22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। हमले के बाद से भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने आतंकियों की तलाश में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन महादेव, जो श्रीनगर के लिदवास क्षेत्र में चलाया गया, इसी तलाश का हिस्सा था। इस ऑपरेशन में तीन आतंकियों को मार गिराया गया। उनकी पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है।
ऑपरेशन महादेव का संचालन और सफलता
ऑपरेशन महादेव को भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर अंजाम दिया। यह ऑपरेशन श्रीनगर के दाचिगम नेशनल पार्क के पास लिदवास क्षेत्र में चलाया गया, जो घने जंगलों और महादेव पर्वत के आसपास का इलाका है। खुफिया जानकारी के आधार पर सेना ने चुपके से तलाशी अभियान शुरू किया। इसके बाद तीन आतंकियों को घेर लिया और त्वरित कार्रवाई में उन्हें मार गिराया।
पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड
सूत्रों के अनुसार, मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर शामिल था। वह 2023 से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था और पहलगाम हमले के अलावा, अक्टूबर 2023 में सोनमर्ग टनल हमले और बारामूला में सुरक्षाकर्मियों की हत्या में भी शामिल था। अन्य दो आतंकियों के पहलगाम हमले से संबंध होने की संभावना है।
पहलगाम हमले की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल को पहलगाम के बैसारन वैली में हुए आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा की सहयोगी संगठन ने जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी। हमले के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने आतंकियों को भोजन, आश्रय और लॉजिस्टिकल सपोर्ट प्रदान किया था। जांच में पता चला कि हमले की साजिश में विदेशी आतंकियों को शामिल किया गया ताकि गोपनीयता बनी रहे।
ऑपरेशन सिंदूर और आतंकियों की तलाश
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। हालांकि, इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों को पकड़ने की कोशिशें जारी थीं। ऑपरेशन महादेव उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों के अनुसार, सेना को दो बार आतंकियों के करीब पहुंचने में सफलता मिली थी, लेकिन वे बच निकले। इस बार खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी ने आतंकियों को घेरने में अहम भूमिका निभाई।
आतंकियों की रणनीति और ओवरग्राउंड वर्कर्स
आतंकी जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों में छिपते हैं और स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) की मदद लेते हैं। ये ओजीडब्ल्यू भोजन, आश्रय और अन्य लॉजिस्टिकल सपोर्ट प्रदान करते हैं। जांच में पकड़े गए ओजीडब्ल्यू ने दावा किया कि उन्हें हमले की पूरी योजना की जानकारी नहीं थी। एनआईए ने कई लोगों से पूछताछ की और आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि की, जिससे ऑपरेशन महादेव को गति मिली।
हथियारों और उपकरणों की बरामदगी
ऑपरेशन महादेव में आतंकियों के ठिकाने से राइफल ग्रेनेड, एके-47 राइफल्स और अन्य सामग्री बरामद की गई। ये हथियार और उपकरण इस बात की पुष्टि करते हैं कि आतंकी किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे। ठिकाना पूरी तरह सुसज्जित था, जिसमें खाना, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान मौजूद था।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और प्रभाव
पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। पर्यटन स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है, और दूरदराज के क्षेत्रों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। फिर भी, कश्मीर में पर्यटन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है, और निवेश भी बढ़ रहा है। ऑपरेशन महादेव जैसे अभियानों से आतंकियों के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति स्पष्ट होती है।
ऑपरेशन महादेव आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक बड़ी जीत है, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी हैं। कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र में कई आतंकी सक्रिय हैं। आतंकियों को पकड़ने और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एनआईए और सुरक्षा बल लगातार काम कर रहे हैं। आतंकियों का खात्मा आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है ताकि ओजीडब्ल्यू जैसे नेटवर्क कमजोर हों।
