भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी कंपनियों BSE और Angel One के शेयरों में गुरुवार को 8% तक की गिरावट देखी गई। यह तब हुआ जब सेबी (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने इक्विटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि बढ़ाने की बात कही। इस कदम का मकसद रिटेल निवेशकों के बढ़ते डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को नियंत्रित करना है। सेबी ने पहले ही कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या सीमित कर दी थी और अब इंट्राडे इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर और सख्ती की योजना है।
गुरुवार को शेयर बाजार से जुड़ी कंपनियों BSE और Angel One के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने इक्विटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि बढ़ाने की जरूरत बताई, जिसके बाद ये गिरावट आई। इस कदम से दुनिया के सबसे व्यस्त डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडिंग की गतिशीलता बदल सकती है।
BSE लिमिटेड के शेयर NSE पर 7.7% की गिरावट के साथ 2,330.10 रुपये पर बंद हुए, जबकि Angel One के शेयर 6.4% नीचे 2,546.10 रुपये पर बंद हुए।
मुंबई में FICCI एनुअल कैपिटल मार्केट कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए पांडे ने कहा, “हमें इक्विटी डेरिवेटिव्स की अवधि बढ़ाने की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि जल्द ही इस पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा।
पांडे ने कहा कि रिटेल निवेशकों की ओर से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से सेबी ने पहले ही कॉन्ट्रैक्ट्स की समाप्ति की संख्या कम की है और लॉट साइज बढ़ाकर ट्रेडिंग को महंगा किया है।
मार्केट में जोखिम पर सेबी की नजर
भारत वैश्विक इक्विटी डेरिवेटिव्स वॉल्यूम का लगभग 60% हिस्सा रखता है, लेकिन रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा है। सेबी की एक स्टडी के मुताबिक, 31 मार्च 2024 को खत्म हुए साल में रिटेल निवेशकों को 52,400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स ने 33,000 करोड़ रुपये और विदेशी निवेशकों ने 28,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
सेबी ने हाल ही में नियमों को और सख्त किया है, जिसमें ऑप्शंस पोर्टफोलियो में दिन के अंत में एक्सपोजर को 1,500 करोड़ रुपये तक सीमित करना शामिल है। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, सेबी अब इंट्राडे इंडेक्स डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर और पाबंदियां लगाने पर विचार कर रहा है, ताकि सिस्टमिक जोखिम को कम किया जा सके।
पांडे ने यह भी कहा कि सेबी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और स्टॉक एक्सचेंजों के साथ मिलकर प्री-IPO कंपनियों की जानकारी के लिए एक रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म बनाएगा।
सेबी का नया नियम कैसे बदलेगा मार्केट
बोनांजा के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट कुणाल कांबले ने बताया, “अभी डेरिवेटिव्स की समाप्ति अवधि 3 महीने है, लेकिन सेबी इसे और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इससे ट्रेडिंग गतिविधि कम हो सकती है, क्योंकि ऑप्शन प्रीमियम की कीमत बढ़ जाएगी।”
उन्होंने कहा कि ऑप्शन राइटर्स, जो समय के क्षरण से फायदा उठाते हैं, को लंबी अवधि के कारण दिक्कत होगी। ऑप्शन खरीदने वालों को भी ज्यादा मार्जिन देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आज एक ATM निफ्टी ऑप्शन के लिए 10,000 रुपये का मार्जिन चाहिए, तो अवधि बढ़ने पर यह तीन गुना तक हो सकता है।
कांबले ने आगे बताया कि ब्रोकर्स को भी नुकसान होगा, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा डेरिवेटिव्स से आता है। पहले ही साप्ताहिक समाप्ति की संख्या 6 से घटाकर 2 करने से उनकी आय प्रभावित हुई है।
लंबी अवधि के डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग के लिए धैर्य और स्थिर रणनीति जरूरी होगी, लेकिन इससे वॉलेटिलिटी कम होगी और बड़े खिलाड़ियों का दबदबा बढ़ सकता है।
अस्वीकरण: विशेषज्ञों के विचार और सुझाव उनके निजी हैं।