न्यूज डेस्क, रीटाइम्स इंडिया
प्रकाशित: शुक्रवार, 08 अगस्त 2025
नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने एक ऐसी खोज की है, जो अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा रही है। धरती से महज 4 लाइट ईयर दूर, हमारे सबसे नजदीकी सूरज जैसे तारे Alpha Centauri A के इर्द-गिर्द एक विशाल ग्रह की मौजूदगी का पता चला है। यह खोज न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए रोमांचक है, जो अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं का सपना देखते हैं। लेकिन क्या इस ग्रह पर जीवन संभव है? आइए, इस खोज के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Alpha Centauri A के पास नया ग्रह
नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप ने अपने अत्याधुनिक मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) का इस्तेमाल कर Alpha Centauri A के आसपास एक संभावित ग्रह को देखा। इस प्रक्रिया में एक खास तकनीक, coronagraphic मास्क, का उपयोग किया गया, जिसने तारे की तेज रोशनी को ब्लॉक कर बेहद धुंधले ग्रह की तस्वीर खींचने में मदद की। यह ग्रह अपने तारे से करीब 10,000 गुना कम चमकदार है और इसकी दूरी पृथ्वी-सूर्य की दूरी की लगभग दोगुनी, यानी 2 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट (AU), है।
यह ग्रह Alpha Centauri A के ‘हैबिटेबल जोन’ में स्थित है, वह खास क्षेत्र जहां तापमान ऐसा होता है कि पानी तरल रूप में मौजूद रह सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह एक गैस जाइंट है, जिसका मतलब है कि यह ज्यादातर गैसों (जैसे हाइड्रोजन और हीलियम) से बना है, जैसा हमारे सौरमंडल का शनि ग्रह। ऐसे में, इस ग्रह पर धरती जैसा जीवन होना मुश्किल है। फिर भी, इसकी खोज बेहद खास है, क्योंकि यह पहली बार है जब सूरज जैसे तारे के हैबिटेबल जोन में इतने करीब कोई ग्रह इमेज किया गया है।
क्यों है यह खोज इतनी खास
Alpha Centauri तारा सिस्टम, जिसमें Alpha Centauri A, Alpha Centauri B और Proxima Centauri शामिल हैं, धरती से सिर्फ 4 लाइट ईयर दूर है। यह सिस्टम पहले से ही दो ग्रहों—Proxima Centauri b और Proxima Centauri d—के लिए जाना जाता है, जो रेड ड्वार्फ तारे Proxima Centauri के इर्द-गिर्द चक्कर लगाते हैं। लेकिन नया ग्रह Alpha Centauri A के पास मिला है, जो सूरज के समान उम्र और तापमान वाला तारा है। यह इसे वैज्ञानिकों के लिए और भी दिलचस्प बनाता है।
नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी और Caltech के एक्सोप्लैनेट साइंस इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर चार्ल्स बेइचमैन ने कहा, “यह सिस्टम हमसे इतना करीब है कि यहां मिलने वाला कोई भी ग्रह हमें अपने सौरमंडल से बाहर की दुनिया को समझने का सबसे अच्छा मौका देता है। लेकिन इतने चमकीले तारों के पास ग्रह ढूंढना आसान नहीं है, और जेम्स वेब ने इसे संभव बनाया।”
Caltech के शोधकर्ता अनीकेत सांघी, जिन्होंने इस रिसर्च का नेतृत्व किया, ने बताया, “अगर यह ग्रह वाकई मौजूद है, तो यह हमारे उस ज्ञान को चुनौती देता है कि दो तारों वाले जटिल सिस्टम में ग्रह कैसे बनते और टिकते हैं। यह ग्रह शनि जितना बड़ा हो सकता है और इसका तापमान लगभग -48 डिग्री सेल्सियस है।”
क्या यह ग्रह वाकई मौजूद है
हालांकि यह खोज रोमांचक है, लेकिन वैज्ञानिक इसे पूरी तरह पक्का नहीं मान रहे। अगस्त 2024 में जेम्स वेब ने इस ग्रह की तस्वीर खींची थी, लेकिन फरवरी और अप्रैल 2025 में हुई फॉलो-अप ऑब्जर्वेशन में यह ग्रह दोबारा नजर नहीं आया। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका कारण ग्रह का तारे के बहुत करीब चले जाना हो सकता है, जिससे वह टेलीस्कोप की नजर से ओझल हो गया। उन्होंने लाखों संभावित कक्षा (ऑर्बिट) के सिमुलेशन किए, जिनमें पाया गया कि आधे मामलों में ग्रह तारे के इतने करीब था कि उसे देखना मुश्किल था।
2019 में यूरोपियन साउदर्न ऑब्जर्वेटरी के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) ने भी एक संभावित ग्रह का संकेत देखा था, जो इस नई खोज से मेल खाता है। यह संभावना को और मजबूत करता है, लेकिन पुष्टि के लिए और ऑब्जर्वेशन जरूरी हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 2027 में लॉन्च होने वाला नासा का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप इस ग्रह को फिर से देख सकता है। यह टेलीस्कोप खास तौर पर ऐसे बाइनरी सिस्टम में ग्रहों की खोज के लिए डिजाइन किया गया है।
जीवन की संभावना कितनी
चूंकि यह ग्रह एक गैस जाइंट है, इसलिए वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पर धरती जैसा जीवन संभव नहीं है। हालांकि, इसकी खोज ने एक नई संभावना को जन्म दिया है—क्या इस ग्रह के चंद्रमा (मून्स) पर जीवन हो सकता है? उदाहरण के लिए, हमारे सौरमंडल में शनि का चंद्रमा टाइटन एक घने वातावरण वाला मून है, जहां तरल मीथेन की झीलें मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि Alpha Centauri A के इस ग्रह के चंद्रमा, अगर मौजूद हैं, तो उनमें जीवन की संभावना हो सकती है, जैसा कि ‘अवतार’ फिल्म में काल्पनिक ग्रह पेंडोरा को दिखाया गया है।
इसके अलावा, इस ग्रह की मौजूदगी ग्रहों के बनने और टिकने की प्रक्रिया को समझने में मदद करेगी, खासकर ऐसे सिस्टम में जहां दो तारे एक-दूसरे के करीब चक्कर लगाते हैं। यह खोज भविष्य में पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज के लिए भी रास्ता खोलेगी।
Alpha Centauri सिस्टम का महत्व
Alpha Centauri सिस्टम तीन तारों का समूह है: Alpha Centauri A, Alpha Centauri B (दोनों सूरज जैसे तारे), और Proxima Centauri (एक रेड ड्वार्फ तारा)। यह सिस्टम धरती से 4.3 लाइट ईयर दूर है, जो इसे हमारा सबसे नजदीकी तारा सिस्टम बनाता है। Proxima Centauri के पास पहले से ही दो पक्के ग्रह (Proxima b और Proxima d) मिल चुके हैं, और एक तीसरा ग्रह (Proxima c) संदिग्ध है। लेकिन Alpha Centauri A का यह नया ग्रह सूरज जैसे तारे के इर्द-गिर्द मिला पहला ग्रह हो सकता है, जो इसे खास बनाता है।
भविष्य की योजनाएं
वैज्ञानिक इस खोज की पुष्टि के लिए और डेटा जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। जेम्स वेब टेलीस्कोप के अलावा, चिली में बन रहा एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ELT) और 2027 में लॉन्च होने वाला नैन्सी ग्रेस रोमन टेलीस्कोप इस ग्रह के बारे में और जानकारी दे सकता है। ये टेलीस्कोप इस ग्रह के आकार, द्रव्यमान, तापमान और संभावित चंद्रमाओं के बारे में और डेटा जुटाएंगे।
इसके अलावा, यह खोज अंतरतारकीय यात्रा की संभावनाओं को भी हवा दे रही है। Alpha Centauri सिस्टम हमारा सबसे नजदीकी तारा सिस्टम है, और नासा का ‘ब्रेकथ्रू स्टारशॉट’ प्रोग्राम जैसे मिशन इस सिस्टम तक छोटे अंतरिक्ष यान भेजने की योजना बना रहे हैं। अगर यह ग्रह पक्का हो जाता है, तो यह ऐसे मिशनों का मुख्य लक्ष्य बन सकता है।
Alpha Centauri A के पास मिला यह संभावित ग्रह अंतरिक्ष विज्ञान में एक बड़ी छलांग है। भले ही यह गैस जाइंट जीवन के लिए उपयुक्त न हो, लेकिन इसकी खोज हमें अपने ब्रह्मांडीय पड़ोस को समझने के करीब ले जा रही है। क्या इसके चंद्रमा जीवन की मेजबानी कर सकते हैं? क्या यह खोज हमें पृथ्वी जैसे ग्रहों की ओर ले जाएगी? इन सवालों के जवाब भविष्य में मिलेंगे, लेकिन तब तक यह खोज निश्चित रूप से वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों को उत्साहित रखेगी।
