पाकिस्तानी सेना ने हाल ही में अपनी परमाणु क्षमता वाली शाहीन-3 मिसाइल का परीक्षण किया, जो पूरी तरह विफल रहा। यह मिसाइल पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान से दागी गई थी, लेकिन यह अपने तय मार्ग से भटक गई और बलूचिस्तान के डेरा बुगती जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मिसाइल का मलबा एक रिहायशी इलाके से मात्र 500 मीटर की दूरी पर गिरा, जिससे भारी तबाही की आशंका पैदा हो गई। इस हादसे ने न केवल पाकिस्तान की तकनीकी कमजोरी को उजागर किया, बल्कि बलूचिस्तान के लोगों की जान को भी खतरे में डाल दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, मिसाइल के गिरने से जोरदार धमाका हुआ, जिसकी आवाज 20-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।
बलूचिस्तान में गुस्सा और पलटवार की तैयारी
इस घटना के बाद बलूचिस्तान में गुस्सा भड़क उठा है। बलूच नेताओं और संगठनों ने इस असफल परीक्षण की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान बार-बार बलूचिस्तान की जमीन को अपने सैन्य प्रयोगों के लिए इस्तेमाल करता है, जिससे स्थानीय लोगों की जान जोखिम में पड़ती है। बलूच नेता मीर यार बलोच ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है; पाकिस्तानी सेना लंबे समय से मिसाइल परीक्षणों के बहाने बलूच नागरिकों को उनके घरों से बेदखल करने की कोशिश कर रही है। खबरों के मुताबिक, बलूच संगठन अब इस हादसे का बदला लेने के लिए पाकिस्तानी सेना पर बड़े हमले की योजना बना रहे हैं।

पाकिस्तानी सेना का डर और रात में यात्रा पर प्रतिबंध
इस मिसाइल हादसे के बाद पाकिस्तानी सेना को बलूचिस्तान के पलटवार का डर सता रहा है। डर के मारे डेरा गाजी खान के जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया और रात में बलूचिस्तान में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। शाम 5 बजे के बाद न तो कोई निजी वाहन और न ही सार्वजनिक वाहन बलूचिस्तान में प्रवेश कर सकते हैं। यहां तक कि पाकिस्तानी सैनिकों को भी बलूचिस्तान में प्रवेश करने से मना किया गया है। इस कदम से साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान के गुस्से से डरी हुई है।
बलूचिस्तान का इतिहास और परमाणु परीक्षणों का दंश
पाकिस्तान लंबे समय से अपने मिसाइल और परमाणु परीक्षणों के लिए बलूचिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करता आया है। 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के चगाई जिले में छह परमाणु परीक्षण किए थे, जिनका दुष्प्रभाव आज भी वहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इन परीक्षणों के कारण क्षेत्र में रेडिएशन का स्तर बढ़ गया, जिससे स्थानीय बलूच लोग कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, 2021 और 2023 में भी शाहीन-3 और अन्य मिसाइलों के असफल परीक्षणों ने बलूचिस्तान में तबाही मचाई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए और घर तबाह हो गए।
बलूच नेताओं की मांग और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की अपील
बलूच नेताओं ने इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पाकिस्तान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर कड़े प्रतिबंध लगाने, बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच करने और विस्थापित बलूच नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। बलूच नेता मीर यार बलोच ने कहा कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को एक सैन्य प्रयोगशाला में बदल दिया है, और यह अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान की तकनीकी कमजोरी और बलूचिस्तान का गुस्सा
यह हादसा न केवल पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाता है, बल्कि बलूचिस्तान के लोगों के प्रति उसकी लापरवाही को भी उजागर करता है। शाहीन-3 मिसाइल, जिसे पाकिस्तान अपनी सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में से एक मानता है, बार-बार असफल हो रही है। इस घटना ने बलूचिस्तान में विद्रोह की आग को और भड़का दिया है, और आने वाले दिनों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
