भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा की नामित सदस्य पीटी उषा ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 का जोरदार समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये बिल भारतीय खेल प्रशासन में क्रांति लाएगा और पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा देगा। इस बिल में नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड और नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल जैसे बड़े प्रावधान शामिल हैं, जो खेलों को नई दिशा देंगे।
नई दिल्ली: मंगलवार को राज्यसभा में बोलते हुए भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल को देश के खेल प्रशासन में दशकों पुराने ठहराव को खत्म करने वाला कदम बताया। यह बिल सोमवार को लोकसभा में पास हो चुका है। उषा ने कहा कि ये बिल पारदर्शिता, जवाबदेही और लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा।
इस बिल में नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) की स्थापना का प्रावधान है, जो खेल फेडरेशनों को मान्यता देने का अधिकार रखेगा। केंद्रीय फंड पाने के लिए NSB से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बिल में नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल का गठन होगा, जो खेल से जुड़े विवादों को सुलझाएगा, और नेशनल स्पोर्ट्स इलेक्शन पैनल बनाया जाएगा, जो फेडरेशनों के चुनावों की निगरानी करेगा।
उषा ने राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए कहा, “आज मेरे लिए और देश के लिए बहुत खास दिन है। मैं लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रही थी।” पिछले साल उषा ने इस बिल का विरोध किया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि ये सरकार का हस्तक्षेप है और इससे इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) भारत पर बैन लगा सकती है। लेकिन खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ कई दौर की चर्चा के बाद उन्होंने अपना नजरिया बदल लिया।
उन्होंने 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक का जिक्र किया, जब वह 20 साल की थीं और मेडल से चूक गई थीं। “उस दिन मेरा दिल टूट गया था। तब कोई ऐसा व्यापक खेल कानून नहीं था जो हमारे सपनों को सहारा दे सके। चार दशक बीत गए, लेकिन उस ठहराव को तोड़ने के लिए कुछ नहीं हुआ। आज ये बिल उस उम्मीद को हकीकत में बदल रहा है।”
उषा ने कहा, “ये बिल पारदर्शिता, जवाबदेही और लैंगिक समानता लाएगा। ये एथलीट्स को सशक्त करेगा और स्पॉन्सर्स व फेडरेशनों में भरोसा बढ़ाएगा। ये बिल निष्पक्षता और न्याय के बारे में है।” उन्होंने ये भी बताया कि ये बिल भारत की 2036 ओलंपिक की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा। “भारत अब ग्लोबल खेल बिरादरी में अपनी सही जगह चाहता है। ये बिल सिर्फ कानून नहीं, बल्कि एक बड़ा कदम है। ये एथलीट्स के लिए एक वादा है कि अब सिस्टम उन्हें निराश नहीं करेगा।”
उषा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैंने मिट्टी के ट्रैक पर नंगे पांव दौड़ लगाई है। मैं कह सकती हूं कि ये बिल कई जिंदगियां बदल देगा।” उन्होंने नेशनल एंटी-डोपिंग (संशोधन) बिल का भी समर्थन किया, जो नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) की स्वतंत्रता को और मजबूत करता है। इसके साथ ही एक नेशनल एंटी-डोपिंग बोर्ड बनाया जाएगा, जो प्रक्रियात्मक मुद्दों पर सलाह देगा। उषा ने कहा, “ऐसे प्रभावी कानूनों से हम स्वच्छ खेलों की नई संस्कृति ला सकते हैं। ये बिल एथलीट्स के रास्ते को और स्पष्ट करेगा।”
हालांकि, केरल के सांसद प्रेमचंद्रन ने लोकसभा में इस बिल के पास होने पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे खेल फेडरेशनों की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप माना है। फिर भी, उषा और कई अन्य हितधारकों का मानना है कि ये बिल भारतीय खेलों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
