गर्मियों का मौसम और आम का ज़िक्र एक-दूसरे के बिना अधूरा है। बाज़ार में आम की कीमतें आमतौर पर 100 से 200 रुपये प्रति किलो तक होती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक आम की कीमत 80,000 रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है? जी हाँ, यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि हकीकत है। दुनिया का सबसे महंगा आम, मियाज़ाकी, अब भारत में भी उगाया जा रहा है, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुँच जाती है। आइए, जानते हैं इस आम की खासियत और इसकी आसमान छूती कीमत के पीछे की कहानी।
I. मियाज़ाकी आम की उत्पत्ति और खासियत
मियाज़ाकी आम मूल रूप से जापान के मियाज़ाकी प्रांत की देन है, जहाँ इसे ‘ताइयो नो तमागो’ यानी ‘सूरज का अंडा’ कहा जाता है। इसका नाम इसके चमकदार लाल रंग और गोल आकार के कारण पड़ा है। यह आम अपनी बेमिसाल मिठास, मक्खन जैसी बनावट और रसीलेपन के लिए जाना जाता है। इसमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता, जो इसे और भी खास बनाता है। इसकी मिठास सामान्य आमों की तुलना में 15% अधिक होती है, और यह एंटी-ऑक्सीडेंट्स, बीटा-कैरोटीन, विटामिन A, C, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी बनाता है।
II. भारत में मियाज़ाकी की खेती
हाल के वर्षों में भारत के कुछ किसानों ने मियाज़ाकी आम की खेती शुरू की है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र में इसकी बागवानी शुरू हुई है। बिहार के पटना जिले के मसौढ़ी ब्लॉक के कोरियांव गांव में भी किसान सुरेंद्र सिंह ने 2021 में जापान से इस आम के पौधे मंगवाए और पहली फसल में 21 आम प्राप्त किए। इसके अलावा, बिहार के नालंदा में दो भाई, मुकेश और रामकुमार, अपने तीन एकड़ के बगीचे में मियाज़ाकी समेत कई दुर्लभ प्रजातियों की खेती कर रहे हैं। ओडिशा के कालाहांडी जिले में किसान रक्ष्याकर भोई भी इस आम की खेती में सफलता पा चुके हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित आम मेले में मियाज़ाकी आम ने सबका ध्यान खींचा, जहाँ इसे 2.75 लाख रुपये प्रति किलो की कीमत पर प्रदर्शित किया गया।
III. महंगे होने के कारण
मियाज़ाकी आम की कीमत कई कारणों से इतनी अधिक है। पहला, इसकी पैदावार बहुत कम होती है। जहाँ एक सामान्य आम के पेड़ से एक क्विंटल तक फल प्राप्त हो सकता है, वहीं मियाज़ाकी के एक पेड़ से केवल 2 से 2.5 किलो आम ही मिलते हैं। दूसरा, इसकी खेती में अत्यधिक मेहनत और लागत लगती है। इसे ग्रीनहाउस में विशेष जलवायु परिस्थितियों, जैसे तेज़ धूप और हल्की बारिश, में उगाया जाता है। प्रत्येक आम को कीटों और नुकसान से बचाने के लिए अलग-अलग जाल में लपेटा जाता है, और हस्त-परागण जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। तीसरा, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में केवल 5-15% आम ही सख्त गुणवत्ता मानकों को पास करते हैं, जिनका वजन लगभग 350 ग्राम और बेदाग, गोल आकार होना चाहिए।
IV. सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
मियाज़ाकी आम की कीमत और दुर्लभता के कारण इसके बगीचों की सुरक्षा भी किसी खजाने से कम नहीं है। वाराणसी के चोलापुर में इस आम के बगीचे में बाउंसर और चौकीदार 24 घंटे तैनात रहते हैं। सीसीटीवी कैमरे हर पेड़ और फल पर नज़र रखते हैं, ताकि चोरी या नुकसान से बचा जा सके। बिहार के नालंदा में भी किसानों ने अपने बगीचे में गार्ड कुत्तों और कैमरों की व्यवस्था की है।
V. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार और नीलामी
मियाज़ाकी आम की नीलामी अक्सर जापान में होती है, जहाँ इसकी कीमत 200 से 300 डॉलर (लगभग 16,000 से 24,000 रुपये) प्रति फल तक हो सकती है। भारत में भी इसकी मांग बढ़ रही है, खासकर अमीर वर्ग और आम के शौकीनों में। इसकी सीमित उपलब्धता और विशेष स्वाद इसे स्टेटस सिंबल बनाता है।
VI. क्या यह कीमत उचित है
मियाज़ाकी आम की कीमत को लेकर सवाल उठते हैं कि क्या यह वाकई अपने दाम के लायक है? इसकी मिठास, पोषक तत्व और दुर्लभता इसे खास बनाते हैं, लेकिन इसकी कीमत में स्टेटस सिंबल का भी बड़ा योगदान है। यह आम अमीरों और कलेक्टर्स के बीच लोकप्रिय है, जो इसे लक्ज़री फल के रूप में देखते हैं। भारत में इसकी खेती बढ़ने से भविष्य में इसकी कीमत में कमी आ सकती है, लेकिन अभी यह ‘सूरज का अंडा’ अपनी चमक और कीमत के साथ बाज़ार में राज कर रहा है।
