न्यूज डेस्क, रीटाइम्स इंडिया
प्रकाशित: गुरुवार, 07 अगस्त 2025
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के चयन का जिम्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपा है। यह निर्णय बुधवार (6 अगस्त 2025) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एनडीए की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को बताया कि पीएम मोदी और नड्डा द्वारा चुना गया उम्मीदवार गठबंधन के सभी दलों को स्वीकार्य होगा।
उपराष्ट्रपति चुनाव की पृष्ठभूमि
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 जुलाई को स्वीकार कर लिया। धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उनके अचानक इस्तीफे ने मध्यावधि उपराष्ट्रपति चुनाव की आवश्यकता पैदा कर दी। यह 1987 के बाद पहला मौका है जब उपराष्ट्रपति पद के लिए मध्यावधि चुनाव हो रहा है।
चुनाव आयोग ने 1 अगस्त 2025 को 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी की। नामांकन की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो चुकी है, और 21 अगस्त तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। मतदान और मतगणना 9 सितंबर को होगी।
एनडीए की रणनीति और उम्मीदवार चयन
एनडीए की बैठक में जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन सिंह ने प्रस्ताव रखा, जिसका तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राम मोहन नायडू ने समर्थन किया। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान, टीडीपी के लवु श्रीकृष्ण देवरायलु, और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के रामदास अठावले जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहले ही बीजेपी के उम्मीदवार को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा कर दी थी।
सूत्रों के अनुसार, एनडीए का उम्मीदवार बीजेपी से होगा और वह पीएम मोदी के विश्वासपात्रों में से होगा। उम्मीदवार का ऐलान 12 अगस्त 2025 को हो सकता है। बीजेपी और उसके सहयोगी दल एक ऐसे चेहरे की तलाश में हैं, जो न केवल गठबंधन के भीतर एकता बनाए रखे, बल्कि गैर-एनडीए दलों का समर्थन भी हासिल कर सके।
संभावित उम्मीदवार
कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें शामिल हैं:
- राम नाथ ठाकुर: वर्तमान केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे। वह नाई (अति पिछड़ा वर्ग) समुदाय से हैं, और उनकी उम्मीदवारी बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
- जेपी नड्डा: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष। यदि उनकी उम्मीदवारी चुनी जाती है, तो कैबिनेट में फेरबदल की संभावना है।
- हरिवंश सिंह: जेडी(यू) सांसद और राज्यसभा के उपसभापति। वह सरकार के भरोसेमंद सहयोगी हैं और बिहार में उनकी स्वीकार्यता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
- गुलाम नबी आजाद: डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के नेता और पूर्व कांग्रेस नेता। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी उनकी उम्मीदवारी पर विचार कर रही है, जो विपक्ष के लिए झटका हो सकता है।
- वीके सक्सेना: दिल्ली के उपराज्यपाल का नाम भी चर्चा में है, हालांकि उनकी उम्मीदवारी की संभावना कम मानी जा रही है।
- नीतीश कुमार: बिहार के मुख्यमंत्री का नाम भी शुरुआत में चर्चा में था, लेकिन जेडी(यू) के वरिष्ठ नेताओं ने इसे खारिज कर दिया है।
एनडीए की मजबूत स्थिति
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सदस्यों से मिलकर बने इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा किया जाता है। वर्तमान में 782 सांसदों के इलेक्टोरल कॉलेज में एनडीए के पास लगभग 422 सांसदों का समर्थन है, जो 394 के बहुमत के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। इससे एनडीए उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि, बीजेपी के सांसदों की संख्या 2022 की तुलना में कम हुई है, और वाईएसआर कांग्रेस, बीआरएस, और बीजेडी जैसे पूर्व सहयोगी दलों का समर्थन अब पहले जैसा नहीं है। इसके बावजूद, एनडीए अपनी प्रमुख सहयोगी पार्टियों—जेडी(यू) और टीडीपी—के समर्थन के साथ मजबूत स्थिति में है।
विपक्ष की रणनीति
इंडिया गठबंधन भी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एक मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। विपक्ष का मानना है कि धनखड़ ने सरकार के दबाव में इस्तीफा दिया, और वे इस चुनाव को बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। हालांकि, विपक्ष के पास संख्याबल कम है, लेकिन एक संयुक्त उम्मीदवार उतारकर वे सियासी ताकत दिखाने की कोशिश कर सकते हैं। अभी तक विपक्ष ने अपने उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।
उपराष्ट्रपति की भूमिका
उपराष्ट्रपति भारत के राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पद के लिए उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए, कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए, और वह राज्यसभा के लिए योग्य होना चाहिए। साथ ही, वह कोई लाभ का पद नहीं धारण कर सकता। उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों द्वारा प्रस्तावक और 20 सांसदों द्वारा समर्थक के रूप में नामांकन करना होता है, और 15,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होती है।
क्या कहती है सियासी गणित?
2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ ने 528 वोटों के साथ विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा (182 वोट) को हराया था। उस समय एनडीए को तृणमूल कांग्रेस के दो सदस्यों और कुछ विपक्षी सांसदों के क्रॉस-वोटिंग से फायदा हुआ था। इस बार भी एनडीए अपनी संख्याबल की मजबूती के साथ मैदान में है, लेकिन गैर-एनडीए दलों का समर्थन जुटाने की चुनौती बनी रहेगी।
सूत्रों का कहना है कि बीजेपी एक ऐसे उम्मीदवार को चुनना चाहती है जो संगठन की विचारधारा और पीएम मोदी के नेतृत्व के प्रति निष्ठावान हो। साथ ही, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, और असम जैसे राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी जोर दिया जा रहा है।
