उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बिछिया स्थित 26वीं वाहिनी पीएसी ट्रेनिंग सेंटर में 21 जुलाई, 2025 से शुरू हुई सिपाही भर्ती 2023 की ट्रेनिंग के दौरान 23 जुलाई को करीब 600 महिला रिक्रूट्स ने जमकर हंगामा किया। महिला सिपाहियों ने ट्रेनिंग सेंटर की अव्यवस्थाओं, सुरक्षा चिंताओं और अधिकारियों के दुर्व्यवहार के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना तब और गंभीर हो गई जब प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला रिक्रूट्स बेहोश हो गईं और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
महिला सिपाहियों के प्रमुख आरोप
महिला रिक्रूट्स ने ट्रेनिंग सेंटर की बदहाल व्यवस्थाओं और असुरक्षा को लेकर पांच प्रमुख आरोप लगाए:
- दुर्व्यवहार: अधिकारियों, खासकर आरटीसी प्रभारी संजय राय पर अभद्र भाषा और गालियों का इस्तेमाल करने का आरोप। एक ट्रेनी ने बताया कि पानी मांगने पर प्रभारी ने कहा, “मुंह में पाइप डाल देंगे।”
- पानी और बिजली की कमी: सेंटर में पीने के पानी के लिए केवल एक आरओ मशीन, जो 600 लड़कियों के लिए अपर्याप्त है। रातभर बिजली कटौती और जनरेटर की कमी। 30 लड़कियों के कमरे में केवल एक पंखा, और अतिरिक्त पंखे लगाने पर “बिल आएगा” कहकर मना किया गया।
- खुले में नहाने की मजबूरी: सेंटर की क्षमता 360 लड़कियों की है, लेकिन 600 रिक्रूट्स को ठहराया गया, जिससे बाथरूम की कमी के कारण कई को खुले में नहाना पड़ा।
- बाथरूम में सीसीटीवी के आरोप: महिला सिपाहियों ने बाथरूम की गैलरी में कैमरे लगे होने का गंभीर आरोप लगाया, जिससे उनकी निजता का उल्लंघन हुआ। हालांकि, आईजी पीएसी मध्य जोन प्रीतिंदर सिंह ने जांच में इन आरोपों को गलत बताया।
- खराब खाना और गंदगी: टॉयलेट में गंदगी और खाने की खराब गुणवत्ता की शिकायत। ट्रेनीज को खुद टॉयलेट साफ करने को कहा गया। इसके अलावा, ₹6000 जमा करने के बावजूद नाश्ता नहीं दिया गया, और भोजन सुबह 8 बजे और रात 8 बजे ही मिलता था।
प्रेग्नेंसी टेस्ट विवाद
हंगामे का एक बड़ा कारण डीआईजी रोहन पी. कनय का वह आदेश था, जिसमें सभी महिला रिक्रूट्स की प्रेग्नेंसी जांच का निर्देश दिया गया था। इस आदेश से अविवाहित रिक्रूट्स खास तौर पर नाराज थीं, क्योंकि नियम के अनुसार केवल शादीशुदा सिपाहियों की प्रेग्नेंसी जांच होती है, जबकि अविवाहित सिपाहियों को शपथ पत्र देना होता है। इस आदेश को आईजी ट्रेनिंग चंद्र प्रकाश ने तुरंत निरस्त कर दिया, और अविवाहित सिपाहियों से केवल शपथ पत्र लेने का निर्देश दिया।
सीएम योगी और सरकार का एक्शन
घटना की गंभीरता को देखते हुए, खासकर क्योंकि यह सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में हुई और उसी दिन वह शहर में मौजूद थे, सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। योगी सरकार ने महिला सिपाहियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया और निम्नलिखित कदम उठाए:
- निलंबन और तबादले:
- 26वीं वाहिनी पीएसी कमांडेंट आनंद कुमार और आरटीसी प्रभारी संजय राय को लापरवाही और अभद्र भाषा के लिए निलंबित किया गया।
- डीआईजी व प्रिंसिपल पीटीएस गोरखपुर रोहन पी. कनय को हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया और डीजीपी कार्यालय से जोड़ा गया।
- फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पीटीआई) को अभद्र भाषा के लिए निलंबित किया गया।
- नई नियुक्तियां:
- अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार प्रथम को प्रभारी प्रधानाचार्य पीटीएस गोरखपुर बनाया गया।
- एडिशनल एसपी केंद्रीय रिजर्व स्टोर कानपुर नगर निहारिका वर्मा को 26वीं पीएसी का कमांडेंट नियुक्त किया गया।
- जांच का आदेश: पीटीएस मध्य जोन के आईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह को मामले की जांच सौंपी गई।
- सुविधाओं में सुधार: बिजली, पानी, और टॉयलेट की समस्याओं को तुरंत ठीक करने का आश्वासन दिया गया। बाथरूम में कैमरे के आरोपों की जांच में इन्हें गलत पाया गया, लेकिन कैमरे हटाने का भरोसा दिया गया।
सियासी तूल और विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “गोरखपुर में ट्रेनिंग सेंटर की बदइंतजामी दुर्भाग्यपूर्ण है। न बिजली, न पानी, न गरिमापूर्ण स्नानालय। नारी वंदना भाजपा का जुमला है।” वहीं, भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्रशेखर ने इसे मुख्यमंत्री की नैतिक और राजनीतिक जवाबदेही का सवाल बताया, और कहा कि अगर महिला सिपाही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का दावा खोखला है।
ट्रेनिंग सेंटर की स्थिति
26वीं वाहिनी पीएसी के नवनिर्मित 11 मंजिला बैरक टॉवर में 600 महिला रिक्रूट्स की ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई थी, जिसमें लिफ्ट, टॉयलेट, डायनिंग हॉल, और रिक्रिएशन हॉल जैसी सुविधाएं होने का दावा किया गया। हालांकि, महिला सिपाहियों ने इन सुविधाओं की कमी और भीड़भाड़ की शिकायत की। सेंटर की क्षमता 360 रिक्रूट्स की थी, लेकिन 600 से अधिक को ठहराया गया, जिससे मूलभूत सुविधाओं पर दबाव बढ़ा।
निष्कर्ष
गोरखपुर पीएसी ट्रेनिंग सेंटर में महिला सिपाहियों का हंगामा योगी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया, खासकर क्योंकि यह उनके गृह जिले में हुआ। सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को निलंबित और तबादला किया, साथ ही सुविधाओं में सुधार का भरोसा दिया। यह घटना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर्स में मूलभूत सुविधाओं और महिला सिपाहियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत को उजागर करती है। विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी और महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाने का मौका बनाया। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ट्रेनिंग सेंटर्स में बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता जरूरी है।