भारत ने हाल ही में अपने स्वदेशी वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) ड्रोन “रुद्राक्षम” का सफल परीक्षण किया है। इसे भारत का “ब्रह्मास्त्र” कहा जा रहा है, क्योंकि यह दुश्मन के इलाके में घुसकर उनके हथियार प्रणालियों को ध्वस्त करने में सक्षम है। यह ड्रोन भारत की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रुद्राक्षम ड्रोन क्यों है खास?
1. वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) तकनीक
- इसे रनवे की जरूरत नहीं, यह किसी भी सीमित स्थान से ऊपर उठकर उड़ान भर सकता है और वहीं वापस लैंड कर सकता है।
- यह फीचर इसे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी प्रभावी बनाता है।
2. लंबी दूरी की मारक क्षमता
- 170 किमी तक की रेंज के साथ, यह दुश्मन के अंदरूनी ठिकानों तक पहुँच सकता है।
- 50 किमी दूर के लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट करने की क्षमता।
3. सटीक हमला करने की क्षमता
- यह दुश्मन के तोपखाने, रडार सिस्टम और फायरिंग पोजीशन को निशाना बना सकता है।
- विस्फोटक बिखराव तकनीक (Airburst Explosives) से बड़े क्षेत्र को तबाह कर सकता है।
4. रियल-टाइम इंटेलिजेंस और ऑटो-रिटर्न
- यह लाइव वीडियो फीड भेजता है, जिससे सेना को दुश्मन की गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी मिलती है।
- मिशन पूरा होने पर यह स्वचालित रूप से बेस पर वापस आ जाता है।
रुद्राक्षम ड्रोन का रणनीतिक महत्व
- आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में कारगर।
- सीमा पार घुसपैठ रोकने में मददगार।
- चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों के लिए चुनौती।
- स्वदेशी तकनीक से बना होने के कारण भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी।
भारत के अन्य प्रमुख सैन्य ड्रोन
- हेरॉन (इजरायल) – 350 किमी रेंज, 30 घंटे तक उड़ान।
- Rustom (DRDO) – स्वदेशी MALE ड्रोन, 24 घंटे उड़ान।
- नेत्रा V2 (भारत) – आतंकवाद विरोधी अभियानों में उपयोगी।
- स्काई स्ट्राइकर (भारत-इजरायल) – आत्मघाती ड्रोन, 100 किमी रेंज।
- MQ-9 रीपर (अमेरिका) – भारत 31 ड्रोन खरीद रहा है, 10,850 किमी रेंज।
भारत की बढ़ती सैन्य ताकत
रुद्राक्षम ड्रोन भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का एक बड़ा उदाहरण है। यह न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन जैसे दुश्मनों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। भविष्य में, ऐसे और स्वदेशी ड्रोन्स से भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत होगी।
