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टीसीएस 12,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी करेगी, एआई और ऑटोमेशन के लिए तैयार हो रही कंपनी

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Last updated: July 28, 2025 5:31 pm
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TCS will lay off more than 12,000 employees, the company is getting ready for AI and automation
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भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), वित्तीय वर्ष 2025 में अपने कर्मचारियों की संख्या में लगभग 2 प्रतिशत की कमी करने की योजना बना रही है। इस कदम से 12,000 से अधिक कर्मचारी प्रभावित होंगे, जिनमें मुख्य रूप से मध्यम और वरिष्ठ स्तर के पेशेवर शामिल हैं। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में इस रणनीति की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी लैंडस्केप में TCS को “अधिक एजाइल और भविष्य के अनुकूल” बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।यह कदम कंपनी को तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के युग में अधिक चुस्त और भविष्य के अनुकूल बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

लेऑफ्स का कारण: एआई और ऑटोमेशन का बढ़ता प्रभाव

टीसीएस के इस बड़े फैसले के पीछे सबसे प्रमुख कारण है कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और ऑटोमेशन का तेजी से बढ़ता प्रभाव। कंपनी अपने संचालन, सर्विस डिलीवरी और आंतरिक प्रक्रियाओं में एआई और मशीन लर्निंग को आक्रामक तरीके से लागू कर रही है। पहले जो काम मैन्युअल रूप से किए जाते थे, जैसे सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, रिपोर्ट जनरेशन और प्रोजेक्ट ट्रैकिंग, अब इन्हें एआई-आधारित टूल्स और प्लेटफॉर्म्स द्वारा आसानी से किया जा सकता है। इस बदलाव ने मिडिल और सीनियर लेवल के उन कर्मचारियों की मांग को कम कर दिया है, जिनके काम अब ऑटोमेशन से हो रहे हैं। अगर कर्मचारी अपने स्किल्स को अपग्रेड नहीं करते, तो उनकी प्रासंगिकता कम होती जा रही है, जिससे उनकी नौकरियां खतरे में पड़ रही हैं।

बदलता बिजनेस मॉडल: पिरामिड से डायमंड स्ट्रक्चर

पहले टीसीएस एक पिरामिड मॉडल पर काम करती थी, जिसमें फ्रेशर्स की संख्या सबसे ज्यादा होती थी, मिडिल मैनेजर्स की संख्या कम और टॉप मैनेजमेंट में बहुत कम लोग होते थे। लेकिन अब कंपनी डायमंड मॉडल की ओर बढ़ रही है। इस मॉडल में बॉटम और टॉप लेवल पर कर्मचारियों की संख्या कम होगी, जबकि मिडिल लेवल पर स्किल्ड प्रोफेशनल्स की संख्या ज्यादा होगी, जो एआई और ऑटोमेशन टूल्स के साथ काम करेंगे। यह बदलाव फ्रेशर्स और सीनियर मैनेजमेंट, दोनों के लिए नौकरी के अवसरों को प्रभावित कर रहा है। पहले फ्रेशर्स को आईआईटी और अन्य संस्थानों से भर्ती कर बड़ी संख्या में नौकरियां दी जाती थीं, लेकिन अब यह मॉडल बदल रहा है।

ग्लोबल डिमांड में कमी

टीसीएस और अन्य भारतीय आईटी कंपनियों का अधिकांश राजस्व यूएस और यूरोप जैसे पश्चिमी देशों से आता है। लेकिन इन देशों में आर्थिक मंदी का डर, उच्च ब्याज दरें और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण नए प्रोजेक्ट्स की मांग कम हो रही है। बैंकिंग, बीमा, रिटेल और टेलीकॉम जैसे सेक्टर्स में मंदी का असर सीधे टीसीएस और अन्य आईटी कंपनियों पर पड़ रहा है। कम नए प्रोजेक्ट्स का मतलब है कम निवेश और कम भर्तियां, जिसके चलते नौकरियों में कटौती हो रही है।

कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन का दबाव

हर कंपनी की तरह टीसीएस भी अपने प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाने और लागत को कम करने की कोशिश कर रही है। मिडिल और सीनियर मैनेजमेंट में उच्च वेतन वाले कर्मचारियों की संख्या कम करके और कैंपस हायरिंग पर जोर देकर कंपनी लागत को नियंत्रित कर रही है। नए पास-आउट स्टूडेंट्स, खासकर आईआईटी और अन्य संस्थानों से, कम वेतन पर भर्ती किए जा सकते हैं और वे एआई और क्लाउड जैसे नए स्किल्स में प्रशिक्षित होते हैं। यह रणनीति टीसीएस को लागत कम करने के साथ-साथ युवा और प्रशिक्षित टैलेंट को शामिल करने में मदद करती है।

सबसे ज्यादा प्रभावित कौन?

इस कटौती का सबसे ज्यादा असर मिडिल और सीनियर मैनेजमेंट पर पड़ेगा, जैसे प्रोजेक्ट लीड्स, डिलीवरी मैनेजर्स और क्लाइंट एंगेजमेंट हेड्स। इसके अलावा, वे कर्मचारी जो पिछले 3-6 महीनों से किसी सक्रिय प्रोजेक्ट में शामिल नहीं हैं या जिनके स्किल्स (जैसे क्लाउड, एआई, साइबर सिक्योरिटी) पुराने हो चुके हैं, उनकी नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं। यह प्रभाव भारत के साथ-साथ यूएस, यूरोप और अन्य वैश्विक स्थानों पर भी देखने को मिलेगा।

टीसीएस की सहायता पहल

टीसीएस ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है। कंपनी आउटप्लेसमेंट सपोर्ट प्रदान करेगी, यानी कर्मचारियों को अपनी पार्टनर फर्मों में नौकरी दिलाने में मदद करेगी। इसके अलावा, इमोशनल और करियर काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। टीसीएस यह भी कोशिश कर रही है कि अगर कर्मचारी नए स्किल्स जैसे क्लाउड, एआई या ब्लॉकचेन में खुद को अपग्रेड करते हैं, तो उन्हें दोबारा मौका दिया जा सकता है। हालांकि, अभी तक कोई वित्तीय पैकेज या अन्य डिटेल्स की घोषणा नहीं की गई है।

टीसीएस का हालिया प्रदर्शन

पिछले कुछ वर्षों में टीसीएस का प्रदर्शन देखें तो राजस्व वृद्धि और नेट प्रॉफिट मार्जिन में कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में राजस्व वृद्धि 17.6% थी, जो 2023-24 में घटकर 10.3% हो गई। इस साल यह अनुमानित रूप से 7% के आसपास रहने की उम्मीद है। नेट प्रॉफिट मार्जिन भी लगातार कम हो रहा है। पिछले साल से ही टीसीएस ने नौकरियों में कटौती शुरू कर दी थी, और अब 2% की यह कटौती उसी दिशा में एक और कदम है। नई भर्तियां भी बहुत कम हो रही हैं, और पहले गई नौकरियों को अभी तक पूरी तरह से बदला नहीं गया है।

आईटी सेक्टर में व्यापक रुझान

टीसीएस अकेली नहीं है जो इस तरह की रणनीति अपना रही है। अन्य प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियां भी री-स्ट्रक्चरिंग कर रही हैं। इन्फोसिस ने हाल ही में 10,000 कर्मचारियों को निकाला, विप्रो ने 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की, और एचसीएल ने भर्तियों को धीमा कर दिया है। कॉग्निजेंट ने भी 3,500 से ज्यादा कर्मचारियों को हटाया है। ऑटोमेशन, कम मांग और लागत कटौती के कारण पूरे सेक्टर में यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

भविष्य का परिदृश्य

इस स्थिति का सकारात्मक पहलू यह है कि टीसीएस कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा कुशलता से काम करने की कोशिश कर रही है। अगर आपके पास एआई, क्लाउड या साइबर सिक्योरिटी जैसे स्किल्स हैं, तो आपके लिए अवसर बने रहेंगे। लेकिन नकारात्मक पक्ष यह है कि कर्मचारियों का मनोबल कम हो सकता है, और भारत का ग्लोबल आईटी हब होने का टैग चुनौती का सामना कर सकता है। इसके अलावा, ब्रेन ड्रेन की संभावना बढ़ सकती है, जहां लोग स्टार्टअप्स या फ्रीलांसिंग की ओर रुख कर सकते हैं।

व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

यह कटौती भारत के सर्विस सेक्टर, खासकर आईटी निर्यात, में मंदी का संकेत देती है। बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई जैसे शहरों में शहरी उपभोग में कमी आ सकती है। स्ट्रक्चरल बेरोजगारी बढ़ेगी, क्योंकि तकनीकी बदलाव के कारण नौकरियां कम हो रही हैं। मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स (35-45 वर्ष) के लिए री-स्किलिंग एक बड़ी चुनौती होगी। रियल एस्टेट सेक्टर पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि कम भर्तियों के कारण ऑफिस स्पेस की मांग घटेगी। साथ ही, मेंटल हेल्थ और जॉब इनसिक्योरिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, री-स्किलिंग प्रोग्राम्स और नए स्किल्स वाली नौकरियों के लिए अवसर भी बढ़ रहे हैं।

टीसीएस की इस कटौती से पता चलता है कि आईटी सेक्टर में बड़े बदलाव हो रहे हैं। एआई, ऑटोमेशन और ग्लोबल डिमांड में कमी जैसे कारक इस बदलाव को बढ़ावा दे रहे हैं। कर्मचारियों के लिए यह समय अपने स्किल्स को अपग्रेड करने और नए अवसरों की तलाश करने का है। सरकार और कंपनियों को भी री-स्किलिंग और नए जॉब कैटेगरीज को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि भारत का आईटी सेक्टर अपनी वैश्विक पहचान बनाए रख सके।

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