भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम लगाने का बड़ा फैसला किया है। अब उप-ठेकों (सब-कॉन्ट्रैक्ट) पर सख्ती होगी, ताकि गुणवत्ता, समय पर काम पूरा करना और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। इसके लिए NHAI ने निविदा प्रक्रिया (RFP) के नियमों को और कड़ा कर दिया है, जिससे केवल योग्य और अनुभवी ठेकेदार ही इन परियोजनाओं में हिस्सा ले सकें। साथ ही, “समान कार्य” मानदंड को और स्पष्ट किया गया है और अनधिकृत उप-ठेकों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में नियमों की ढील का फायदा उठाकर मनमाने ढंग से काम करने वाले ठेकेदारों पर अब सख्ती होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने फैसला किया है कि अब उप-ठेकों के चलन पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। साथ ही, परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय सीमा और वित्तीय पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए कई नियमों में बदलाव किए गए हैं।
NHAI ने बुधवार को बताया कि राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए निविदा प्रक्रिया (RFP) के नियमों को और सख्त किया गया है। इन नए नियमों से यह सुनिश्चित होगा कि केवल तकनीकी रूप से सक्षम और अनुभवी ठेकेदार ही इन परियोजनाओं के लिए बोली लगा सकें। इसमें सबसे अहम बदलाव है “समान कार्य” मानदंड को और स्पष्ट करना।
NHAI परियोजनाओं में नहीं चलेगी सब-कॉन्ट्रैक्ट की मनमानी
अब तक कई ठेकेदार बड़े राजमार्ग प्रोजेक्ट्स की पात्रता हासिल करने के लिए गलत तरीकों का सहारा लेते थे। नियमों की ढील के चलते, छोटे स्तर के कार्यों का अनुभव होने पर भी वे “समान कार्य” की पात्रता दिखा देते थे, भले ही उनकी परियोजनाएं जटिलता में कम हों।
अब NHAI ने साफ कर दिया है कि “समान कार्य” का मतलब केवल उन राजमार्ग परियोजनाओं से होगा, जो ठेकेदार पहले पूरी कर चुके हैं और जिनमें वही तकनीकी हिस्से शामिल हों, जिनके लिए वे अब बोली लगा रहे हैं। इसके अलावा, HAM और BOT (टोल) परियोजनाओं में EPC ठेकेदारों और EPC परियोजनाओं में अनधिकृत उप-ठेकेदारों की नियुक्ति पर भी सख्त नजर रखी जाएगी।
ठेकेदारों के लिए नए नियम तैयार
कई बार देखा गया है कि कुछ ठेकेदारों या बोलीदाताओं ने NHAI की अनुमति के बिना उप-ठेकेदार नियुक्त किए या अनुमति से ज्यादा उप-ठेके दे दिए। इससे न केवल संविदा नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि परियोजनाओं की गुणवत्ता और समय सीमा भी प्रभावित होती है। अब ऐसे अनधिकृत उप-ठेकों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, अनुमति से ज्यादा उप-ठेके देने वालों पर धोखाधड़ी जैसी सजा भी हो सकती है।
NHAI ने यह भी बताया कि सुधार का एक और कदम “बिड और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी” से जुड़ा है। कुछ ठेकेदार थर्ड-पार्टी फाइनेंशियल सिक्योरिटी जमा करते हैं, जिससे जवाबदेही तय करने में दिक्कत होती है। खासकर जब वित्तीय रूप से कमजोर ठेकेदार किसी दूसरी फर्म के साथ ज्वाइंट वेंचर करते हैं। अब ऐसी सिक्योरिटी को फाइनेंशियल बिड के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
