भारत सरकार ने हवाई अड्डों के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एयरक्राफ्ट (डेमोलिशन ऑफ ऑब्स्ट्रक्शंस) रूल्स, 2025 का मसौदा जारी किया है। यह मसौदा नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसका उद्देश्य विमानन सुरक्षा को बढ़ावा देना और हवाई अड्डों के आसपास अवरोधों को तुरंत हटाना है। इन नियमों के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को उन खतरनाक संरचनाओं, जैसे ऊंची इमारतों, पेड़ों या टावरों, की पहचान करने और उन्हें हटाने का अधिकार दिया गया है, जो विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग में बाधा उत्पन्न करते हैं। ये अवरोध ऑब्स्टकल लिमिटेशन सरफेसेज (OLS) का उल्लंघन करते हैं, जो हवाई अड्डों के आसपास एक काल्पनिक सीमा होती है और सुरक्षित उड़ान संचालन के लिए जरूरी है।
नए नियमों के अनुसार, स्थानीय प्रशासन को ऐसी संरचनाओं को तत्काल तोड़ने का आदेश दिया जाएगा, जिससे पहले की तरह नौकरशाही देरी से बचा जा सके। उदाहरण के लिए, नागपुर हवाई अड्डे के पास 60 से अधिक, मुंबई में 90 से अधिक, त्रिवेंद्रम में 141 और कोलकाता में 377 खतरनाक संरचनाओं की पहचान की गई है, लेकिन कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई अभी भी मौजूद हैं। ये नियम इस प्रक्रिया को तेज करने का काम करेंगे, जिससे डीजीसीए द्वारा चिह्नित संरचनाओं को बिना देरी के हटाया जा सके। हालांकि, संपत्ति मालिकों को अदालत में अपील करने का अधिकार होगा, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी रहेगी।
यह पहल अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप है, जिससे रनवे सुरक्षा में सुधार होगा, मिड-एयर टर्बुलेंस या लैंडिंग त्रुटियों जैसे जोखिम कम होंगे, और भारत की वैश्विक विमानन सुरक्षा छवि मजबूत होगी। हालांकि, संपत्ति डेवलपर्स, हाउसिंग सोसाइटीज और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव के कारण विरोध और कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। मसौदा नियम जनता की राय के लिए खुला है, और जहां विमानन विशेषज्ञ इस कदम की सराहना कर रहे हैं, वहीं स्थानीय हितधारकों के साथ टकराव की आशंका है।
हाल के अपडेट में, एयर इंडिया विमान दुर्घटना के दोनों ब्लैक बॉक्स बरामद किए गए हैं, लेकिन कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) को नुकसान पहुंचा है, और डेटा रिकवरी के लिए इसे संभवतः अमेरिका भेजा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना में रैम एयर टरबाइन (RAT) का उपयोग हुआ, जो दोनों इंजनों, इलेक्ट्रॉनिक या हाइड्रोलिक सिस्टम के फेल होने पर आपातकालीन बिजली प्रदान करता है। यह एक छोटा प्रोपेलर जैसा उपकरण है, जो विमान के आपातकालीन संचालन में महत्वपूर्ण है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के कार्यों से संबंधित सवाल में, इसका सही उत्तर वह कार्य है जो AAI के दायरे में नहीं आता, जैसे कि विमान निर्माण, क्योंकि AAI का मुख्य कार्य हवाई अड्डों का प्रबंधन, हवाई यातायात नियंत्रण और बुनियादी ढांचा विकास है।
