भारत में सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने का सिलसिला तेजी से चल रहा है। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से ऐसी हर चीज को मुख्यधारा में लाने की कोशिश हो रही है, जिसकी ताकत को दुनिया भूल चुकी थी। अब ताजा उदाहरण है गुरुकुल का! पहले गुरुकुल में पढ़ने वालों को सिर्फ पंडित या पुरोहित बनने तक सीमित समझा जाता था। लेकिन जब यह बात सामने आई कि गुरुकुल में वैदिक गणित पढ़ने वाला छात्र स्पेस साइंटिस्ट भी बन सकता है, तो सरकार ने तुरंत बड़ा कदम उठाया। अब गुरुकुल के छात्रों को देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों, यानी IITs में रिसर्च करने का मौका मिलेगा। इतना ही नहीं, उन्हें ₹2 लाख तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। आइए, जानते हैं कि यह चमत्कार कैसे हुआ और सरकार की इस खास योजना के बारे में सब कुछ।
सेतुबंध विद्वान योजना: गुरुकुल और मॉडर्न एजुकेशन का संगम
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) विभाग ने मिलकर एक खास योजना शुरू की है, जिसका नाम है सेतुबंध विद्वान योजना। यह योजना गुरुकुल की परंपरागत शिक्षा और आधुनिक औपचारिक शिक्षा के बीच एक सेतु (पुल) का काम करेगी। इसके तहत गुरुकुल से पढ़ाई कर चुके मेधावी छात्रों को औपचारिक डिग्री और रिसर्च के मौके मिलेंगे, वो भी देश के टॉप संस्थानों जैसे IITs में।
इस योजना के तहत चुने गए छात्रों को:
- पोस्टग्रेजुएट स्तर: ₹40,000 प्रति महीने + ₹1 लाख सालाना रिसर्च ग्रांट
- पीएचडी स्तर: ₹65,000 प्रति महीने + ₹2 लाख सालाना रिसर्च ग्रांट
ये डिग्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा दी जाएगी। इस योजना का मकसद उन प्रतिभाशाली छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ना है, जिन्होंने गुरुकुल में पढ़ाई तो की, लेकिन उनके पास औपचारिक डिग्री नहीं है।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी का कहना है, “यह योजना गुरुकुल की परंपरागत शिक्षा और आधुनिक रिसर्च के बीच एक सेतु बनाएगी। इससे न सिर्फ गुरुकुल के छात्रों को सम्मान मिलेगा, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा और रिसर्च में आगे बढ़ने के नए रास्ते भी खुलेंगे।”
इस योजना की पृष्ठभूमि: गोविंद की प्रेरणादायक कहानी
इस योजना को शुरू करने के पीछे सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत है केरल के कन्नौड़ जिले के गोविंद कृष्णम एम। गोविंद के पिता हरीश कुमार भारतीय नौसेना में अधिकारी थे। 2009 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने बेटे को गुरुकुल में पढ़ाने का फैसला किया। चौथी कक्षा के बाद गोविंद का उपनयन संस्कार हुआ और उन्हें त्रिशूल के ब्रह्म स्वाव माधव गुरुकुल में दाखिला मिला।
गुरुकुल में गोविंद का जीवन आसान नहीं था। सुबह 5 बजे से उनकी पढ़ाई शुरू होती थी। यज्ञ, वैदिक मंत्र और मौखिक पढ़ाई के जरिए शिक्षा दी जाती थी। कोई किताब नहीं, कोई नोट्स नहीं—just गुरु की वाणी और स्मृति! गोविंद ने यजुर्वेद का गहन अध्ययन किया और वैदिक गणित में उनकी खास रुचि जगी। वे गणित के कठिन सवालों को आसानी से हल करने लगे।
आठवीं कक्षा तक गुरुकुल में पढ़ने के बाद गोविंद ने नियमित स्कूल जॉइन किया। उन्होंने नद कवू के बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल से 10वीं में A+ ग्रेड हासिल किया। फिर अलवा कॉलेज, मूरभद्री से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की और JEE मेन्स व एडवांस की तैयारी शुरू की। साल 2021 में गोविंद ने दोनों एग्जाम पास किए और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (IIST) में दाखिला लिया। आज वे IISC से पास आउट हो चुके हैं और ISRO के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में साइंटिस्ट के तौर पर चयनित हुए हैं।
गोविंद कहते हैं, “गुरुकुल ने मुझे अनुशासन और मानसिक दृढ़ता दी, जबकि आधुनिक विज्ञान ने मुझे दिशा। दोनों का मेल ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।” उनकी यह कहानी उस सोच को चुनौती देती है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान साथ नहीं चल सकते।
सरकार का मिशन: परंपरा और विज्ञान का मेल
गोविंद जैसे छात्रों की सफलता से प्रेरणा लेकर सरकार ने सेतुबंध विद्वान योजना शुरू की। सरकार का मानना है कि सनातन का परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान न सिर्फ साथ चल सकते हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक भी हैं। यह योजना भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जनन देने और गुरुकुल के छात्रों को मुख्यधारा में लाने का एक सार्थक प्रयास है।
योजना के लिए योग्यता
- आयु: अधिकतम 32 साल
- शिक्षा: कम से कम 5 साल तक किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल में पढ़ाई
- प्रमाण: शास्त्रों या परंपरागत ज्ञान में उत्कृष्टता का प्रदर्शन
- आवेदन की अंतिम तारीख: 15 अगस्त 2025
रिसर्च के क्षेत्र
इस योजना के तहत 18 अलग-अलग क्षेत्रों में रिसर्च के मौके मिलेंगे, जैसे:
- अन्वीक्षिकी विद्या (वैदिक दर्शन और संज्ञानात्मक विज्ञान)
- गणित-भौत-ज्योतिष विद्या (गणित, भौतिकी, खगोल विज्ञान)
- भैषज्य विद्या (आयुर्वेद और स्वास्थ्य विज्ञान)
- शिल्प और वास्तु विद्या (वास्तुकला और इंजीनियरिंग)
- संस्कृत व्याकरण, कला, संगीत, नाट्य, और राजनीति शास्त्र
