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यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हुए मराठाओ के 12 किले

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Last updated: July 21, 2025 4:17 pm
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यूनेस्को द्वारा 12 मराठा किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करना भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। ये किले, जिन्हें सामूहिक रूप से मराठा सैन्य परिदृश्य के रूप में जाना जाता है, 17वीं से 19वीं शताब्दी के मराठा साम्राज्य की सैन्य शक्ति, रणनीति, और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक हैं। इन किलों का संरक्षण न केवल अतीत की विरासत को सहेजना है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक अमूल्य खजाना भी है। इन किलों में निहित इतिहास, संस्कृति, और स्वाभिमान की गाथा को अब वैश्विक मंच पर मान्यता मिली है। इस लेख में हम इन 12 किलों, उनके ऐतिहासिक महत्व, और यूनेस्को विश्व धरोहर की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

यूनेस्को विश्व धरोहर सूची: एक अवलोकन

यूनेस्को ने 1972 में विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत संरक्षण सम्मेलन को अपनाया, जिसे 1975 में लागू किया गया। इसका उद्देश्य उन स्थलों की पहचान और संरक्षण करना है, जिनका सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value) हो। इन स्थलों को संरक्षित करने के लिए एक विश्व धरोहर समिति और विश्व धरोहर सूची की स्थापना की गई। सदस्य देश अपने स्थलों को नामांकित करते हैं, जिनका मूल्यांकन सलाहकार निकायों द्वारा किया जाता है। यदि स्थल यूनेस्को के मानदंडों पर खरा उतरता है, तो उसे सूची में शामिल किया जाता है। भारत के लिए मराठा सैन्य परिदृश्य 44वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है, जो 2024 में असम के चराइदेव मोइदम के बाद शामिल हुआ। संरक्षण के लिए देश अपनी राष्ट्रीय योजनाओं को विश्व धरोहर कोष के सहयोग से लागू करते हैं।

मराठा सैन्य परिदृश्य: ऐतिहासिक महत्व

मराठा किले 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बनाए गए या उन्नत किए गए, जो मराठा साम्राज्य की सैन्य शक्ति, व्यापार, सुरक्षा, और क्षेत्रीय नियंत्रण को दर्शाते हैं। ये किले समुद्री तटों और पर्वतीय क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से स्थित हैं, जो मराठाओं की सैन्य रणनीति और समुद्री शक्ति को प्रदर्शित करते हैं। ये किले न केवल पत्थरों की संरचनाएं हैं, बल्कि मराठा साम्राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गाथा का प्रतीक हैं। 47वीं विश्व धरोहर समिति के सत्र में भारत ने इन किलों को नामांकित किया, जिसे स्वीकृति मिली।

12 मराठा किलों की सूची और उनका महत्व

ये 12 किले, जिनमें 11 महाराष्ट्र और 1 तमिलनाडु में स्थित है, निम्नलिखित हैं:

1. रायगढ़ किला (महाराष्ट्र)

मराठा साम्राज्य की राजधानी, जहां 1674 में छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ। यह किला राजमहल, तालाब, बाजार, और सैनिक छावनी के साथ एक समृद्ध परिसर है। 1818 में यह ब्रिटिश नियंत्रण में चला गया।

2. प्रतापगढ़ किला (महाराष्ट्र)

1656 में शिवाजी महाराज द्वारा निर्मित, यह किला महाबलेश्वर से 24 किमी दूर सह्याद्री की कठिन भौगोलिक स्थिति में है। यह मराठा सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

3. पन्हाला किला (महाराष्ट्र)

12वीं शताब्दी में शिलाहार वंश द्वारा निर्मित, यह किला यादव, बहमनी, आदिलशाही, और अंततः मराठाओं के अधीन रहा। 14 किमी की परिधि के साथ यह मराठा किलों में सबसे बड़ा है।

4. शिवनेरी किला (महाराष्ट्र)

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान, यह किला 6ठी शताब्दी में एक रणनीतिक सैन्य चौकी के रूप में बनाया गया। इसका त्रिकोणीय आकार और सात-स्तरीय सुरक्षा तंत्र इसे विशिष्ट बनाता है। किले में गंगा-जमुना झरना और बादामी तालाब आज भी मौजूद हैं।

5. लोहगढ़ किला (महाराष्ट्र)

लोनावाला के पास 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित, 10वीं शताब्दी में लोहटामिया वंश द्वारा निर्मित। इसकी “विंचू काटा” (बिच्छू की पूंछ) संरचना और चार प्रमुख दरवाजे (गणेश, नारायण, हनुमान, महादरवाजा) इसे अनूठा बनाते हैं।

6. सलहेर किला (महाराष्ट्र)

नासिक जिले में 5,141 फीट की ऊंचाई पर स्थित, यह महाराष्ट्र का सबसे ऊंचा किला है। इसे गवलगढ़ या सुल्तानगढ़ भी कहा जाता है। 1672 में सलहेर की लड़ाई में मराठाओं ने मुगलों को हराया था।

7. सिंधुदुर्ग किला (महाराष्ट्र)

1664-67 में शिवाजी महाराज के सैन्य अभियंता हीरोजी इंदुलकर द्वारा निर्मित, यह अरब सागर के खुरटे द्वीप पर कोकण तट के पास है। यह मराठा नौसेना का महत्वपूर्ण केंद्र था।

8. सुवर्णदुर्ग किला (महाराष्ट्र)

रत्नागिरी जिले के हरनाई बंदरगाह के पास एक द्वीप पर स्थित, यह 1660 में शिवाजी महाराज द्वारा जीता गया। यह मराठा नौसेना का मुख्य अड्डा था।

9. विजयदुर्ग किला (महाराष्ट्र)

12वीं शताब्दी में शिलाहार वंश द्वारा निर्मित, जिसे पहले घेरिया कहा जाता था। 1653 में शिवाजी महाराज ने इसे जीता और इसका नाम विजयदुर्ग रखा। इसकी 200 मीटर लंबी समुद्री सुरंग इसे विशिष्ट बनाती है।

10. खानदेरी किला (महाराष्ट्र)

1679 में शिवाजी महाराज द्वारा निर्मित, यह अलीबाग तट के पास एक द्वीप पर स्थित है। यह मराठा समुद्री शक्ति को मजबूत करने का हिस्सा था।

11. राजगढ़ किला (महाराष्ट्र)

1647 में शिवाजी महाराज द्वारा अधिग्रहित, यह 26 साल तक मराठा साम्राज्य की राजधानी रहा। यहां शिवाजी की पत्नी साईबाई का निधन और उनके पुत्र राजाराम का जन्म हुआ।

12. जिंजी किला (तमिलनाडु)

विल्लुपुरम जिले में राजगिरी, कृष्णगिरी, और चंद्रायण दुर्ग पहाड़ियों पर स्थित, यह दक्षिण भारत का सबसे मजबूत किला माना जाता है। यह मराठा सैन्य परिदृश्य का एकमात्र गैर-महाराष्ट्र किला है।

विश्व धरोहर के रूप में महत्व

इन 12 किलों का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:

  1. सांस्कृतिक महत्व: ये किले मराठा साम्राज्य की सैन्य रणनीति, समुद्री शक्ति, और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाते हैं।
  2. रणनीतिक स्थिति: समुद्री और पर्वतीय क्षेत्रों में इनकी स्थिति मराठा साम्राज्य की रणनीतिक बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करती है।
  3. संरक्षण: विश्व धरोहर की मान्यता इन किलों के संरक्षण को सुनिश्चित करेगी, ताकि भावी पीढ़ियां इस विरासत को देख सकें।
  4. वैश्विक मान्यता: यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाता है।

मराठा सैन्य परिदृश्य के 12 किलों का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत के लिए गर्व का क्षण है। ये किले केवल पत्थर की संरचनाएं नहीं, बल्कि मराठा साम्राज्य की शक्ति, स्वाभिमान, और सांस्कृतिक गौरव की कहानी हैं। इनका संरक्षण न केवल अतीत का सम्मान है, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रेरणा भी है। यह उपलब्धि भारत की समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर उजागर करती है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को मजबूत करती है।

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