चीन के विदेश मंत्री वांग यी तीन साल बाद भारत पहुंचे हैं और सोमवार शाम दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर से उनकी मुलाकात हुई। यह दौरा दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई रफ्तार देने का बड़ा मौका लग रहा है, खासकर जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ बढ़ा दिए हैं। वांग यी का यह दौरा दो दिनों का है, जिसमें वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भारत-चीन सीमा मुद्दे पर स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की 24वीं दौर की बातचीत भी करेंगे। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने आपसी मतभेदों को विवाद न बनने देने पर जोर दिया और सहयोग बढ़ाने की बात की।
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच मतभेदों को विवाद में बदलने नहीं देना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि आतंकवाद से लड़ाई हमारी बड़ी प्राथमिकता है और हमें हर रूप में इससे निपटना होगा। जयशंकर ने उम्मीद जताई कि यह बातचीत एक स्थिर, सहयोगी और भविष्योन्मुखी रिश्ते की नींव रखेगी, जो दोनों देशों के हित में हो। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भी चर्चा की और कहा कि हमें एक निष्पक्ष, संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें बहुध्रुवीय एशिया भी शामिल हो। साथ ही, बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर जोर दिया। वांग यी ने जवाब में कहा कि चीन ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखी है और भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए माउंट गंग रेनपोचे और लेक मापम युन त्सो की यात्रा फिर शुरू की है। उन्होंने भरोसा जताया कि हम हस्तक्षेपों को दूर करके सहयोग बढ़ाएंगे और रिश्तों को मजबूत बनाएंगे, जो एशिया और दुनिया के लिए स्थिरता लाएगा।
यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स समिट में कजान में हुई सहमति के बाद हो रहा है, जहां दोनों नेताओं ने बातचीत के तंत्रों को फिर शुरू करने पर जोर दिया था। वांग यी का दौरा मोदी के 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) समिट के लिए जाने से ठीक पहले हो रहा है। सीमा मुद्दे पर डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और शांति बनाए रखना दोनों देशों के लिए अहम है। मार्च में वांग यी ने कहा था कि ‘हाथी’ (भारत) और ‘ड्रैगन’ (चीन) का साथ नाचना ही सही विकल्प है और हमें एक-दूसरे का साथ देना चाहिए, न कि कमजोर करना। जुलाई में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने भी ‘ड्रैगन-एलीफेंट टैंगो’ की बात की, जबकि ग्लोबल टाइम्स ने पिछले हफ्ते ‘ड्रैगन और एलीफेंट के बीच बैले डांस’ का जिक्र किया, ताकि ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ साथ मिलकर लड़ सकें।
मार्च में एक इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि हमारा फोकस मतभेदों को विवाद न बनने देने पर है और बातचीत से ही स्थिर रिश्ते बनाए जा सकते हैं। चीन ने इस पर सहमति जताई और कहा कि सहयोग ही सही रास्ता है। जुलाई में जयशंकर की बीजिंग यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे हैं और यह दौरा उस दिशा को बनाए रखेगा। कोविड की शुरुआत और लद्दाख में हिंसा के बाद रुके हुए लोगों के बीच संपर्क, जैसे वीजा और डायरेक्ट फ्लाइट्स, को फिर शुरू करने की उम्मीद है। हालांकि, पाकिस्तान का मुद्दा अभी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि चीन पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है, जैसे मई में यूएन में पाकिस्तानी आतंकियों को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव को ब्लॉक करना। जून के एससीओ समिट में भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक जॉइंट स्टेटमेंट पर साइन करने से इनकार कर दिया था, जिसमें पहलगाम हमले का जिक्र नहीं था और बलूचिस्तान में अशांति के लिए भारत को दोषी ठहराया गया था।
यह दौरा न सिर्फ सीमा विवाद सुलझाने में मदद करेगा, बल्कि एससीओ और ब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सहयोग बढ़ाकर दोनों अर्थव्यवस्थाओं को ट्रंप के टैरिफ से बचाने में भी काम आएगा। हालांकि, सीमा मुद्दा और चीन का पाकिस्तान समर्थन सुलझने में वक्त लग सकता है, लेकिन यह कदम रिश्तों को सकारात्मक दिशा दे रहा है।
