लोकसभा में मंगलवार को 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश होने के बाद हंगामा मच गया। यह विधेयक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए नया नियम लाता है, जिसमें 30 दिन तक जेल में रहने पर उनका पद स्वतः खत्म हो जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्ती का प्रतीक बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की साजिश करार दिया। आइए, इस विधेयक की पूरी डिटेल समझते हैं।
विधेयक पेश, विपक्ष का हंगामा
नई दिल्ली में जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को लोकसभा में भारी हंगामे के बीच गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। उन्होंने इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव रखा। शाह ने कहा कि यह विधेयक भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लेकिन विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, मनीष तिवारी और आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने विधेयक को संघीय ढांचे पर हमला बताया। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बना सकती है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि अमित शाह ने गुजरात के गृहमंत्री रहते हुए जेल जाने के बावजूद इस्तीफा नहीं दिया था। जवाब में शाह ने सफाई दी कि उन्हें कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार ने झूठे केस में फंसाया था। उन्होंने कहा, “मैंने गिरफ्तारी से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और कोर्ट से पूरी तरह बरी होने तक कोई संवैधानिक पद स्वीकार नहीं किया।”
वेल में सांसदों ने फाड़े कागज
विपक्षी सांसदों ने विधेयक की प्रतियां फाड़कर अमित शाह की ओर फेंक दीं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद शुरू से ही आक्रोश में दिखे और वेल में आकर हंगामा करने लगे। हालात बिगड़ते देख लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोबारा शुरू होने पर मार्शल को सदन में बुलाया गया। इस बार शाह तीसरी पंक्ति में बैठे, ताकि विपक्षी सांसदों द्वारा फेंके गए कागज उन तक न पहुंचें।
संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग
अमित शाह ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजने की मांग की, जिसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल होंगे। समिति को शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट देनी होगी। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के समय 39वां संविधान संशोधन लाकर प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा, “कांग्रेस की संस्कृति रही है कि प्रधानमंत्री को कानून से बाहर रखा जाए, लेकिन बीजेपी सभी को कानून के दायरे में ला रही है।”
विधेयक में क्या है खास?
- अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे इस्तीफा देना होगा।
- इस्तीफा न देने पर 31वें दिन उसका पद स्वतः रिक्त हो जाएगा।
- यह नियम उन मामलों में लागू होगा, जहां कम से कम 5 साल की सजा का प्रावधान हो।
- जमानत मिलने पर व्यक्ति दोबारा मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन सकता है।
- इस नियम को पूरे देश में लागू करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम 1963 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 में भी संशोधन किए जाएंगे।
अमित शाह का विपक्ष पर पलटवार
अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को कानून के दायरे में लाने के लिए यह संशोधन पेश किया, लेकिन कांग्रेस और विपक्ष ने इसका विरोध किया। वे जेल से सरकार चलाना चाहते हैं और कुर्सी का मोह नहीं छोड़ रहे।” शाह ने इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौरान लाए गए 39वें संविधान संशोधन का जिक्र करते हुए कांग्रेस को घेरा।
क्यों हो रहा है इतना विवाद
विपक्ष का मानना है कि यह विधेयक केंद्र सरकार को विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का हथियार दे सकता है। दूसरी ओर, सरकार इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम बता रही है। विधेयक अब संयुक्त संसदीय समिति के पास जाएगा, जहां इस पर और चर्चा होगी।
