भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा रूरल गोडाउन योजना (Rural Godown Scheme) चलाई जाती है, जिसे वेयरहाउस सब्सिडी स्कीम या NABARD स्कीम के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों और कृषि उत्पादकों को उनके उत्पादों के भंडारण के लिए आधुनिक वेयरहाउस सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
योजना का संचालन कौन करता है?
इस योजना को विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (Directorate of Marketing and Inspection – DMI) के माध्यम से लागू किया जाता है। DMI का मुख्य कार्य कृषि संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग सपोर्ट प्रदान करना है।
योजना के लाभ
- 50 मेट्रिक टन से 5000 मेट्रिक टन तक की भंडारण क्षमता वाले गोडाउन बनाने पर सब्सिडी मिलती है।
- किसान और गैर-किसान दोनों इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
- स्वयं की जमीन न होने पर भी, लीज पर ली गई जमीन पर गोडाउन बनाया जा सकता है।
- बैंक फाइनेंस (80-85%) और सरकारी सब्सिडी (25% से 33.33%) का लाभ मिलता है।
सब्सिडी की दरें (4 नवंबर 2024 के बाद अपडेटेड)
सरकार ने हाल ही में वेयरहाउस निर्माण की लागत को बढ़ाकर सब्सिडी का दायरा बढ़ाया है:
| भंडारण क्षमता | पुरानी लागत (प्रति MT) | नई लागत (प्रति MT) |
| 1000 MT तक | ₹3,500 | ₹7,000 |
| 1000 MT से अधिक | ₹3,000 | ₹6,000 |
सब्सिडी का वर्गीकरण
- सामान्य वर्ग: 25% सब्सिडी (अधिकतम ₹50 लाख तक)
- महिला/SC/ST उद्यमी: 33.33% सब्सिडी (अधिकतम ₹60 लाख तक)
योजना का लाभ कैसे उठाएं?
- बैंक से संपर्क करें – सबसे पहले बैंक में लोन के लिए आवेदन करें।
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें – वेयरहाउस की क्षमता, लागत और स्थान का विवरण दें।
- निर्माण पूरा करें – बैंक द्वारा स्वीकृत लोन से गोडाउन का निर्माण करें।
- इंस्पेक्शन करवाएं – DMI द्वारा निरीक्षण के बाद सब्सिडी जारी की जाती है।
आय के स्रोत
- किसानों से भंडारण शुल्क लेकर आमदनी कर सकते हैं।
- वेयरहाउस रिसीप्ट (WHR) के जरिए किसानों को ऋण दिलवाकर कमीशन कमा सकते हैं।
निष्कर्ष
रूरल गोडाउन योजना किसानों और उद्यमियों के लिए एक बेहतरीन अवसर है। इससे न केवल कृषि उत्पादों का सुरक्षित भंडारण होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी बैंक या DMI कार्यालय से संपर्क करें।
नोट: सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसी दलाल या कंसलटेंट पर निर्भर न रहें, सीधे बैंक या सरकारी विभाग से संपर्क करें।