मुंबई: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार में कथित फ्रंट-रनिंग घोटाले के लिए आईआईएफएल सिक्योरिटीज के पूर्व निदेशक संजीव भसीन और 11 अन्य व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की है। सेबी ने इन सभी को शेयर बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है और 11.37 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को जब्त करने का आदेश जारी किया है। यह राशि कथित रूप से इस फ्रंट-रनिंग योजना के माध्यम से अर्जित की गई थी।
I. घोटाले का खुलासा और कार्यप्रणाली
सेबी की 149 पेज की जांच रिपोर्ट के अनुसार, संजीव भसीन और उनकी टीम ने एक सुनियोजित तरीके से बाजार में हेरफेर किया। वे पहले अपने या संबंधित खातों के माध्यम से किसी स्टॉक में भारी खरीदारी करते थे। इसके बाद, भसीन सीएनबीसी आवाज, जी बिजनेस, ईटी नाउ जैसे टीवी चैनलों और आईआईएफएल के टेलीग्राम चैनल पर उसी स्टॉक को खरीदने की सलाह देते थे। जैसे ही लाखों खुदरा निवेशक इन सलाहों पर कार्रवाई करते, शेयर की कीमतें बढ़ जातीं। इस दौरान भसीन और उनके सहयोगी अपनी पोजीशन बेचकर मोटा मुनाफा कमा लेते थे। यह एक तरह से आम निवेशकों को भ्रमित कर उनके नुकसान की कीमत पर लाभ कमाने की रणनीति थी।
II. उदाहरण: पराग मिल्क फूड्स का मामला
7 फरवरी 2024 को भसीन ने जी बिजनेस पर पराग मिल्क फूड्स के शेयर खरीदने की सलाह दी। उन्होंने दर्शकों को 210 रुपये पर शेयर खरीदने और 300 रुपये का लक्ष्य रखने को कहा। लेकिन सच्चाई यह थी कि भसीन ने पहले ही 210 रुपये की दर से 51,500 शेयर खरीद लिए थे। शो समाप्त होते ही उन्होंने ये शेयर 235.45 रुपये पर बेच दिए, जिससे एक ही दिन में 8,400 रुपये का मुनाफा हुआ। सेबी ने कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, ट्रेडिंग समय और फंड प्रवाह के विश्लेषण से इस पूरी योजना का पर्दाफाश किया।
III. आरआरबी मास्टर सिक्योरिटीज की भूमिका
भसीन ने अपने ट्रेड आरआरबी मास्टर सिक्योरिटीज के माध्यम से किए, जिसे उनके चचेरे भाई ललित भसीन और जीजा अशीष कपूर संचालित करते थे। सेबी ने पाया कि वीनस पोर्टफोलियो, जेमिनी पोर्टफोलियो और एचबी स्टॉकहोल्डिंग्स जैसे खातों का इस्तेमाल इन ट्रेडों के लिए किया गया। ये खाते भसीन के करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों से जुड़े थे। सेबी ने इन सभी खातों पर रोक लगा दी है और बैंकों को निर्देश दिया है कि इनसे कोई निकासी न हो, सिवाय सेबी के पक्ष में सावधि जमा में राशि जमा करने के।
IV. भसीन की गैर-कानूनी स्थिति
सेबी ने यह भी उजागर किया कि हालांकि आईआईएफएल सिक्योरिटीज एक पंजीकृत रिसर्च विश्लेषक और निवेश सलाहकार है, लेकिन संजीव भसीन व्यक्तिगत रूप से न तो रिसर्च विश्लेषक थे और न ही निवेश सलाहकार। इसके बावजूद, वे टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर लाखों निवेशकों को सलाह दे रहे थे। यह गैर-कानूनी रूप से बाजार को प्रभावित करने और व्यक्तिगत लाभ कमाने का प्रयास था।
V. आईआईएफएल सिक्योरिटीज का बयान
आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने स्पष्ट किया कि भसीन केवल एक सलाहकार के रूप में अनुबंध पर थे, न कि बोर्ड सदस्य। उनका अनुबंध 30 जून, 2024 को समाप्त होने वाला था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से इसे 17 जून, 2024 को ही समाप्त कर दिया गया। कंपनी ने कहा कि उन्हें भसीन के खिलाफ सेबी की जांच की पूरी जानकारी नहीं थी और वे इस पर टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।
VI. निवेशकों के लिए सबक
यह मामला शेयर बाजार में त्वरित मुनाफे के लालच में पड़ने के खतरों को रेखांकित करता है। सेबी की सख्त निगरानी और कार्रवाई से बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की रक्षा हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि टीवी और सोशल मीडिया पर दी जाने वाली स्टॉक टिप्स पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय निवेशकों को सेबी-पंजीकृत सलाहकारों से परामर्श लेना चाहिए। साथ ही, मीडिया प्लेटफार्मों को भी सलाह देने वाले विशेषज्ञों की विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए।
सेबी ने भसीन और अन्य आरोपियों को 21 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने और व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध करने का अवसर दिया है। यह अंतरिम आदेश तब तक लागू रहेगा, जब तक आगे के निर्देश जारी नहीं किए जाते। इस मामले ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि क्या टीवी और सोशल मीडिया पर शेयर टिप्स देने की प्रथा पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है।
