
यूपी पुलिस इंस्पेक्टर नरगिस खान पर आय से अधिक संपत्ति का मामला: मेरठ में FIR दर्ज
मेरठ, 5 जून 2025 – उत्तर प्रदेश पुलिस की इंस्पेक्टर नरगिस खान एक बार फिर विवादों में हैं। मेरठ के मेडिकल थाने में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है। वर्तमान में बरेली में तैनात नरगिस खान और उनके पति सुरेश यादव के पास मेरठ से देहरादून तक फैली करोड़ों रुपये की संपत्तियां हैं, जिनकी कीमत उनकी वैध आय से कहीं अधिक बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि 2007 से 2021 तक नरगिस की वैध आय लगभग 5.36 करोड़ रुपये थी, जबकि इस दौरान उनका खर्च 10.59 करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस मामले ने पुलिस महकमे और जनता के बीच हलचल मचा दी है।
संपत्तियों का विशाल साम्राज्य
नरगिस खान और उनके पति सुरेश यादव के नाम पर मेरठ, नोएडा, लखनऊ, कानपुर देहात, और देहरादून जैसे शहरों में अचल और चल संपत्तियां दर्ज हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 70 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें आलीशान कोठियां, फ्लैट, पेट्रोल पंप, बार, रेस्टोरेंट, दुकानें, फार्महाउस, और लग्जरी कारें शामिल हैं। नीचे कुछ प्रमुख संपत्तियों का ब्यौरा दिया गया है:
- मेरठ, शास्त्रीनगर: 640 गज की कोठी, कीमत करीब 5 करोड़ रुपये।
- मेरठ, गढ़ रोड: नंदनी बार और रेस्टोरेंट के साथ 8 दुकानें, कीमत करीब 10 करोड़ रुपये।
- मेरठ, लोहिया नगर: 50 लाख रुपये का प्लॉट।
- नोएडा, सेक्टर-18: जस्ट बार, कीमत करीब 3 करोड़ रुपये।
- बरेली, बदायूं रोड: मारिया सर्विस स्टेशन (पेट्रोल पंप), कीमत करीब 5 करोड़ रुपये।
- लखनऊ, अलीगंज: फ्लैट, कीमत करीब 80 लाख रुपये।
- कानपुर देहात: 29 बीघा से अधिक जमीन, कीमत करीब 24 करोड़ रुपये।
- देहरादून, डालनवाला: 2 फ्लैट, कीमत करीब 40 लाख रुपये।
- लग्जरी कारें: थार, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, रेंज रोवर जैसी गाड़ियां, कीमत करीब 3 करोड़ रुपये।
इसके अलावा, सुरेश यादव के नाम पर तीन पेट्रोल-डीजल टैंकर और सात मोबाइल टैंकर भी हैं, जिनकी कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये आंकी गई है।
सपा सरकार में प्रभाव और विवाद
नरगिस खान 1990 बैच की दरोगा हैं और समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के दौरान उनकी मजबूत पकड़ थी। मेरठ के महिला थाने समेत कई प्रमुख थानों में उनकी तैनाती रही, जहां उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। उनके पति सुरेश यादव, जो खुद को सपा नेता शिवपाल यादव का OSD बताते थे, कई कारोबारी गतिविधियों में शामिल रहे, जो विवादों का केंद्र बने। 2021 में सुरेश यादव को लखनऊ में डिप्टी लेबर कमिश्नर कार्यालय से जुड़े 1.72 करोड़ रुपये के गबन मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसी साल नरगिस खान को मेरठ में एक नाबालिग बच्ची को गलत तरीके से सुपुर्द करने के मामले में निलंबित किया गया था।
जांच में क्या सामने आया?
एंटी-करप्शन यूनिट की जांच में पाया गया कि नरगिस खान ने 14 साल में अपनी आय से 97% अधिक, यानी 5.23 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की। जब उनसे इस खर्च का जवाब मांगा गया, तो वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकीं। जांच में उनके और उनके पति के नाम पर बेनामी संपत्तियों का भी संदेह जताया गया है। आयकर विभाग भी इस मामले की समानांतर जांच कर रहा है, और आगे की तहकीकात में और खुलासे होने की संभावना है।
जनता और पुलिस में हलचल
यह मामला यूपी पुलिस में भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “14 साल में 10 करोड़ की संपत्ति! यह तो आमदनी से कहीं ज्यादा है। आखिर इसका राज क्या है?” वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “पुलिस और प्रशासन में ऐसे मामले व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं।”
आगे क्या?
नरगिस खान और सुरेश यादव के बैंक खातों, दस्तावेजों, और संपत्तियों की गहन जांच चल रही है। यह मामला न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या इस जांच से भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दब जाएगा।
