नेपाल में केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ भड़के आंदोलन के बाद जनता ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता को देश की कमान सौंपने की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारी मानते हैं कि नेपाल को ऐसे नेता की जरूरत है, जो देश के कल्याण को प्राथमिकता दे और एकजुट रखे। युवाओं का कहना है कि पीएम मोदी जैसे नेतृत्व से नेपाल में भी वैसी ही प्रगति हो सकती है, जैसी भारत में पिछले एक दशक में दिखी है।
नेपाल के युवाओं में दिखा पीएम मोदी का क्रेज
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल में केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ 35 घंटे तक चले तीखे विरोध प्रदर्शन के बाद लोगों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता की जरूरत जताई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेपाल को एक ऐसे नेता की जरूरत है, जो देश के हित को सबसे ऊपर रखे और प्रगति की राह पर ले जाए।
लोगों ने बातचीत में देश की चुनौतियों, उम्मीदों और भविष्य के दृष्टिकोण पर खुलकर अपनी राय रखी। प्रदर्शन से संतुष्ट कुछ युवाओं ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले दस साल में जबरदस्त तरक्की की है, और नेपाल में भी ऐसी ही प्रगति की जरूरत है। उनका मानना है कि अभी के लिए एक अल्पकालिक सरकार बेहतर होगी, जिसके बाद नियमित चुनाव कराए जाएं।
‘नेपाल को चाहिए एकजुट करने वाला नेता’
कई युवाओं का मानना है कि एक युवा और जोशीला नेता ही नेपाल को मौजूदा संकट से निकाल सकता है। दीपेंद्र विश्वकर्मा नाम के एक युवा ने कहा कि नेपाल को तुरंत ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है, जो देश को एकजुट कर सके। उन्होंने कहा, “इतना बड़ा आंदोलन हुआ है, लेकिन नेता व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेदों में उलझे हैं। उन्हें देश के असल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और मिलकर समाधान निकालना चाहिए।”
‘नेपाल बने भारत जैसी वैश्विक ताकत’
एक अन्य युवक ने कहा कि नेपाल को भारत की तरह वैश्विक ताकत बनने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हम तकनीक और अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो हमें एक युवा और सक्रिय नेता चाहिए, जो नेपाल को भविष्य की ओर ले जाए।” कुछ युवाओं ने देश के कुछ नेताओं की कड़ी आलोचना भी की।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सुशीला कार्की को नेपाल का प्रधानमंत्री नहीं बनाना चाहिए। उनके मुताबिक, बालेंद्र शाह, कुलमान घिसिंग और गोपी हमाल जैसे नेता उनसे बेहतर साबित हो सकते हैं। कुछ अन्य युवाओं ने कहा कि सुशीला कार्की का नाम कई घोटालों में आ चुका है, और वह नेपाल का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
