इंदौर, जिसे भारत का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव प्राप्त है, अब एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। यह शहर देश का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां ‘डिजी पिन’ (डिजिटल पता प्रणाली) लागू किया जा रहा है। इसके तहत हर घर के बाहर एक यूनिक क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही उस संपत्ति से जुड़ी सभी जानकारियां मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएंगी।
क्या है डिजी पिन सिस्टम
डिजी पिन एक क्यूआर कोड आधारित डिजिटल एड्रेस सिस्टम है, जिसमें प्रत्येक घर को एक यूनिक डिजिटल पता दिया जाएगा। इस कोड को स्कैन करने पर संपत्ति का नंबर, मालिक का विवरण, ब्लॉक और आसपास के इलाके की जानकारी, सरकारी सेवाओं का लिंक, टैक्स भुगतान की स्थिति और स्वच्छता रेटिंग जैसी डिटेल्स स्क्रीन पर दिखाई देंगी। यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के डिजीगवर्नेंस प्लेटफॉर्म से जुड़ा है और इंदौर इसे लागू करने वाला पहला शहर बना है।
इसके फायदे होंगे
- पारदर्शिता बढ़ेगी: संपत्ति कर, पानी के बिल और अन्य सरकारी सेवाओं की जानकारी सीधे स्कैन करके देखी जा सकेगी।
- सुविधाजनक भुगतान: नागरिक क्यूआर कोड के माध्यम से ही प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य शुल्क ऑनलाइन जमा कर सकेंगे।
- आपातकालीन सहायता: मेडिकल इमरजेंसी या आपदा के समय लोकेशन आसानी से ट्रेस की जा सकेगी।
- ई-कॉमर्स और डिलीवरी में आसानी: डाक या ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी में सटीक पता मिलने से समय बचेगा।
- शिकायत दर्ज करने की सुविधा: सफाई, सड़क मरम्मत जैसी समस्याओं की शिकायत सीधे सिस्टम में दर्ज की जा सकेगी।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम
इंदौर नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है। सबसे पहले मेयर के घर पर इस क्यूआर कोड को लगाया गया है। धीरे-धीरे शहर के सभी वार्डों में इसे लागू किया जाएगा। प्रत्येक घर के लिए एक जीपीएस-आधारित यूनिक डिजिटल एड्रेस कोड (DAC) जेनरेट किया जाएगा, जिसमें संपत्ति का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड शामिल होगा।
भविष्य की योजना
अगर यह प्रोजेक्ट इंदौर में सफल रहा, तो इसे देशभर के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है। इससे न केवल नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता आएगी, बल्कि शहरी प्रशासन को भी डिजिटल तरीके से काम करने में मदद मिलेगी।
इंदौर का यह कदम भारत को स्मार्ट और डिजिटल शहरों की ओर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रणाली नागरिकों के लिए जीवन को आसान बनाएगी और सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं कुशल बनाएगी। अब देखना यह है कि यह नवाचार कितना प्रभावी साबित होता है और क्या अन्य शहर भी इसी राह पर चलते हैं।