आशावाद बना हुआ है। हालाँकि, निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकारों से परामर्श के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए।