अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ब्राजील द्वारा बुलाई गई ब्रिक्स देशों की खास बैठक में भारत का नेतृत्व विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे, न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत और ब्राजील पर 50% तक टैरिफ लगाने की नीति ने दोनों देशों को नाराज कर दिया है। यह बैठक ट्रंप की इस शुल्क नीति के खिलाफ जवाब तलाशने के लिए बुलाई गई है।
ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ ब्रिक्स देशों की वर्चुअल बैठक। (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव का माहौल है, लेकिन भारत नहीं चाहता कि ऐसा लगे कि वह अपने इस रणनीतिक साझेदार के प्रति उदासीन हो गया है। यही वजह है कि ब्राजील द्वारा 8 सितंबर को बुलाई गई ब्रिक्स देशों की विशेष वर्चुअल बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर हिस्सा लेंगे, न कि पीएम नरेंद्र मोदी।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा ने इस बैठक का आयोजन किया है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, दक्षिण अफ्रीका, और चीन समेत दस देश शामिल होंगे। ट्रंप की भारत और ब्राजील पर 50% टैरिफ की नीति ने दोनों देशों को निशाने पर लिया है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।
ट्रंप के सताए देश आएंगे एक साथ
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया, “ब्राजील ने अपनी अध्यक्षता में 8 सितंबर को एक वर्चुअल बैठक बुलाई है। इस शीर्ष स्तरीय ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की ओर से विदेश मंत्री जयशंकर हिस्सा लेंगे।”
बता दें कि ब्रिक्स का पिछला शिखर सम्मेलन 6-7 जुलाई 2025 को हो चुका है, जिसमें पीएम मोदी ब्राजील गए थे। उस सम्मेलन में जारी घोषणा पत्र पर ट्रंप ने कड़ी नाराजगी जताई थी और ब्रिक्स देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों में ईरान, इथियोपिया, मिस्र, इंडोनेशिया, और यूएई शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन के ब्रिक्स के मूल सदस्य देशों—भारत, रूस, चीन, ब्राजील, और दक्षिण अफ्रीका—के साथ रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं।
लुला से ट्रंप की नाराजगी की वजह?
ट्रंप की ब्राजील के राष्ट्रपति लुला से खास नाराजगी की वजह पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले हैं, जिन्हें लुला सरकार ने शुरू किया है। ट्रंप बोलसोनारो को अमेरिका के हितों का समर्थक मानते हैं। इसके अलावा, चीन और रूस के साथ अमेरिका के पुराने तनाव जगजाहिर हैं, और अब भारत भी इस तनाव की कड़ी में शामिल हो गया है।
