कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को बताया कि अगर रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता हो जाता है, तो इसका भारत को सीधा फायदा होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ हट जाएंगे। आखिर यह शांति समझौता भारत के लिए क्यों अहम है और इसका क्या असर होगा? आइए जानते हैं।
टैरिफ हटने की उम्मीद
थरूर ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “अगर पुतिन के साथ मुलाकात के बाद यूक्रेन के साथ भी बातचीत होती है, तो रूसी तेल खरीदने की वजह से अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को हटाया जा सकता है, क्योंकि यह टैरिफ युद्ध के संदर्भ में लगाया गया था।”
अमेरिका का टैरिफ और भारत का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूसी तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे। उनका दावा था कि भारत की तेल खरीद रूस की यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता को बढ़ावा दे रही है। भारत ने इसका बचाव करते हुए कहा कि रूसी तेल खरीदना वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के कारण जरूरी है।
मोदी-पुतिन की बातचीत
पिछले हफ्ते, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “मेरे दोस्त राष्ट्रपति पुतिन के साथ बहुत अच्छी और विस्तृत बातचीत हुई। मैंने यूक्रेन के ताजा घटनाक्रम पर जानकारी साझा करने के लिए उनका धन्यवाद दिया। हमने अपनी द्विपक्षीय साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की और इसे और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। मैं इस साल के अंत में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा का इंतजार कर रहा हूं।”
रूस का भारत के साथ समर्थन
रूस ने भी ट्रंप के 50% टैरिफ के दबाव के बीच भारत के साथ एकजुटता दिखाई है। भारत ने रूसी तेल खरीद को जायज ठहराते हुए कहा कि यह वैश्विक बाजार की जरूरतों के हिसाब से किया जा रहा है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है
रूस-यूक्रेन शांति समझौता भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टि से अहम हो सकता है। टैरिफ हटने से भारत की तेल खरीद की लागत कम होगी, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। साथ ही, भारत की तटस्थ कूटनीति इसे वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाएगी।
