डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को ठेंगा दिखाते हुए भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। जयशंकर ने ट्रंप की चेतावनी को ‘बेतुका’ बताया और कहा कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से ही फैसले लेगा।
पुतिन और लावरोव के साथ हुई अहम मुलाकात
विदेश मंत्री जयशंकर ने गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ लंबी बैठक की। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार पर खास चर्चा हुई। जयशंकर रूस की तीन दिन की यात्रा पर हैं, जिसके दौरान उन्होंने भारत-रूस के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया।
‘दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में से एक है भारत-रूस दोस्ती’
विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, “भारत और रूस का रिश्ता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में से एक रहा है। यह दोस्ती सिर्फ सरकारी नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के दिलों में बसी है।” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ेगा।
ट्रंप की धमकी पर जयशंकर का जवाब
इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वह रूस से तेल खरीदना जारी रखता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इस धमकी का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, “भारत हमेशा अपने हितों को सबसे पहले रखता है। हमारी ऊर्जा जरूरतों का फैसला हम खुद करेंगे, कोई और नहीं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला अकेला देश नहीं है और यह व्यापार पूरी तरह से बाजार के नियमों पर आधारित है।
क्या है आगे की रणनीति
जयशंकर की इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और भी बड़े deals होने की उम्मीद है।