शंघाई के एक प्राइमरी स्कूल ने चीन की बड़ी समस्या को उजागर किया है, जहां सिर्फ 22 बच्चे ही पढ़ रहे हैं। आखिर स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों घट रही है? जानें इसके पीछे का बड़ा कारण।
शंघाई के एक प्राथमिक स्कूल में हालात ऐसे हैं कि वहां बच्चों से ज्यादा शिक्षक हैं। इस स्कूल में सिर्फ 22 बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे कई स्कूल हैं जहां नए दाखिले या तो हो ही नहीं रहे या बहुत कम हो रहे हैं। इसके पीछे एक चौंकाने वाली वजह सामने आई है, जो चीन की शिक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख रही है।
जनसंख्या में गिरावट का असर
चीन में स्कूलों में नए दाखिलों की कमी और बच्चों की घटती संख्या देश की जनसंख्या में हो रही गिरावट को दर्शाती है। यह घटती जन्म दर अब स्कूलों को प्रभावित कर रही है। शंघाई जैसे बड़े शहर में भी स्कूलों में बच्चे कम हो रहे हैं, जो एक राष्ट्रीय समस्या बन गई है।
सानकियाओ स्कूल का चौंकाने वाला हाल
शंघाई के पुडोंग न्यू एरिया में स्थित सानकियाओ प्राइमरी स्कूल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। स्थानीय शिक्षा प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, इस स्कूल में सिर्फ 22 बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि वहां 23 पूर्णकालिक कर्मचारी हैं। यह स्कूल चीन के सबसे बड़े शहरों में से एक में है, फिर भी यहां बच्चों की संख्या इतनी कम है।
यह जानकारी अप्रैल में सामने आई थी, लेकिन इस हफ्ते चीनी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा। इससे देश में जनसंख्या की कमी और इसके स्कूलों पर असर को लेकर बहस छिड़ गई है।
प्री-स्कूल बंद होने की लहर
सानकियाओ स्कूल का मामला भले ही चरम उदाहरण हो, लेकिन जन्म दर में कमी के कारण चीन में प्री-स्कूल बंद होने की लहर चल रही है। अब इसका असर प्राथमिक स्कूलों पर भी दिखने लगा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में चीन में किंडरगार्टन की संख्या पिछले साल की तुलना में 20,000 से ज्यादा कम हो जाएगी, और 50 लाख से ज्यादा कम बच्चे इनमें दाखिला लेंगे।
कैचमेंट एरिया की समस्या
पुडोंग जिला सरकार के छात्र नामांकन और परीक्षा केंद्र के एक कर्मचारी ने बताया कि सानकियाओ स्कूल के आंकड़े सही हैं। उन्होंने कहा कि हर स्कूल अपने निर्धारित कैचमेंट एरिया से ही बच्चों को दाखिला देता है। सानकियाओ के मामले में, इसके कैचमेंट एरिया में प्री-स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है। इसके अलावा, इस इलाके के कई आवासीय समुदाय हाल ही में ध्वस्त किए गए और वहां के लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो गए, जिससे बच्चों की संख्या और कम हो गई।
शंघाई और ग्वांगझोउ में भी गिरावट
शंघाई शिक्षा आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल तक शंघाई के प्राथमिक स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या 1,71,000 थी, जो पिछले साल की तुलना में 30,000 यानी करीब 15% कम है।
इसी तरह, ग्वांगझोउ में भी प्राथमिक स्कूलों में 2024 में 2,40,100 बच्चे दाखिल हुए, जो 2023 की तुलना में 32,400 यानी 12% कम है।
2016 से घट रही जन्म दर
चीन की जन्म दर 2016 में अपने चरम पर थी, जब देश ने अपने परिवार नियोजन कानूनों में बदलाव कर सभी दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की इजाजत दी थी। लेकिन तब से जन्म दर लगातार गिर रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, प्रति हजार लोगों पर जन्म की संख्या 2016 में 13.57 थी, जो 2024 में घटकर 6.77 हो गई।
