भारत अपने पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) के साथ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महज 20 किमी दूर नवा रायपुर में बनने वाले इस प्रोजेक्ट में 1000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जो देश को AI वर्कफोर्स कैपिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:
- डेवलपर: इंदौर स्थित कंपनी रैक बैंक डेटा सेंटर्स प्राइवेट लिमिटेड
- क्षेत्रफल: 6 एकड़ में फैला हुआ
- सुविधाएं:
- 4 हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर्स
- 1.5 लाख वर्ग फुट का एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर
- GPU-रेडी हाई परफॉर्मेंस सर्वर सिस्टम
क्यों AI को ‘नई बिजली‘ कहा जा रहा है
कोर्सेरा के सह-संस्थापक एंड्रयू एनजी के अनुसार, AI में वही क्षमता है जो 19वीं-20वीं सदी में बिजली ने दिखाई थी। PwC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक AI ग्लोबल इकोनॉमी में 15 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देगा। भारत इसका लाभ उठाने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर चुका है।
रायपुर को क्यों चुना गया
- स्ट्रैटेजिक लोकेशन: देश के जियोग्राफिकल सेंटर में स्थित, जो मेजर सिटीज से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
- नवा रायपुर: देश की पहली ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, जो पूरी तरह डेट-फ्री है।
- कम लागत: मेट्रो शहरों की तुलना में अधिक किफायती इंफ्रास्ट्रक्चर।
- खनिज संपदा: छत्तीसगढ़ के मिनरल रिच रीजन के नजदीक होने से एनर्जी और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट।
युवाओं के लिए अवसर:
- स्किल डेवलपमेंट: AI/ML में ट्रेनिंग और अपस्किलिंग के कार्यक्रम।
- रोजगार: हजारों हाई-टेक जॉब्स का सृजन, खासकर डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग में।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर्स।
छत्तीसगढ़ के लिए गेम-चेंजर:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राज्य को नेशनल इनोवेशन मैप पर लाएगा। AI के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं, कृषि, शिक्षा और शासन प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।
इस प्रोजेक्ट के सफल होने से न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि झारखंड और बिहार जैसे राज्यों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा। AI SEZ भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।