हाल ही में, मुंबई से लगभग 60 किलोमीटर दूर ठाणे जिले के भिवंडी तालुका में स्थित पडघा और बोरीवली गांव उस समय सुर्खियों में आए जब कुछ लोगों पर आरोप लगा कि उन्होंने इस क्षेत्र को “इस्लामिक लिबरेटेड ज़ोन” घोषित किया है। ये आरोप, मुख्य रूप से आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़े हैं, ने व्यापक बहस छेड़ दी है। स्थानीय निवासियों ने इन दावों का जोरदार खंडन किया है और अपनी एकता व राष्ट्रीय सद्भाव के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया है।
छापेमारी और आतंकवाद के आरोप
2 जून, 2025 को महाराष्ट्र आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस) ने खुफिया जानकारी के आधार पर पडघा गांव में 22 स्थानों पर छापेमारी की। इस अभियान में 250 कर्मी और 20 एटीएस टीमें शामिल थीं, जिसमें साकिब नचान सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें इस्लामिक स्टेट (आईएस) का महाराष्ट्र प्रमुख बताया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि नचान और अन्य लोग प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े थे, जो कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और आतंकी संगठनों से संबंधों में शामिल है। छापेमारी में पिस्तौल, एयर गन, तलवारें, चाकू, 68 लाख रुपये नकद, 51 हमास के झंडे और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 9 दिसंबर, 2023 को एक आईएस से जुड़े आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त किया था, जिसमें 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
समुदाय का जवाब: एकता और खंडन
महुली पहाड़ियों की तलहटी में बसे, मुख्य रूप से मुस्लिम-बहुल पडघा और बोरीवली गांवों के निवासियों ने इन आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। उनका कहना है कि कुछ व्यक्तियों के कार्यों के लिए पूरे समुदाय को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने योगदान, जैसे स्वदेशी आंदोलन में भागीदारी, को याद किया। वे दावा करते हैं कि छापेमारियों में निर्दोष लोगों, जिसमें नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं, को निशाना बनाया गया। रमीजा, एक आरोपी की रिश्तेदार, ने बताया कि उनके दो बेटे, जो परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे, बिना सबूत के गिरफ्तार किए गए। ग्रामीणों ने एक सामान्य वकील नियुक्त किया है ताकि उनकी बात कोर्ट में रखी जाए।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
इन आरोपों और छापेमारियों ने गांवों पर गहरा असर डाला है। एक ग्रामीण ने पूछा, “कुछ लोगों की गलतियों की सजा पूरे गांव को क्यों?” ग्राम पंचायत और स्थानीय सरकारी कार्यालय सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, और निवासी “लिबरेटेड ज़ोन” जैसे दावों को निराधार बताते हैं। वे निष्पक्ष जांच और निर्दोष लोगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और समुदाय के अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है, और सच्चाई केवल पारदर्शी जांच से ही सामने आएगी।
