न्यूज डेस्क, रीटाइम्स इंडिया
प्रकाशित: शुक्रवार, 08 अगस्त 2025
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और चुनाव आयोग (ECI) के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। राहुल गांधी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। जवाब में, चुनाव आयोग ने उन्हें कड़ी चुनौती दी है: या तो अपने दावों के समर्थन में शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करें, या फिर ‘बेबुनियाद’ आरोप लगाने के लिए देश से माफी मांगें। आइए, इस विवाद की पूरी कहानी समझते हैं।
राहुल गांधी के आरोप: ‘1 लाख से ज्यादा वोट चोरी’
राहुल गांधी ने गुरुवार (7 अगस्त 2025) को नई दिल्ली में AICC मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनाव में 1,00,250 ‘फर्जी वोट’ डाले गए। उनके मुताबिक, इसमें 11,965 डुप्लिकेट वोटर, 40,009 फर्जी पते वाले वोटर, 10,452 एक ही पते पर कई वोटर, 4,132 अमान्य फोटो वाले वोटर और 33,692 फॉर्म-6 का दुरुपयोग करने वाले नए वोटर शामिल हैं।
राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 1 करोड़ नए वोटर अचानक सामने आए, जो लोकसभा चुनाव में नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर ‘चुनाव चुरा रहे हैं’ और यह ‘भारतीय संविधान और झंडे के खिलाफ अपराध’ है। गांधी ने बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी सवाल उठाए, इसे ‘वोट चोरी’ को छिपाने की कोशिश बताया।
चुनाव आयोग का पलटवार: ‘घिसा-पिटा स्क्रिप्ट’
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ और ‘घिसा-पिटा स्क्रिप्ट’ करार देते हुए कड़ा जवाब दिया। आयोग ने कहा कि राहुल 2018 में तत्कालीन मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा लगाए गए इसी तरह के आरोपों को दोहरा रहे हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने राहुल को पत्र लिखकर उनके दावों के समर्थन में शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा। पत्र में कहा गया, “आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची में अयोग्य मतदाताओं को शामिल करने और योग्य मतदाताओं को हटाने की बात कही। कृपया नियम 20(3)(b) के तहत संलग्न शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर वापस करें और ऐसे मतदाताओं के नाम दें, ताकि कार्रवाई शुरू की जा सके।”
आयोग ने यह भी बताया कि मतदाता सूची पारदर्शी तरीके से तैयार की जाती है, और अगस्त-सितंबर 2024 में ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची कांग्रेस के साथ साझा की गई थी, लेकिन पार्टी ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की।
राहुल का जवाब: ‘संसद में शपथ ले चुका हूँ’
राहुल गांधी ने शुक्रवार को बेंगलुरु में ‘वोट अधिकार रैली’ में चुनाव आयोग की मांग को खारिज करते हुए कहा, “मैं एक राजनेता हूँ, जो मैं जनता से कहता हूँ, वही मेरा शपथ है। मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है। आयोग मुझसे शपथ पत्र मांग रहा है, लेकिन मेरे द्वारा दिखाए गए मतदाता सूची के डेटा को गलत नहीं बता रहा। वे जानते हैं कि सच्चाई क्या है।”
राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में चुनाव आयोग की वेबसाइट्स को बंद कर दिया गया, ताकि लोग उनके डेटा पर सवाल न उठा सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘वोट चोरी’ में शामिल मतदान अधिकारियों को सत्ता बदलने पर सजा भुगतनी पड़ेगी।
आयोग की चुनौती: ‘हस्ताक्षर करें या माफी मांगें’
चुनाव आयोग ने राहुल के जवाब पर और सख्त रुख अपनाया। ECI सूत्रों ने कहा, “अगर राहुल गांधी को अपने विश्लेषण और आरोपों पर भरोसा है, तो उन्हें शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। अगर वे हस्ताक्षर नहीं करते, तो इसका मतलब है कि वे अपने ही दावों पर यकीन नहीं करते। ऐसी स्थिति में उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।”
आयोग ने यह भी खारिज किया कि राहुल द्वारा उदाहरण के तौर पर दिए गए आदित्य श्रीवास्तव और विशाल सिंह के नाम कर्नाटक और उत्तर प्रदेश दोनों जगह मतदाता सूची में थे। उत्तर प्रदेश के CEO ने कहा कि ये दावे गलत हैं और मतदाता सूची में ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं है।
2018 का कमलनाथ मामला फिर चर्चा में
चुनाव आयोग ने राहुल के आरोपों को 2018 में कमलनाथ द्वारा लगाए गए दावों से जोड़ा, जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। आयोग के मुताबिक, तब कांग्रेस ने एक निजी वेबसाइट के दस्तावेजों के आधार पर दावा किया था कि एक ही चेहरा 36 मतदाताओं के लिए इस्तेमाल हुआ। लेकिन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में साबित किया कि ये खामियां महीनों पहले ठीक की जा चुकी थीं, और कोर्ट ने कमलनाथ की याचिका खारिज कर दी थी।
आयोग ने कहा, “2025 में भी कांग्रेस वही पुराना खेल खेल रही है। वे जानते हैं कि कोर्ट में यह चाल नहीं चलेगी, इसलिए जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।”
क्या होगा आगे
राहुल गांधी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में दावा किया कि देश की 100 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर ऐसी ही ‘वोट चोरी’ हुई है। उन्होंने कर्नाटक सरकार से महादेवपुरा में कथित वोट धांधली की जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा ने राहुल के आरोपों को ‘चुनावी हार का बहाना’ बताते हुए खारिज किया है।
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों के लिए कानूनी प्रक्रिया है, जिसका पालन करना जरूरी है। आयोग ने राहुल से कहा कि वे अपने दावों को कानूनी रूप से साबित करें, वरना उनके आरोप ‘बेबुनियाद’ माने जाएंगे।
राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच यह विवाद भारतीय लोकतंत्र और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। राहुल के आरोप गंभीर हैं, लेकिन बिना ठोस सबूत और शपथ पत्र के ये दावे हवा में तैर रहे हैं। दूसरी ओर, आयोग ने अपनी प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए राहुल को कानूनी रास्ता अपनाने की चुनौती दी है। क्या राहुल शपथ पत्र देंगे या माफी मांगेंगे? यह देखना बाकी है।
