Retimes india
  • Home
  • Education News
  • Technology
  • Uncategorized
  • India News
  • Science
  • sports
  • Stock Market News
  • Defence News
Reading: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एससी-एसटी में सब-क्लासिफिकेशन को मंजूरी
Share
Retimes indiaRetimes india
Font ResizerAa
  • Home
  • Education News
  • Technology
  • Uncategorized
  • India News
  • Science
  • sports
  • Stock Market News
  • Defence News
  • Home
  • Education News
  • Technology
  • Uncategorized
  • India News
  • Science
  • sports
  • Stock Market News
  • Defence News
© All Rights Reserved. Retimes India. Hosted on Elga Cloud Web Hosting Company.
Retimes india > Blog > Education News > सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एससी-एसटी में सब-क्लासिफिकेशन को मंजूरी
Education News

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एससी-एसटी में सब-क्लासिफिकेशन को मंजूरी

Retimes india
Last updated: July 27, 2025 6:32 pm
Retimes india
Share
Supreme Court's historic decision: Sub-classification in SC-ST approved
SHARE

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के भीतर सब-क्लासिफिकेशन को अनुमति दी गई। इस फैसले ने 2004 के ई.वी. चिन्हैया बनाम आंध्र प्रदेश मामले में दिए गए निर्णय को पलट दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी-एसटी में सब-क्लासिफिकेशन समानता के अधिकार के खिलाफ है। सात जजों की बेंच, जिसमें छह जजों ने सहमति जताई, ने यह फैसला सुनाया कि राज्य सरकारें अब अपने स्तर पर एससी-एसटी के लिए रिजर्वेशन को उप-श्रेणियों में बांट सकती हैं, बशर्ते इसके लिए पुख्ता डेटा और तर्क हों। यह फैसला भारत की जातिगत राजनीति और आरक्षण नीति को गहराई से प्रभावित करेगा।

सब-क्लासिफिकेशन का अर्थ

सब-क्लासिफिकेशन का मतलब है कि एससी (15%) और एसटी (7.5%) के लिए निर्धारित आरक्षण को उनके भीतर विभिन्न जातियों के बीच अलग-अलग अनुपात में बांटा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी राज्य में एससी के अंतर्गत 39 जातियां हैं, तो राज्य सरकार यह तय कर सकती है कि इनमें से कुछ जातियों को अधिक और कुछ को कम आरक्षण मिले, बशर्ते यह निर्णय सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन और आबादी के आधार पर डेटा द्वारा समर्थित हो। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी एक जाति को 100% आरक्षण नहीं दिया जा सकता, और सब-क्लासिफिकेशन के लिए ठोस आंकड़े प्रस्तुत करने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का 2004 का फैसला और उसका उलटना

2004 में, ई.वी. चिन्हैया बनाम आंध्र प्रदेश मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने फैसला दिया था कि एससी-एसटी में सब-क्लासिफिकेशन संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। यह फैसला अनुच्छेद 341 के आधार पर था, जो राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अनुसूचित जातियों को अधिसूचित करे। 2024 में, सात जजों की बेंच ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए इस फैसले को पलट दिया और राज्यों को सब-क्लासिफिकेशन की अनुमति दी। इस बेंच में चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ शामिल थे, जबकि जस्टिस बी.आर. गवई ने इसका विरोध किया, उनका तर्क था कि यह अनुच्छेद 341 के तहत राष्ट्रपति के अधिकार को कमजोर करता है।

पंजाब की कहानी: सब-क्लासिफिकेशन की शुरुआत

इस फैसले की जड़ें पंजाब में 1975 से शुरू होती हैं, जब पंजाब सरकार ने एससी के लिए आरक्षित सीटों को दो श्रेणियों में बांटा: एक वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदायों के लिए, और दूसरा बाकी एससी जातियों के लिए। यह व्यवस्था 2004 तक चली, लेकिन ई.वी. चिन्हैया मामले के फैसले के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (अनुच्छेद 141) के खिलाफ था। 2006 में, पंजाब सरकार ने फिर से कानून बनाकर वाल्मीकि और मजहबी सिखों के लिए सब-क्लासिफिकेशन लागू किया, लेकिन 2010 में हाईकोर्ट ने इसे फिर रद्द कर दिया। इसके बाद, पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसके परिणामस्वरूप 2020 में सात जजों की बेंच का गठन हुआ। जनवरी 2024 में तीन दिन की सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

इंदिरा साहनी केस का प्रभाव

पंजाब सरकार ने अपनी दलील में 1992 के इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया, जिसमें ओबीसी के लिए क्रीमी लेयर और गैर-क्रीमी लेयर की अवधारणा को मंजूरी दी गई थी। इस केस ने मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी के लिए 27% आरक्षण को मंजूरी दी थी और कुल आरक्षण की सीमा 50% तय की थी। पंजाब सरकार का तर्क था कि जब ओबीसी में क्रीमी लेयर के आधार पर सब-क्लासिफिकेशन हो सकता है, तो एससी-एसटी में क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए सब-क्लासिफिकेशन को मंजूरी दी।

राजनीतिक प्रभाव

यह फैसला भारत की जातिगत राजनीति को गहराई से प्रभावित करेगा, खासकर उन 17 राज्यों में जहां वोट बैंक जाति पर आधारित हैं। उदाहरण के लिए:

  1. उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी ने हाल के चुनावों में “पीडीए” (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन के आधार पर जीत हासिल की। अब दलितों के बीच सब-क्लासिफिकेशन से कुछ जातियां जो पहले किसी पार्टी की वफादार थीं, उनके वोट बैंक कमजोर हो सकते हैं, क्योंकि राज्य सरकारें कम प्रतिनिधित्व वाली जातियों को अधिक आरक्षण दे सकती हैं।
  2. फूट डालो और राज करो: यह नीति अब और गहराई तक लागू हो सकती है। कुछ जातियां जो पहले आरक्षण का अधिक लाभ ले रही थीं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व कर रही थीं, अब आपस में बंट सकती हैं। इससे नई राजनीतिक गठजोड़ और समीकरण बनेंगे।
  3. न्यायिक समीक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सब-क्लासिफिकेशन के फैसले न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएंगे। इसका मतलब है कि यदि कोई राज्य पक्षपातपूर्ण तरीके से आरक्षण बांटता है, तो वह सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इससे भविष्य में कई मुकदमे देखने को मिल सकते हैं।

क्रीमी लेयर और भविष्य की संभावनाएं

जस्टिस पंकज मिथल ने सुझाव दिया कि यदि किसी परिवार का एक सदस्य आरक्षण के जरिए उच्च पद (जैसे आईएएस या पीसीएस) प्राप्त कर लेता है, तो उसकी अगली पीढ़ी को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी एससी-एसटी के लिए क्रीमी लेयर की अवधारणा को स्पष्ट रूप से लागू नहीं किया है। भविष्य में, यदि कोई राज्य सरकार इस तरह का कानून लाती है, तो यह इंदिरा साहनी केस के तर्क के आधार पर स्वीकार्य हो सकता है। यह फैसला सरकारी नौकरियों, कॉलेज प्रवेश और विधानसभा सीटों पर भी लागू होगा, जिससे इसका प्रभाव व्यापक होगा।

सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में आरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय को ठीक करना और सामाजिक-आर्थिक समानता लाना है। वर्तमान में, कुल 59.5% आरक्षण है:

  • ईडब्ल्यूएस: 10%
  • ओबीसी: 27%
  • एससी: 15%
  • एसटी: 7.5%

बाकी 40.5% अनारक्षित वर्ग के लिए है। सुप्रीम कोर्ट का तर्क है कि एससी-एसटी में कुछ जातियां आरक्षण का अधिक लाभ ले चुकी हैं, जबकि कुछ अभी भी पिछड़ी हैं। सब-क्लासिफिकेशन से इन कमजोर जातियों को अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे समाज में समानता बढ़ेगी।

निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आरक्षण नीति में एक नया अध्याय जोड़ता है। यह राज्यों को अधिक स्वायत्तता देता है, लेकिन साथ ही न्यायिक समीक्षा के दायरे में रखता है। यह फैसला जातिगत राजनीति को नई दिशा देगा, खासकर उन राज्यों में जहां वोट बैंक जाति पर आधारित हैं। हालांकि, यह अनुच्छेद 341 के तहत राष्ट्रपति के अधिकार को कमजोर करने के कारण विवादास्पद भी है। आने वाले समय में, यह न केवल सामाजिक समानता को प्रभावित करेगा, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी बदल देगा।

Subscribe to Our Newsletter
Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
TAGGED:अनुच्छेद 142अनुच्छेद 341इंदिरा साहनी केसएससी-एसटी सब-क्लासिफिकेशनक्रीमी लेयरजातिगत राजनीतिन्यायिक समीक्षापंजाब आरक्षण नीतिवोट बैंकसुप्रीम कोर्ट आरक्षण फैसला
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article Elon Musk's net worth falls: Elon Musk's wealth suffers a loss of $12 billion एलन मस्क की नेटवर्थ में गिरावट :एलन मस्क की संपत्ति को 12 अरब डॉलर का लगा झटका
Next Article NSDL IPO NSDL IPO : मौका या धोखा वैल्यूएशन, बिजनेस मॉडल और ग्रे मार्केट प्रीमियम की पूरी जानकारी देखे
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Headlines

राहुल गांधी को चाईबासा कोर्ट से मिली राहत, अमित शाह मानहानि मामले में मिली जमानत!

न्यूज डेस्क,, रीटाइम्स इंडियाप्रकाशित: बुधवार, 06 अगस्त 2025 कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा में…

3 Min Read

मुंबई मोनोरेल ट्रेन बिजली सप्लाई में दिक्कत के कारण फंसी: यात्रियों को निकालने के लिए शीशे काटने की तैयारी, बचाव कार्य शुरू

मुंबई में मंगलवार, 19 अगस्त 2025 की शाम भारी बारिश के बीच एक मोनोरेल ट्रेन…

35 Min Read

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने राजस्थान में खोजी 3000 साल पुरानी प्राचीन नदी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने राजस्थान के डीग जिले के बहाज गांव में एक ऐतिहासिक…

3 Min Read

AI अपनाने से इनकार पर 80% कर्मचारियों को निकाल फेंका, दो साल बाद CEO बोले- फिर वैसा ही करूंगा

इग्नाइटटेक(IgniteTech) के सीईओ एरिक वॉन ने 2023 में अपनी कंपनी के करीब 80% कर्मचारियों को…

6 Min Read

कुल्लू में बादल फटने से मचा हाहाकार: 6 घरों में घुसा मलबा, बाढ़ ने बहाया सारा सामान, लोग सुरक्षित स्थानों पर भागे

कुल्लू, हिमाचल प्रदेश: कुल्लू जिले के शिली राजगिरी पंचायत में बादल फटने से भारी तबाही…

3 Min Read

ट्रम्प-पुतिन की अलास्का में मुलाकात! यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बड़ा दांव

न्यूज डेस्क, रीटाइम्स इंडियाप्रकाशित: शनिवार, 09 अगस्त 2025 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के…

7 Min Read

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की तारीख का इंतजार खत्म! इन 5 साइट्स से सस्ते में करें ऑनलाइन ITR फाइलिंग, जानें कौन है सबसे सस्ता

हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की तारीख नजदीक आते ही लोग परेशान…

5 Min Read

IREDA के तिमाही नतीजों ने निवेशकों को निराश किया, मुनाफे में 36% की गिरावट

भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के नतीजे…

3 Min Read

स्मार्ट होम में क्रांति! Philips Hue Bridge Pro ला रहा है धमाकेदार अपग्रेड्स

Philips Hue का नया Bridge Pro जल्द ही बाजार में आने वाला है, और लीक…

5 Min Read

बिहार में अवैध घुसपैठ: चुनाव आयोग का बड़ा अभियान, नेपाल-बांग्लादेश-म्यांमार के नागरिकों की पहचान

भारत के गृह मंत्रालय ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई…

3 Min Read

You Might Also Like

शुभांशु शुक्ला के नाम पर यूपी सरकार की बड़ी पहल: अंतरिक्ष सपनों को मिलेगी उड़ान

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के नाम पर एक खास छात्रवृत्ति शुरू करने का ऐलान…

4 Min Read
All Indian languages ​​including Hindi got a new identity under the leadership of Modi
Education News

मोदी के नेतृत्व में हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं को मिली नई पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सभी भाषाओं, खासकर हिंदी, को नई ऊंचाइयों पर ले जाया गया है।…

4 Min Read
Uttar Pradesh government will give ₹1 lakh to anyone who goes on Kailash Mansarovar Yatra
Education News

कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले को उत्तर प्रदेश सरकार देगी ₹1 लाख रुपए

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस योजना के तहत, कैलाश मानसरोवर…

3 Min Read
CBSE Scholarship 2025
Education News

CBSE Scholarship 2025: सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए शानदार स्कॉलरशिप, 23 अक्टूबर तक करें आवेदन

सीबीएसई ने सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए एक शानदार पहल शुरू की है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सिंगल…

2 Min Read
Retimes india

Popular Category

  • India News
  • Stock Market News
  • Technology
  • Education News

Latest Vews

  • Defence News
  • Education News
  • Science
  • sports

Policy Pages

  • About Us
  • DMCA
  • Term and Conditions
  • Privacy Policy

Get in Touch

  • Contact

© All Rights Reserved. Retimes India. Hosted on Elga Cloud Web Hosting Company.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?