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BSNL का न्यूक्लियर एनर्जी पर फोकस

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Last updated: June 7, 2025 6:38 pm
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BSNL's focus on nuclear energy
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भारत सरकार ने बजट 2025-26 में स्पष्ट रूप से न्यूक्लियर एनर्जी जनरेशन पर अपना फोकस रखा है। सरकार ने 2047 तक 100 गीगावॉट की न्यूक्लियर पावर क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कई नीतियाँ बनाई जा रही हैं, जिसमें पहली बार प्राइवेट कंपनियों को भी न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया है।

Contents
BSNL का संकट और पुनरुत्थानBSNL के पतन के मुख्य कारण:BSNL का न्यूक्लियर एनर्जी में कदम: क्या है वजह?चुनौतियाँ और आगे की राहनिष्कर्ष

इसी बीच, BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) ने भी एक नए लक्ष्य की घोषणा की है। कंपनी अब छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर्स (SMRs) स्थापित करने की योजना बना रही है। यहाँ सवाल उठता है कि एक टेलीकॉम कंपनी अचानक न्यूक्लियर पावर जनरेशन में क्यों दिलचस्पी ले रही है? इसका जवाब जानने से पहले BSNL के पिछले कुछ सालों के संघर्ष को समझना जरूरी है।

भारत सरकार का न्यूक्लियर एनर्जी पर फोकस और BSNL का नया लक्ष्य

BSNL का संकट और पुनरुत्थान

2004-05 के दौर में BSNL भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी थी, जब मोबाइल फोन्स नए-नए आए थे। उस समय अधिकतर लोगों के पास BSNL या भारती एयरटेल के कनेक्शन हुआ करते थे। सरकारी कर्मचारियों के लिए तो BSNL पहली पसंद थी। लेकिन, प्राइवेट कंपनियों (जैसे वोडाफोन, आइडिया और बाद में जियो) के आने के बाद BSNL प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गया।

BSNL के पतन के मुख्य कारण:

  1. ग्राहक आधार में कमी: नए मार्केट प्लेयर्स ने बेहतर सर्विस और सस्ते प्लान्स ऑफर किए, जिससे BSNL का ग्राहक आधार घटा।
  2. ब्यूरोक्रेटिक देरी: सरकारी कंपनी होने के कारण निर्णय लेने में देरी हुई और तकनीकी अपग्रेड नहीं हो पाया।
  3. उच्च कर्मचारी लागत: BSNL पर सरकारी कर्मचारियों का बोझ था, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ गया।

2016 में जियो के आने के बाद तो BSNL का मार्केट शेयर घटकर 10% तक रह गया। 2009 के बाद से कंपनी लगातार घाटे में चल रही थी। सरकार ने इसे बचाने के लिए रेस्क्यू पैकेज दिया, जिसमें:

टैक्स ड्यूटी को इक्विटी में बदला गया।

वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) लागू की गई।

4G स्पेक्ट्रम आवंटित किया गया।

इन प्रयासों के बाद, 17 साल बाद BSNL ने 2023-24 में 280 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया।

BSNL का न्यूक्लियर एनर्जी में कदम: क्या है वजह?

अब BSNL ने भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) प्रोग्राम में हिस्सा लेने का प्रस्ताव दिया है। इसकी मुख्य वजहें हैं:

1. अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना

BSNL के पास देशभर में हजारों टावर हैं, जिन्हें चलाने के लिए निरंतर बिजली की आवश्यकता होती है। अक्सर बिजली कटौती की वजह से सर्विस प्रभावित होती है। SMRs लगाकर वह अपनी पावर सप्लाई को स्थिर कर सकता है।

2. ऊर्जा लागत में बचत

न्यूक्लियर एनर्जी शुरुआत में महंगी होती है, लेकिन लंबे समय में यह किफायती साबित होती है। BSNL पहले ही एनर्जी सेविंग के जरिए 613 करोड़ रुपये बचा चुका है।

3. डाइवर्सिफिकेशन की रणनीति

BSNL पहले से ही टेलीकॉम के अलावा डेटा सेंटर, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और वीपीएन सर्विसेज में विस्तार कर रहा है। न्यूक्लियर एनर्जी में कदम रखकर वह अपने रेवेन्यू स्रोतों को और बढ़ाना चाहता है।

4. सरकारी नीति का समर्थन

भारत सरकार ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) के माध्यम से प्राइवेट कंपनियों को SMRs स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है। NPCIL ने 220 मेगावॉट के छोटे रिएक्टर्स के लिए प्रस्ताव मांगे हैं, जिसमें BSNL ने भी रुचि दिखाई है।

भारत SMR प्रोग्राम: क्या है योजना?

लक्ष्य: 220 मेगावॉट के छोटे रिएक्टर्स बनाना, जो पारंपरिक बड़े रिएक्टर्स से कम समय और लागत में तैयार हो सकें।

समयसीमा: एक बार स्वीकृत होने पर, इन्हें 5-6 साल में बनाया जा सकता है।

उपयोग: ये रिएक्टर्स सिर्फ कंपनियों की अपनी बिजली जरूरतों के लिए होंगे, कमर्शियल बिक्री के लिए नहीं।

इस प्रोग्राम में टाटा, रिलायंस और भारतीय रेलवे जैसी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है।

चुनौतियाँ और आगे की राह

संरचनात्मक सुधार: BSNL को अभी भी अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली सुधारने की जरूरत है।

प्रतिस्पर्धा: जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए नए इनोवेशन्स लाने होंगे।

सरकारी सहयोग: न्यूक्लियर एनर्जी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी फंडिंग और तकनीकी सहायता जरूरी होगी।

निष्कर्ष

BSNL का न्यूक्लियर एनर्जी में कदम रखना एक साहसिक और रणनीतिक फैसला है। अगर यह योजना सफल होती है, तो BSNL न केवल अपनी ऊर्जा लागत कम कर पाएगा, बल्कि भविष्य में एक स्थिर और विविधिकृत व्यवसाय मॉडल भी बना पाएगा। हालाँकि, इसके लिए कंपनी को अपने संरचनात्मक सुधारों पर भी ध्यान देना होगा।

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