नई दिल्ली: गूगल (अल्फाबेट इंक) ने भारत में अपना सबसे बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। कंपनी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम में 51,000 करोड़ रुपये (6 अरब डॉलर) की लागत से एक हाइपरस्केल डाटा सेंटर बनाएगी, जो भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देगा।
क्या खास होगा इस डाटा सेंटर में
- 1 गीगावाट बिजली क्षमता वाला यह डाटा सेंटर एशिया के सबसे बड़े सेंटर्स में से एक होगा।
- पूरी तरह रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) से चलेगा, जिस पर गूगल 17,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
- 500 करोड़ GB तक डाटा स्टोर करने की क्षमता – यानी हर भारतीय के लिए 35 GB डाटा!
- साइबर सुरक्षा, ऑटोमेटिक बैकअप और डिजास्टर रिकवरी सिस्टम जैसी एडवांस तकनीकों से लैस।
क्यों है यह इतना अहम
- भारत में गूगल की पहली और सबसे बड़ी डाटा सेंटर परियोजना।
- 10,000+ नौकरियों का सृजन होगा, जिसमें टेक और नॉन-टेक दोनों सेक्टर्स शामिल हैं।
- भारतीय यूजर्स को तेज स्पीड और सुरक्षित सर्विस मिलेगी, क्योंकि डाटा अब विदेशी सर्वर्स की बजाय स्थानीय सेंटर्स में स्टोर होगा।
डाटा सेंटर कैसे काम करता है
- मैनेजमेंट लेयर: यूजर की क्वेरी (जैसे Google सर्च) को प्रोसेस करती है।
- वर्चुअल लेयर: डाटा को SQL जैसी भाषाओं में ट्रांसलेट करती है।
- फिजिकल लेयर: असली सर्वर्स और हार्ड ड्राइव्स डाटा को स्टोर करते हैं।
अमेरिका-भारत ट्रेड टेंशन के बीच बड़ा संकेत
इस निवेश की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। हालांकि, गूगल ने साफ किया है कि वह भारत के डिजिटल विकास में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहती है।
भविष्य की योजनाएं
गूगल ने अप्रैल 2025 में ही 75 अरब डॉलर के वैश्विक डाटा सेंटर विस्तार का ऐलान किया था। विशाखापट्नम के बाद, कंपनी मुंबई और बेंगलुरु में भी ऐसे सेंटर्स बना सकती है।
आपकी राय
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