अमेरिका की प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस भारत में दोबारा प्रवेश करने की तैयारी में है। इस बार चर्चा का केंद्र भारत की जानी-मानी क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइन डीसीएक्स है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कॉइनबेस कॉइन डीसीएक्स को खरीदने के लिए उन्नत बातचीत कर रहा है। अगर यह डील पूरी होती है, तो यह भारतीय क्रिप्टो उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है। हालांकि, कॉइन डीसीएक्स के सीईओ ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज किया है, जिससे इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। आइए इस खबर के विभिन्न पहलुओं को समझते हैं।
कॉइन डीसीएक्स और हाल का साइबर हमला
कॉइन डीसीएक्स हाल ही में एक बड़े साइबर हमले का शिकार बनी थी। 19 जुलाई 2025 को इसके इंटरनल ऑपरेशनल वॉलेट से 44 मिलियन डॉलर (लगभग 368 करोड़ रुपये) की चोरी हुई। यह भारत में अब तक का सबसे बड़ा क्रिप्टो हैक माना जा रहा है। इससे पहले वजीरएक्स पर 235 मिलियन डॉलर का हैक हुआ था। कॉइन डीसीएक्स ने दावा किया कि ग्राहकों के फंड सुरक्षित हैं, क्योंकि वे कोल्ड वॉलेट में रखे गए थे, और यह चोरी कंपनी के ट्रेजरी खाते से हुई थी। इस हमले ने कॉइन डीसीएक्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लेकिन कंपनी ने तुरंत कदम उठाए।
कॉइन डीसीएक्स ने चोरी हुए फंड्स को वापस पाने के लिए एक रिकवरी बाउंटी प्रोग्राम शुरू किया, जिसमें 25% (लगभग 11 मिलियन डॉलर) तक का इनाम देने की पेशकश की गई। यह भारत में क्रिप्टो रिकवरी के इतिहास में सबसे बड़ा कदम है। इस हमले के बाद कॉइन डीसीएक्स का वैल्यूएशन, जो 2021 में 2.2 बिलियन डॉलर था, अब 1 बिलियन डॉलर से नीचे होने की संभावना है। यह गिरावट अधिग्रहण की अफवाहों को और हवा दे रही है।
कॉइनबेस का भारत में इतिहास
कॉइनबेस ने 2022 में भारत में संचालन शुरू किया था, लेकिन नियामक अनिश्चितताओं के कारण उसे अपने ऑपरेशंस सीमित करने पड़े। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के उपयोग पर राष्ट्रीय भुगतान निगम के बयान के बाद कॉइनबेस को रुपये को क्रिप्टो में बदलने की सुविधा बंद करनी पड़ी। हालांकि, मार्च 2025 में कॉइनबेस ने भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट में पंजीकरण करवाया, जो इस बात का संकेत है कि कंपनी अब रिटेल क्रिप्टो ट्रेडिंग के लिए भारत में फिर से प्रवेश करने को तैयार है।
कॉइनबेस एक वैश्विक स्तर पर सूचीबद्ध कंपनी है, जिसकी 2024 में 2.58 बिलियन डॉलर की नेट इनकम थी और 404 बिलियन डॉलर के डिजिटल एसेट्स हैं, जिनमें 12% बिटकॉइन और 11% इथेरियम शामिल हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी बिटकॉइन कस्टोडियन कंपनी है। कॉइनबेस पहले से ही कॉइन डीसीएक्स और इसके प्रतिद्वंद्वी कॉइन स्विच कुबेर में रणनीतिक निवेश कर चुकी है, जो भारत में इसके दीर्घकालिक हित को दर्शाता है।
अधिग्रहण की अफवाहें और खंडन
कई मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया कि कॉइनबेस और कॉइन डीसीएक्स के बीच अधिग्रहण की बातचीत अंतिम चरण में है। इस डील में कॉइन डीसीएक्स की वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर से कम हो सकती है। यह डील कॉइनबेस के लिए भारत के तेजी से बढ़ते क्रिप्टो मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जहां 93 मिलियन से अधिक क्रिप्टो होल्डर्स हैं।
हालांकि, कॉइन डीसीएक्स के सीईओ सुमित गुप्ता ने अपने एक्स हैंडल पर इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा, “इन अफवाहों को नजरअंदाज करें! कॉइन डीसीएक्स बिक्री के लिए नहीं है। हम भारत के क्रिप्टो इकोसिस्टम को विकसित करने पर केंद्रित हैं।” कंपनी के सह-संस्थापक नीरज खंडेलवाल ने भी इस बयान का समर्थन किया। कॉइनबेस ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, बल्कि कहा कि वे अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करते।
भारत में क्रिप्टो मार्केट का महत्व
भारत में क्रिप्टोकरेंसी की मांग तेजी से बढ़ रही है, और यहां 93 मिलियन से अधिक क्रिप्टो होल्डर्स हैं, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख बाजार बनाता है। 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट टैक्स और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट में अनिवार्य पंजीकरण के लागू होने के बाद, भारत में क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए नियामक ढांचा स्पष्ट हो गया है। कॉइनबेस के लिए यह एक सुनहरा अवसर है, क्योंकि भारत का क्रिप्टो मार्केट उच्च संभावनाओं वाला गंतव्य बन चुका है।
कॉइनबेस की हालिया गतिविधियां, जैसे डेरिबिट और लिक्विफाई का अधिग्रहण, इसकी वैश्विक विस्तार रणनीति को दर्शाती हैं। कॉइन डीसीएक्स और कॉइन स्विच में पहले से मौजूद निवेश के साथ, कॉइनबेस भारत में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
कॉइन डीसीएक्स की वित्तीय स्थिति
कॉइन डीसीएक्स ने वित्त वर्ष 2024 में 15.5 करोड़ रुपये और 2023 में 28 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। हालांकि, इसकी आय का बड़ा हिस्सा सिंगापुर और मॉरीशस में संबद्ध संस्थाओं से आता है। इन आयों को हटाने पर कंपनी को दोनों वर्षों में घाटा हुआ होता। इसके अलावा, कॉइन डीसीएक्स की प्रूफ-ऑफ-रिजर्व ऑडिट प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि यह स्व-निर्धारित दायरे में होती है।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि कॉइन डीसीएक्स ने अधिग्रहण की खबरों को खारिज किया है, लेकिन कॉइनबेस की भारत में बढ़ती रुचि स्पष्ट है। एक वैकल्पिक योजना के तहत कॉइनबेस अपनी हिस्सेदारी कॉइन डीसीएक्स और कॉइन स्विच को मिलाकर एक विलय की संभावना पर भी विचार कर सकती है।
यदि यह अधिग्रहण होता है, तो यह भारतीय क्रिप्टो उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर हो सकता है। कॉइनबेस की वैश्विक विशेषज्ञता और मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल भारत के क्रिप्टो मार्केट को और परिपक्व बना सकते हैं। लेकिन अभी के लिए, कॉइन डीसीएक्स के खंडन और कॉइनबेस की चुप्पी के कारण इस डील की स्थिति अस्पष्ट है।
कॉइनबेस की भारत में री-एंट्री और कॉइन डीसीएक्स के अधिग्रहण की अफवाहें क्रिप्टो उद्योग में एक बड़े बदलाव का संकेत दे सकती हैं। हालांकि कॉइन डीसीएक्स ने इन खबरों को अफवाह बताया है, लेकिन कॉइनबेस की भारत में बढ़ती गतिविधियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि कंपनी भारतीय बाजार को गंभीरता से ले रही है। यह डील हो या न हो, भारत का क्रिप्टो मार्केट वैश्विक खिलाड़ियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना रहेगा।
