ब्रिटेन में हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसके अनुसार पाकिस्तानी मूल के समुदाय में कजिन मैरिज (चचेरे भाई-बहनों के बीच शादी) की वजह से जन्म लेने वाले बच्चों में आनुवंशिक विकारों और जन्मदोषों की दर अधिक पाई गई है। यह रिपोर्ट ब्रिटिश स्वास्थ्य अध्ययनों और शोध डेटा पर आधारित है, जिसने सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच एक गहरी बहस छेड़ दी है।
ब्रिटेन में कजिन मैरिज और आनुवंशिक जोखिम
ब्रिटेन की कुल आबादी में पाकिस्तानी मूल के लोगों की हिस्सेदारी केवल 3% है, लेकिन जन्मदोषों के मामलों में उनका योगदान 33% तक पहुँच गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका प्रमुख कारण कजिन मैरिज है, जिसमें माता-पिता के समान जीन्स होने की वजह से बच्चों में आनुवंशिक बीमारियाँ (जैसे मंदबुद्धि, हृदय रोग, या न्यूरोलॉजिकल विकार) होने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्रैडफोर्ड शहर में एक अध्ययन से पता चला कि 60% पाकिस्तानी परिवारों में कजिन मैरिज की प्रथा है, हालाँकि यह दर पिछले कुछ वर्षों में घटकर 46% हो गई है। फिर भी, इस समुदाय में जन्म लेने वाले बच्चों में स्पीच और भाषा विकास संबंधी समस्याएँ (11% मामले) और अन्य विकासात्मक देरी (10% अंतर) देखी गई हैं।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर ब्रिटिश कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कजिन मैरिज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह प्रथा न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि दीर्घकाल में समाज पर भार भी बढ़ाती है। हालाँकि, उनके बयान को कुछ लोगों ने नस्लीय पूर्वाग्रह से जोड़कर आलोचना की है।
मुस्लिम समुदाय के कई संगठनों ने इस रिपोर्ट को “सांस्कृतिक हमला” बताया है और कहा है कि इस तरह के आरोप समुदायों के बीच विभाजन पैदा करते हैं। उनका मानना है कि इस मुद्दे को संवेदनशीलता से उठाने के बजाय, शिक्षा और आनुवंशिक परामर्श जैसे समाधानों पर ध्यान देना चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समाधान
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कजिन मैरिज से होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
- जेनेटिक काउंसलिंग: विवाह से पहले आनुवंशिक जाँच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराना।
- स्वास्थ्य शिक्षा: समुदायों को आनुवंशिक बीमारियों के बारे में जागरूक करना।
- सांस्कृतिक संवाद: परंपराओं को बदनाम किए बिना, वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर चर्चा करना।
ब्रिटेन में कजिन मैरिज और आनुवंशिक विकारों का मुद्दा एक जटिल सामाजिक-चिकित्सकीय समस्या है, जिसका समाधान केवल कानूनी प्रतिबंध से नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संभव है। जहाँ एक ओर आनुवंशिक जोखिमों को गंभीरता से लेना चाहिए, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक संवेदनशीलता भी बनाए रखनी होगी।