सैन फ्रांसिस्को की AI स्टार्टअप पेरप्लेक्सिटी ने गूगल के क्रोम ब्राउजर को खरीदने के लिए $34.5 बिलियन (लगभग ₹2.9 लाख करोड़) की औपचारिक पेशकश की है। यह बोली अमेरिका में गूगल के खिलाफ चल रहे एंटीट्रस्ट केस के मद्देनजर की गई है, जिसमें गूगल को क्रोम ब्राउजर बेचने और अपनी सर्च डेटा को प्रतिद्वंद्वियों के साथ साझा करने का आदेश मिल सकता है।
बोली का ऐलान
पेरप्लेक्सिटी के प्रवक्ता ने बताया कि यह अनचाही बोली मंगलवार सुबह अल्फाबेट इंक (गूगल की पैरेंट कंपनी) को भेजी गई। कुछ समय पहले ही AI स्टार्टअप ओपनAI ने भी क्रोम को खरीदने में रुचि दिखाई थी। क्रोम और इसका ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर क्रोमियम दुनिया भर में PC पर वेब एक्सेस करने का प्रमुख जरिया है।
पिछले साल एक फेडरल जज ने फैसला सुनाया था कि गूगल ने इंटरनेट सर्च में अवैध एकाधिकार बनाया है। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने सुझाव दिया कि गूगल को क्रोम ब्राउजर बेचना होगा और सर्च डेटा को प्रतिद्वंद्वियों के साथ शेयर करना होगा। इस केस की सुनवाई कर रहे जज अमित मेहता के जल्द ही इस मामले में उपायों (रेमेडीज) पर फैसला सुनाने की उम्मीद है।
पेरप्लेक्सिटी की ताकत
सैन फ्रांसिस्को बेस्ड पेरप्लेक्सिटी AI पावर्ड सर्च इंजन के जरिए गूगल के यूजर्स को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने $100 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी, जिसके बाद इसकी वैल्यूएशन $18 बिलियन (लगभग ₹1.5 लाख करोड़) हो गई थी। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी बोली के लिए फंडिंग कहां से आएगी?
पेरप्लेक्सिटी के चीफ बिजनेस ऑफिसर दमित्री शेवेलेन्को ने कहा, “कई बड़े निवेशक फंड्स ने इस डील को पूरी तरह फाइनेंस करने के लिए सहमति जताई है।” हालांकि, इन फंड्स के नामों का खुलासा नहीं किया गया।
पहले भी की हैं ऐसी कोशिशें
यह पहली बार नहीं है जब पेरप्लेक्सिटी ने किसी बड़े इंटरनेट प्रॉपर्टी को खरीदने की पेशकश की हो। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस को अमेरिकी ऑपरेशंस के साथ मर्ज करने और एक नई कंपनी बनाने की पेशकश की थी। टिकटॉक को अमेरिका में बैन का सामना करना पड़ रहा है, अगर वह कोई डील नहीं कर पाता।
AI और ब्राउजर की नई जंग
वेब ब्राउजर्स में AI कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है, क्योंकि वे AI एजेंट्स डेवलप करना चाहती हैं जो यूजर्स के लिए ऑनलाइन शॉपिंग और अन्य टास्क्स को आसान बनाएं। पेरप्लेक्सिटी ने हाल ही में अपना AI-पावर्ड ब्राउजर ‘कॉमेट’ लॉन्च किया है, जो इस दिशा में एक कदम है।
पेरप्लेक्सिटी का वादा
कंपनी ने कहा कि अगर यह डील फाइनल होती है, तो वह क्रोम में कोई “छिपे बदलाव” नहीं करेगी। प्रवक्ता के मुताबिक, “यह यूजर्स के लिए निरंतरता और पसंद की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इससे गूगल और इसके विज्ञापनदाताओं के लिए स्थिरता का फायदा होगा।”
पेरप्लेक्सिटी ने यह भी वादा किया है कि वह अगले दो साल में क्रोम और क्रोमियम में $3 बिलियन (लगभग ₹25,200 करोड़) का निवेश करेगी और क्रोम की मौजूदा टीम के बड़े हिस्से को जॉब ऑफर देगी। कंपनी ने साफ किया कि इस बोली में पेरप्लेक्सिटी की कोई इक्विटी शामिल नहीं है, ताकि एंटीट्रस्ट से जुड़ी चिंताओं से बचा जा सके।
क्या गूगल मानेगा
गूगल ने अभी तक इस बोली पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विश्लेषकों का मानना है कि गूगल क्रोम को बेचने के लिए आसानी से राजी नहीं होगा, क्योंकि यह उसकी सर्च और AI रणनीति का अहम हिस्सा है। कुछ विशेषज्ञों ने क्रोम की वैल्यूएशन $50 बिलियन से ज्यादा आंकी है, जिसके मुकाबले पेरप्लेक्सिटी की $34.5 बिलियन की बोली कम लगती है।
