चीन और नेपाल की सीमा पर हाल ही में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी, जो तिब्बत से नेपाल की ओर बहती है, में अचानक आए उफान ने दोनों देशों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मैत्री पुल (फ्रेंडशिप ब्रिज) को पूरी तरह नष्ट कर दिया। यह पुल रसुवागढ़ी बॉर्डर पर स्थित था, जो नेपाल और चीन के बीच व्यापार का एकमात्र सक्रिय नाका था। इस पुल के जरिए रोजाना लाखों रुपये का आयात-निर्यात होता था, लेकिन अब यह व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। बाढ़ ने न केवल पुल को बहाया, बल्कि कई घरों, ट्रकों और कस्टम यार्ड में खड़े कार्गो कंटेनरों को भी नष्ट कर दिया। नेपाल के रसुवा जिले में यह आपदा मंगलवार तड़के आई, जिसके बाद क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति बन गई है।
मानवीय क्षति और लापता लोग
बाढ़ के कारण अब तक कम से कम नौ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से कुछ के शव रसुवा से कई मील दूर धादिंग और चितवन जिलों में बरामद किए गए। इसके अलावा, 20 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें छह चीनी निर्माण श्रमिक और कुछ नेपाली नागरिक शामिल हैं। नेपाल पुलिस और सेना ने तलाशी और बचाव अभियान शुरू किया है, जिसमें हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। अब तक नौ लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन बाढ़ के पानी और भूस्खलन के खतरे के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं। रसुवा के जिला प्रशासन ने आशंका जताई है कि मानवीय क्षति और बढ़ सकती है।
नेपाल में कोसी नदी का तांडव
नेपाल में कोसी नदी के उफान ने भी भारी तबाही मचाई है। सितंबर 2024 में हुई भारी बारिश के बाद कोसी बैराज से रिकॉर्ड मात्रा में पानी छोड़ा गया, जिसने बिहार और नेपाल के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया। बिहार में 13 जिलों के 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, जबकि नेपाल में 44 जिले बाढ़ की चपेट में आए। काठमांडू में 50 साल का बारिश का रिकॉर्ड टूटा, जिसके कारण सैकड़ों घर, स्कूल और अस्पताल क्षतिग्रस्त हो गए। कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने सड़कों और पुलों को नष्ट कर दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। बिहार के सुपौल और अन्य जिलों में तटबंध टूटने से गांव टापू बन गए, और लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हो गए।
चीन में बाढ़ की स्थिति
चीन के कई प्रांत भी बाढ़ की चपेट में हैं। विशेष रूप से सिचुआन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत में 8.6 इंच की भारी बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। शंगजी इलाके में सड़कें, गलियां और घर पानी में डूब गए। गाड़ियां तहस-नहस हो गईं, और सड़कें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। चीनी स्टेट मीडिया सीसीटीवी और रॉयटर्स की तस्वीरों ने इस तबाही की भयावहता को उजागर किया है। एक स्थान पर 500 लोगों को रेस्क्यू करना पड़ा, और आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का कहर जारी है। हर साल बाढ़ चीन में भारी नुकसान पहुंचाती है, और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, बाढ़ के सामने चीनी सरकार भी असहाय नजर आती है।
बचाव और राहत कार्य
नेपाल और चीन दोनों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। नेपाल में सेना और पुलिस ने हेलीकॉप्टरों के जरिए फंसे हुए लोगों को निकालने का काम शुरू किया है। रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना में फंसे 23 मजदूरों, जिनमें एक चीनी नागरिक शामिल है, को सुरक्षित निकाला गया है। हालांकि, जलविद्युत संयंत्र को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है। नेपाल सरकार ने चीन से आपदा प्रबंधन में सहयोग मांगा है। दूसरी ओर, चीन में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने में जुटी हैं। भूस्खलन और सड़कों के धंसने से कई क्षेत्रों में राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
भूस्खलन का खतरा और जनजीवन पर प्रभाव
नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। रसुवा और अन्य पहाड़ी इलाकों में सड़कें और राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं। स्याफ्रूबेसी-रसुवागढ़ी हाईवे पर भूस्खलन के कारण परिवहन व्यवस्था ठप है। काठमांडू और अन्य शहरों में सड़कों पर पानी भर गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बिहार में भी कोसी और गंडक नदियों के उफान ने सैकड़ों गांवों को जलमग्न कर दिया है, और लोग ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। नेपाल और बिहार में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, लेकिन भारी बारिश और तटबंधों के टूटने से स्थिति और गंभीर हो रही है।
चीन और नेपाल में बाढ़ ने न केवल बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन को भी प्रभावित किया है। फ्रेंडशिप ब्रिज का बह जाना और कोसी नदी का तांडव इस आपदा की भयावहता को दर्शाता है। दोनों देशों की सरकारें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इस आपदा ने एक बार फिर यह साबित किया है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने मानव निर्मित ढांचे कितने कमजोर हो सकते हैं।
