पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आखिरकार चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने साफ किया कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद छोड़ा है और विपक्ष के नजरबंद होने के दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। लेकिन कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि इस बयान ने रहस्य को और गहरा कर दिया है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
अमित शाह ने क्या कहा
सोमवार को एक साक्षात्कार में गृह मंत्री अमित शाह ने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर स्पष्टता लाते हुए कहा, “धनखड़ साहब का इस्तीफा अपने आप में साफ है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शानदार काम किया और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सरकार के सदस्यों का दिल से आभार जताया है।”
विपक्ष के उन दावों पर कि धनखड़ को नजरबंद किया गया है, शाह ने तल्ख अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि आप सच और झूठ का फैसला विपक्ष की बातों के आधार पर करते हैं। इस मुद्दे पर बेवजह हंगामा नहीं करना चाहिए। धनखड़ ने संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया। उन्होंने निजी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। इसे ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है।”
विपक्ष का हंगामा और सवाल
धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद विपक्षी नेताओं ने कई सवाल उठाए। उनका दावा था कि सरकार ने धनखड़ को ‘चुप’ करा दिया है। इस पर अमित शाह का बयान विपक्ष के आरोपों को खारिज करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन विपक्ष ने इसे और बड़ा मुद्दा बना दिया।
कांग्रेस का जवाब: रहस्य और गहराया
अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धनखड़ के इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा हो सकता है। जयराम रमेश ने धनखड़ की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा नियमों, मर्यादाओं और प्रोटोकॉल का पालन करते रहे। साथ ही, वह किसानों के हितों और न्यायिक जवाबदेही के लिए बेबाकी से बोलते थे।
एक्स पर अपनी पोस्ट में रमेश ने लिखा, “गृह मंत्री ने कुछ और कहने की कोशिश की है, लेकिन उन्होंने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। यह साफ नहीं है कि किसानों के हितों की पैरवी करने वाले धनखड़ पिछले एक महीने से पूरी तरह गायब क्यों हैं।”
क्या है पूरा मामला
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र सौंपा। इसके बाद विपक्ष ने दावा किया कि धनखड़ को सरकार ने चुप कराया है और वह नजरबंद हैं। इन दावों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। अब अमित शाह के बयान ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को चुनाव होने वाला है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने महाराष्ट्र के गवर्नर सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्ष ने पूर्व जज बी. सुधर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। इस बीच, धनखड़ के इस्तीफे का मुद्दा अभी भी चर्चा में बना हुआ है।