उत्तर प्रदेश के जेवर, गौतमबुद्ध नगर में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-21 में 1000 एकड़ में विश्व की सबसे बड़ी फिल्म सिटी का निर्माण तेजी से शुरू हो चुका है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक फिल्म निर्माण का केंद्र बनाना और स्थानीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। इस मेगा परियोजना को फिल्म निर्माता बोनी कपूर की कंपनी बेव्यू प्रोजेक्ट्स एलएलपी और रियल एस्टेट कंपनी भूटानी ग्रुप के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह लेख परियोजना की निर्माण प्रक्रिया, इसकी विशेषताओं, और बेव्यू-भूटानी की भूमिका पर प्रकाश डालता है।
निर्माण प्रक्रिया
- परियोजना का दायरा:
- कुल क्षेत्र: 1000 एकड़, जिसमें पहले चरण में 230 एकड़ पर निर्माण होगा।
- अनुमानित लागत: ₹1510 करोड़।
- समयसीमा: पूरी परियोजना को तीन चरणों में 8 वर्षों (2920 दिन) में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में फिल्म निर्माण सुविधाएं और फिल्म इंस्टीट्यूट 3 वर्षों (1095 दिन) में तैयार होंगे।
- चरणबद्ध विकास:
- पहला चरण (230 एकड़):
- 155 एकड़ में फिल्म स्टूडियो, साउंड स्टेज, पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट, और एक अत्याधुनिक फिल्म इंस्टीट्यूट।
- 75 एकड़ में व्यावसायिक केंद्र (रिटेल, मॉल, होटल, ऑफिस)।
- 13-14 अत्याधुनिक साउंड स्टूडियो और 3 लाख वर्ग मीटर में फिल्म इंस्टीट्यूट।
- निर्माण शुरू: मार्च 2025 से, पहले स्टूडियो के 18 महीने में तैयार होने की उम्मीद।
- विशेष सुविधाएं: पानी के अंदर शूटिंग के लिए वाटर टैंक, बड़ी LED स्क्रीन के साथ वर्चुअल स्टूडियो, VFX और 3D स्टूडियो, हेलीपैड, और स्थायी सेट्स (जैसे मंदिर, रेलवे स्टेशन, समुद्र, चारधाम थीम)।
- दूसरा और तीसरा चरण (770 एकड़):
- विला, गोल्फ कोर्स, मनोरंजन पार्क, और एक विशाल ‘ऊं’ संरचना (1 करोड़ वर्ग फीट), जो अंतरिक्ष से दिखाई देगी। इसके साथ तालाब और कृत्रिम नहरें (नाव, स्टीमर, याट के लिए)।
- पहला चरण (230 एकड़):
- मास्टर प्लान:
- 30 जनवरी 2025 को मास्टर प्लान को मंजूरी मिली।
- डिजाइन: कनाडा की कंपनी फोरेक ने 21 देशों का दौरा कर आधुनिक तकनीकों के आधार पर डिजाइन तैयार किया।
- निर्माण शुरू: 27 फरवरी 2025 को बेव्यू प्रोजेक्ट्स और भूटानी ग्रुप ने 230 एकड़ जमीन का भौतिक कब्जा लिया।
बेव्यू प्रोजेक्ट्स एलएलपी और भूटानी ग्रुप की भूमिका
- टेंडर प्रक्रिया:
- यमुना प्राधिकरण ने 30 सितंबर 2023 को अंतरराष्ट्रीय बिड जारी की, जिसकी अंतिम तिथि 5 जनवरी 2024 थी।
- चार कंपनियों ने बोली लगाई: बेव्यू प्रोजेक्ट्स एलएलपी (बोनी कपूर), सुपरसोनिक टेक्नोबिल्ड (मैडॉक फिल्म्स, अक्षय कुमार), सुपर कैसेट्स (टी-सीरीज), और 4 लायंस फिल्म्स (केसी बोकाडिया)।
- बेव्यू प्रोजेक्ट्स और भूटानी ग्रुप ने 18% रेवेन्यू शेयर की सबसे ऊंची बोली लगाकर टेंडर जीता।
- कंसेशन एग्रीमेंट:
- 27 जून 2024 को यीडा और बेव्यू प्रोजेक्ट्स के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर।
- लाइसेंस: 90 साल का लाइसेंस, जिसमें कंपनी को कुल आय का 18% यमुना प्राधिकरण को देना होगा।
- दायित्व: डिजाइन, वित्तपोषण, निर्माण, संचालन, और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी बेव्यू-भूटानी की। जमीन का ट्रांसफर या सब-लीज की अनुमति नहीं, केवल सब-लाइसेंस की छूट।
- प्रतिबद्धता:
- बोनी कपूर ने कहा कि यह फिल्म सिटी वैश्विक स्तर की होगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय तकनीकों (जैसे पानी के अंदर शूटिंग, VFX) का उपयोग होगा।
- भूटानी ग्रुप के सीईओ आशीष भूटानी ने बताया कि फिल्म सिटी न्यू जनरेशन की होगी, जो मुंबई और रामोजी फिल्म सिटी से अलग होगी। यह अन्य फिल्म सिटी की कमियों (जैसे अपर्याप्त तकनीक, स्थान की कमी) को सुधारते हुए बनाई जाएगी।
- दोनों कंपनियां सालाना 100 से अधिक फिल्में बनाने की योजना रखती हैं, जिसमें स्थानीय टैलेंट (इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षित) का उपयोग होगा।
प्रमुख विशेषताएं
- आधुनिक सुविधाएं:
- साउंड स्टेज, पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट, VFX और 3D स्टूडियो, वर्चुअल स्टूडियो, और पानी के अंदर शूटिंग की सुविधा।
- हेलीपैड, रनवे, और स्थायी सेट्स (मंदिर, रेलवे स्टेशन, समुद्र, चारधाम थीम)।
- फिल्म इंस्टीट्यूट: निर्देशन, स्क्रिप्ट राइटिंग, सिनेमैटोग्राफी, एनिमेशन, और साउंड रिकॉर्डिंग के पाठ्यक्रम।
- व्यावसायिक केंद्र: होटल, मॉल, रिटेल, और ऑफिस स्पेस।
- विश्व का सबसे बड़ा ‘ऊं’: 250 एकड़ में 1 करोड़ वर्ग फीट का ‘ऊं’ संरचना, जो अंतरिक्ष से दिखाई देगी।
- रोजगार सृजन: 5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां, विशेष रूप से हिंदी भाषी क्षेत्रों के युवाओं के लिए।
- कनेक्टिविटी: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के पास होने से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी। यमुना प्राधिकरण 75 मीटर की इंटरलिंक लेन बनाएगा।
सामरिक और आर्थिक महत्व
- वैकल्पिक केंद्र: मुंबई और हैदराबाद (रामोजी फिल्म सिटी) के बाद जेवर फिल्म सिटी फिल्म निर्माताओं के लिए किफायती और आधुनिक विकल्प प्रदान करेगी।
- क्षेत्रीय विकास: जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी की निकटता क्षेत्र को निवेश और पर्यटन का हब बनाएगी।
- स्थानीय टैलेंट को मंच: फिल्म इंस्टीट्यूट और स्टूडियो स्थानीय युवाओं को एक्टिंग, निर्देशन, VFX, और AI में प्रशिक्षण और अवसर देगा।
- भाषा समावेशिता: सभी भाषाओं के फिल्म निर्माताओं का स्वागत, जिससे महाराष्ट्र के भाषा विवादों के बीच यह एक समावेशी मंच बनेगा।
- आर्थिक योगदान: ₹20,000 करोड़ का निवेश और सांस्कृतिक विरासत का प्रचार।
चुनौतियां
- प्रतिस्पर्धा: मुंबई और रामोजी फिल्म सिटी जैसे स्थापित केंद्रों से प्रतिस्पर्धा।
- समयबद्धता: देरी होने पर बेव्यू-भूटानी पर ₹10 लाख प्रतिदिन का जुर्माना।
- पर्यावरणीय प्रभाव: बड़े पैमाने पर निर्माण से पर्यावरण पर प्रभाव, जैसे वन कटाई और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर, जिस पर अभी चर्चा कम हुई है।
- किसानों का विस्थापन: 230 एकड़ के लिए फसलों को हटाया गया, जिससे स्थानीय किसानों में असंतोष हो सकता है।
जनता की राय
- “जेवर फिल्म सिटी और एयरपोर्ट यूपी को ग्लोबल हब बनाएंगे। योगी जी का विजन कमाल का है।”
- अन्य ने रोजगार और टैलेंट को मंच की सराहना की: “हिंदी भाषी युवाओं के लिए जेवर फिल्म सिटी गेम-चेंजर होगी।”
- कुछ ने भाषा विवाद पर टिप्पणी की: “महाराष्ट्र में भाषा विवाद के बीच जेवर फिल्म सिटी सभी के लिए समावेशी मंच बनेगी।”
जेवर में बन रही विश्व की सबसे बड़ी फिल्म सिटी उत्तर प्रदेश को फिल्म निर्माण, रोजगार सृजन, और आर्थिक विकास का नया केंद्र बनाएगी। बेव्यू प्रोजेक्ट्स एलएलपी और भूटानी ग्रुप की साझेदारी में यह परियोजना अत्याधुनिक तकनीकों और सुविधाओं के साथ न्यू जनरेशन की फिल्म सिटी होगी। हालांकि, पर्यावरणीय प्रभाव और समयबद्धता जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना होगा। यह परियोजना न केवल भारतीय फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयां देगी, बल्कि स्थानीय टैलेंट को वैश्विक मंच प्रदान करेगी।
आपकी राय: क्या जेवर फिल्म सिटी भारत को वैश्विक फिल्म निर्माण का केंद्र बना पाएगी? क्या यह मुंबई और रामोजी फिल्म सिटी को टक्कर दे सकती है? कमेंट में साझा करें।
