न्यूज डेस्क, रीटाइम्स इंडिया
प्रकाशित: शुक्रवार, 08 अगस्त 2025
केंद्र सरकार ने 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किए गए Income Tax Bill 2025 को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। यह बिल 1961 के आयकर अधिनियम (Income Tax Act, 1961) को बदलने के लिए लाया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी वापसी का प्रस्ताव रखा, जिसे लोकसभा ने मंजूरी दे दी। सरकार अब एक संशोधित विधेयक 11 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है, जिसमें संसदीय समिति और अन्य हितधारकों के सुझाव शामिल होंगे। आइए, इस बिल की वापसी के कारण, नए विधेयक की विशेषताओं और इसके महत्व को विस्तार से समझते हैं।
बिल वापस लेने की वजह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि Income Tax Bill 2025 को इसलिए वापस लिया गया, क्योंकि इसमें कई ड्राफ्टिंग त्रुटियां थीं और इसे और स्पष्ट करने की जरूरत थी। बिल को 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश करने के बाद उसी दिन इसे जांच के लिए बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय सिलेक्ट कमेटी को भेजा गया था। समिति ने 21 जुलाई 2025 को अपनी 4,584 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 285 सुझाव दिए गए।
इन सुझावों में ड्राफ्टिंग सुधार, शब्दों का संरेखण, क्रॉस-रेफरेंसिंग, और कानूनी स्पष्टता शामिल थी। इसके अलावा, वकीलों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, और अन्य हितधारकों ने भी कई संशोधनों का सुझाव दिया। सरकार ने समिति की लगभग सभी सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और अन्य सुझावों को भी शामिल करने का फैसला किया है। कई संस्करणों से होने वाली भ्रम की स्थिति से बचने के लिए सरकार ने पुराने बिल को वापस लेकर एक नया, समेकित विधेयक पेश करने का निर्णय लिया।
नए बिल की प्रस्तुति और समयसीमा
संशोधित Income Tax Bill 2025 को 11 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसे मॉनसून सत्र के दौरान पारित करना है, ताकि यह 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सके। नया बिल मौजूदा आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा, जो पिछले छह दशकों में 4,000 से ज्यादा संशोधनों के साथ जटिल हो चुका है।
नए बिल की प्रमुख विशेषताएं
नया विधेयक आयकर कानून को आधुनिक, सरल, और करदाता-अनुकूल बनाने का प्रयास है। मूल बिल की कुछ प्रमुख विशेषताएं, जो संशोधित संस्करण में भी बरकरार रहने की संभावना है, निम्नलिखित हैं:
- सरल भाषा और संरचना: बिल में शब्दों की संख्या को 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख और धाराओं को 819 से 536 तक कम किया गया है। अध्यायों की संख्या भी 47 से घटाकर 23 कर दी गई है। यह करदाताओं और कर अधिकारियों के लिए कानून को समझने और लागू करने में आसानी लाएगा।
- कोई नया कर नहीं: टैक्स स्लैब, कैपिटल गेन्स नियम, आय की श्रेणियां, और समयसीमाएं अपरिवर्तित रहेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिल का उद्देश्य कर दरों में बदलाव नहीं, बल्कि कानून को सरल बनाना है।
- कम जुर्माना: कुछ उल्लंघनों के लिए जुर्माने को कम किया गया है, जिससे करदाता-अनुकूल माहौल बने।
- मुकदमेबाजी में कमी: 300 से ज्यादा पुरानी धाराओं को हटाया गया है, ताकि कानूनी विवाद कम हों। बिल में “पहले भरोसा, बाद में जांच” का दृष्टिकोण अपनाया गया है।
- डिजिटल कर प्रशासन: बिल में डिजिटल मॉनिटरिंग और प्रवर्तन तंत्र शामिल हैं। यह “टैक्स ईयर” की अवधारणा को लागू करता है, जो वित्तीय वर्ष और मूल्यांकन वर्ष के बीच भ्रम को खत्म करता है।
- वर्चुअल डिजिटल एसेट्स: क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल एसेट्स को कर योग्य पूंजीगत संपत्ति के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। सर्च ऑपरेशन्स में वर्चुअल स्पेस (जैसे सोशल मीडिया, क्लाउड स्टोरेज) तक पहुंच के प्रावधान जोड़े गए हैं।
सिलेक्ट कमेटी के प्रमुख सुझाव
सिलेक्ट कमेटी और हितधारकों के सुझावों ने बिल को और मजबूत किया है। कुछ महत्वपूर्ण संशोधन इस प्रकार हैं:
- टैक्स रिफंड: पुराने बिल में रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा के बाद रिफंड से इनकार करने का प्रावधान था, जिसे हटा दिया गया है। अब देर से रिटर्न दाखिल करने पर भी TDS/TCS रिफंड मिल सकेगा।
- गृह संपत्ति पर छूट: 30% मानक कटौती को नगरपालिका करों के बाद लागू करने की स्पष्टता दी गई है। किराए की संपत्तियों के लिए भी होम लोन ब्याज कटौती का लाभ बढ़ाया गया है।
- अनाम दान: धार्मिक-सह-दान ट्रस्टों को मिलने वाले अनाम दान पर कर छूट बरकरार रखने की सिफारिश की गई है।
- इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड: 22% कर दर चुनने वाली कंपनियों के लिए इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड पर कटौती को शामिल करने का सुझाव।
- निल TDS सर्टिफिकेट: करदाताओं को निल TDS सर्टिफिकेट प्राप्त करने की अनुमति देने का प्रस्ताव।
- खाली संपत्तियों पर कर: “सामान्य रूप से” जैसे अस्पष्ट शब्दों को हटाकर वास्तविक किराए और डीम्ड किराए की तुलना को स्पष्ट किया गया है।
नए बिल का महत्व
नया Income Tax Bill 2025 सरकार के टैक्स सुधार अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य है:
- आर्थिक विकास: सरल टैक्स सिस्टम से निवेश और खपत बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- करदाता-अनुकूल माहौल: कम जुर्माने, कम मुकदमेबाजी, और डिजिटल अनुपालन से करदाताओं का अनुभव बेहतर होगा।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल तंत्र और “Enforcement with Empathy” नीति से कर प्रशासन में पारदर्शिता आएगी।
- आधुनिक कर ढांचा: क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स जैसे नए क्षेत्रों को कर दायरे में लाकर कानून को आधुनिक बनाया गया है।
आम करदाताओं पर प्रभाव
नए बिल में टैक्स स्लैब या दरों में कोई बदलाव नहीं है। हालांकि, कुछ बदलाव करदाताओं को सीधे लाभ पहुंचाएंगे:
- बजट 2025 की राहत: वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा, और 12 लाख से थोड़ी ज्यादा आय पर मामूली राहत दी जाएगी। अधिकतम रिबेट 25,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है।
- गृह संपत्ति आय: किराए की संपत्तियों पर ब्याज कटौती और 30% मानक कटौती से मकान मालिकों को फायदा होगा।
- रिफंड में आसानी: देर से रिटर्न दाखिल करने पर भी रिफंड मिलने से छोटे करदाताओं को राहत मिलेगी।
चुनौतियां और आलोचनाएं
विपक्ष ने फरवरी 2025 में बिल को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नए बिल में भी कुछ जटिल प्रावधान बरकरार रह सकते हैं, खासकर डिजिटल एसेट्स और सर्च ऑपरेशन्स से जुड़े। इसके अलावा, नए नियमों के लिए करदाताओं और पेशेवरों को प्रशिक्षण की जरूरत होगी।
Income Tax Bill 2025 की वापसी और 11 अगस्त 2025 को इसके संशोधित संस्करण की प्रस्तुति सरकार की सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नया बिल आयकर कानून को सरल, पारदर्शी, और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह करदाताओं, व्यवसायों, और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हो सकता है, बशर्ते इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे नए बिल के प्रावधानों को समझने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स विशेषज्ञों से संपर्क करें।
