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आईसीएमआर की चेतावनी :ज्यादा नमक का सेवन से भारत में बढ़ता स्वास्थ्य संकट

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Last updated: July 15, 2025 5:07 pm
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत में औसत से अधिक नमक के सेवन को एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बताया गया है। यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर चेतावनी दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहले भी सुझाव दिया था कि प्रतिदिन 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। फिर भी, भारत में लोग औसतन इससे कहीं अधिक नमक खा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, और किडनी संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।

नमक का अधिक सेवन: स्वास्थ्य पर प्रभाव

आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक नमक का सेवन हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), हृदय रोग, और किडनी विकारों का प्रमुख कारण है। 2019 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 28% हृदयाघात के मामलों का संबंध अधिक सोडियम के सेवन से था। ज्यादा नमक केवल खाने में डाले जाने वाले नमक से ही नहीं, बल्कि पैकेज्ड फूड्स जैसे चिप्स, नमकीन, बिस्किट, सॉस, और इंस्टेंट नूडल्स से भी आता है। इनमें सोडियम की मात्रा अधिक होने के कारण ये स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। आईसीएमआर ने इसे ‘मूक महामारी’ (साइलेंट एपिडेमिक) का नाम दिया है, क्योंकि लोग अनजाने में ज्यादा नमक खा रहे हैं और इसके दुष्परिणामों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

भारत में नमक की खपत: आंकड़े

डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार, एक व्यक्ति को प्रतिदिन अधिकतम 5 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए। हालांकि, आईसीएमआर की रिपोर्ट बताती है कि भारत में शहरी क्षेत्रों में औसतन 9.2 ग्राम और ग्रामीण क्षेत्रों में 5.6 ग्राम नमक प्रतिदिन खाया जा रहा है। यह अधिकता स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा दे रही है, जिसका बोझ अंततः सरकार और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।

आईसीएमआर और एनआई की पहल

आईसीएमआर और इसके सहयोगी राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआई) ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पंजाब और तेलंगाना में तीन साल के एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कम सोडियम नमक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर संरचित परामर्श मॉडल लागू किया गया। अध्ययन में पाया गया कि कम सोडियम नमक का उपयोग करने से उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों का सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दबाव 7/4 mmHg तक कम हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार है। इसके अलावा, ‘पिंच फॉर अ चेंज’ अभियान शुरू किया गया, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए पैकेज्ड फूड्स में छिपे सोडियम स्रोतों के बारे में जागरूकता फैलाई गई।

चुनौतियां: कम सोडियम नमक की उपलब्धता और जागरूकता

कम सोडियम नमक को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद, इसकी उपलब्धता और स्वीकार्यता में कई बाधाएं हैं। सामान्य नमक की कीमत 2.5-3 रुपये प्रति 100 ग्राम है, जबकि कम सोडियम नमक 5-6 रुपये प्रति 100 ग्राम में मिलता है, जो इसे महंगा बनाता है। छोटी दुकानों और किराना स्टोर्स में इसकी उपलब्धता केवल 4% है, जबकि सुपरमार्केट्स में 52% और अन्य बड़े स्टोर्स में 28% है। इसके अलावा, जन जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है। पहले सरकार ने आयोडीन युक्त नमक के लिए जागरूकता अभियान चलाया था, लेकिन अब कम सोडियम नमक को अपनाने के लिए लोगों को फिर से शिक्षित करना चुनौतीपूर्ण है।

नीतिगत सुझाव

आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ ने कुछ नीतिगत सुझाव दिए हैं, जैसे:

  • पैकेज्ड फूड पर लेबलिंग: खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को पैकेज्ड फूड पर सोडियम की मात्रा और स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी अनिवार्य रूप से अंकित करने की सलाह दी गई है।
  • सरकारी कैंटीन में कम सोडियम नमक: सरकारी कार्यालयों और कैंटीन में कम सोडियम नमक का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
  • नमक कंपनियों के साथ साझेदारी: टाटा जैसे नमक निर्माताओं को कम सोडियम नमक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना।
  • जागरूकता अभियान: स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाने के लिए रेसिपी गाइड और कार्यस्थल पर जागरूकता कार्यक्रम शुरू करना।

आईसीएमआर और एनआई की भूमिका

आईसीएमआर, जो 1911 में स्थापित हुआ, भारत का प्रमुख चिकित्सा अनुसंधान संगठन है और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है, और यह रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य रणनीति, वैज्ञानिक अध्ययन, और टीका विकास जैसे क्षेत्रों में काम करता है। कोविड-19 के दौरान इसने आरटी-पीसीआर टेस्ट मानक तैयार किए और मलेरिया उन्मूलन जैसे अभियानों में योगदान दिया। राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआई) आईसीएमआर की एक इकाई है, जो जन स्वास्थ्य, पोषण, और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) पर शोध करता है। दोनों संस्थानों ने नमक की खपत को कम करने के लिए कई हस्तक्षेप कार्यक्रम शुरू किए हैं।

भारत में अधिक नमक का सेवन एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिसे आईसीएमआर ने ‘मूक महामारी’ करार दिया है। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, और किडनी विकारों के बढ़ते मामलों ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। कम सोडियम नमक और जागरूकता अभियानों के जरिए इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्धता, लागत, और जन जागरूकता की कमी चुनौतियां बनी हुई हैं। हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर नमक के सेवन को नियंत्रित करने की जरूरत है। आप अपने आहार में नमक की मात्रा को कैसे नियंत्रित करते हैं? अपनी राय साझा करें।

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