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दृष्टि IAS कोचिंग संस्थान के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति मानहानि मामला में अजमेर कोर्ट ने जारी किया समन

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Last updated: July 13, 2025 3:07 pm
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Ajmer court issued summons in defamation case against Vikas Divyakirti, founder of Drishti IAS coaching institute
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दृष्टि IAS कोचिंग संस्थान के संस्थापक और यूपीएससी की तैयारी के लिए प्रसिद्ध शिक्षक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। राजस्थान के अजमेर की न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 की अदालत ने उनके खिलाफ मानहानि के एक मामले में समन जारी किया है। कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 356(1), (2), (3), (4) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66A(b) के तहत आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। उन्हें 22 जुलाई 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा गया है। यह विवाद उनके एक यूट्यूब वीडियो “IAS vs Judge: कौन ज्यादा ताकतवर?” को लेकर है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर न्यायपालिका और वकीलों के खिलाफ अपमानजनक और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां कीं।

शिकायत का आधार: कमलेश मंडोलिया की याचिका

अजमेर के वकील कमलेश मंडोलिया ने 2 जून 2025 को विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ मानहानि का परिवाद (याचिका) दायर किया। मंडोलिया का दावा है कि 26 मई 2025 को उन्होंने यूट्यूब पर एक वीडियो देखा, जिसका शीर्षक था “IAS vs Judge: कौन ज्यादा ताकतवर? Best Guidance by Vikas Divyakirti Sir Hindi Motivation”। इस वीडियो में विकास दिव्यकीर्ति ने कथित तौर पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जो न्यायपालिका, जजों, और वकीलों के लिए अपमानजनक थीं। मंडोलिया ने इसे अपनी और अपने सहयोगी वकीलों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

मंडोलिया ने 27 मई को गगल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद, 28 मई को उन्होंने गगल पुलिस थाने और अजमेर पुलिस अधीक्षक को डाक के जरिए तहरीर भेजी। जब तीन दिन तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मंडोलिया ने 2 जून को अजमेर की अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश और न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन चंदेल की अदालत में परिवाद दायर किया।

वीडियो में क्या था विवादास्पद?

कमलेश मंडोलिया और उनके सहयोगी वकील अशोक सिंह रावत ने याचिका में वीडियो की कुछ खास टिप्पणियों का हवाला दिया, जिन्हें वे आपत्तिजनक मानते हैं:

  1. “जिला जज की वैकेंसी दो-तीन साल में एक आती है और इसके लिए 500 गिद्ध तैयार होते हैं”: शिकायतकर्ताओं ने इसे वकीलों की तुलना गिद्धों से करने वाला अपमानजनक बयान बताया।
  2. “वकील जुगाड़ से हाई कोर्ट के जज बनते हैं”: इस बयान को कोर्ट ने न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया पर अनुचित टिप्पणी माना।
  3. “जिला जज बड़ा होता नहीं है”: याचिका में दावा किया गया कि विकास ने जिला जजों की शक्तियों को कमतर दिखाया और कहा कि वे समन भेजने की शक्ति होने के बावजूद ऐसा नहीं करते।
  4. “जिला जज को जिला एसपी डांट देता है”: शिकायत में कहा गया कि वीडियो में जिला जजों को अकेले में डांट खाने वाला दिखाया गया।
  5. “गंभीर अपराधियों की जमानत में एसपी का दबाव”: याचिका में आरोप है कि विकास ने यह दिखाने की कोशिश की कि जिला जज गंभीर अपराधियों की जमानत पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) के दबाव में फैसला लेते हैं।
  6. “हाई कोर्ट दोनों को टांग देता है”: यह बयान हाई कोर्ट की कार्यशैली पर व्यंग्य के रूप में लिया गया, जिसे कोर्ट ने अपमानजनक माना।

मंडोलिया ने दावा किया कि इन बयानों ने न केवल उनकी और अन्य वकीलों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता, और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने इसे तुच्छ प्रसिद्धि और सोशल मीडिया रेटिंग हासिल करने का जानबूझकर किया गया प्रयास बताया।

कोर्ट का रुख: प्रथम दृष्टया अपमानजनक भाषा

न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन चंदेल की अदालत ने 40 पेज के अपने आदेश में मंडोलिया की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार किया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि विकास दिव्यकीर्ति ने “दुर्भावनापूर्ण इरादे” से न्यायपालिका के खिलाफ “अपमानजनक और व्यंग्यात्मक भाषा” का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने कहा:

  1. वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा “अपमानजनक, आपत्तिजनक और नीचा दिखाने वाली” थी।
  2. इससे न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता, और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
  3. यह आम जनता में न्यायपालिका के प्रति भ्रम, अविश्वास, और संदेह पैदा कर सकता है।
  4. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार (संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a)) सीमित है और इसका इस्तेमाल न्यायपालिका का अपमान करने के लिए नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(1), (2), (3), (4) (मानहानि) और IT अधिनियम की धारा 66A(b) के तहत आपराधिक रजिस्टर में दर्ज करने का आदेश दिया। विकास दिव्यकीर्ति को 22 जुलाई 2025 को सशरीर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है।

विकास दिव्यकीर्ति का बचाव

विकास दिव्यकीर्ति ने अपने वकीलों के माध्यम से कोर्ट में अपना पक्ष रखा। उनके बचाव में दिए गए प्रमुख तर्क इस प्रकार हैं:

  1. वीडियो से कोई संबंध नहीं: विकास ने दावा किया कि विवादित वीडियो यूट्यूब चैनल “UPSC IAS Guru” पर अपलोड किया गया, जिससे उनका कोई संबंध या नियंत्रण नहीं है। यह वीडियो उनकी सहमति के बिना किसी तीसरे पक्ष द्वारा संपादित और अपलोड किया गया प्रतीत होता है।
  2. संपादित वीडियो: वीडियो को एडिट किया गया है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
  3. कोई व्यक्तिगत उल्लेख नहीं: वीडियो में किसी विशिष्ट व्यक्ति, जिसमें शिकायतकर्ता कमलेश मंडोलिया शामिल हैं, का नाम नहीं लिया गया। इसलिए, मंडोलिया को “पीड़ित व्यक्ति” के रूप में मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं है।
  4. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: विकास ने तर्क दिया कि उनके बयान सार्वजनिक प्रशासन और न्यायिक नियुक्तियों पर सामान्य टिप्पणियां थीं, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती हैं। ये टिप्पणियां अकादमिक और सामान्य अवलोकन थीं, जिनमें कोई दुर्भावना या अपराधिक इरादा नहीं था।
  5. बदनाम करने की साजिश: विकास ने शिकायत को “कैलकुलेटेड अटेम्प्ट” करार दिया, जिसका मकसद उन्हें व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए बदनाम करना और प्रचार हासिल करना है।

विवादित वीडियो का विवरण

विवाद का केंद्र बिंदु “IAS vs Judge: कौन ज्यादा ताकतवर?” नामक वीडियो है, जो यूट्यूब चैनल “UPSC IAS Guru” (3.38 लाख सब्सक्राइबर्स) पर 13 अप्रैल 2025 को अपलोड किया गया था। यह वीडियो अब अनलिस्टेड है, यानी केवल लिंक के जरिए ही इसे देखा जा सकता है। वीडियो में विकास दिव्यकीर्ति ने IAS और जजों की शक्तियों की तुलना की और कुछ उदाहरण दिए, जैसे:

  • “हाई कोर्ट बहुत ताकतवर होता है। वरना दोनों को टांग देता है। अगर सीएम कोर्ट की अवमानना करे, तो वह भी नप सकता है।”
  • जिला जजों, कॉलेजियम सिस्टम, और न्यायिक नियुक्तियों पर टिप्पणियां, जिन्हें शिकायतकर्ताओं ने अपमानजनक माना।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन टिप्पणियों ने न केवल जजों और वकीलों का अपमान किया, बल्कि न्यायपालिका में जनता का भरोसा भी कमजोर किया। कोर्ट ने भी माना कि वीडियो की भाषा “न्यायपालिका का उपहास” करती है और इसकी विश्वसनीयता को धूमिल करती है।

कोर्ट की कार्रवाई और अगली सुनवाई

6 जून 2025 को कोर्ट ने विकास दिव्यकीर्ति को शो-कॉज नोटिस जारी किया, जो 9 जून को उन्हें प्राप्त हुआ। दोनों पक्षों की बहस 8 जुलाई 2025 को पूरी हुई, जिसके बाद कोर्ट ने 10 जुलाई को 40 पेज का आदेश पारित किया। आदेश में याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया और अन्य आपराधिक धाराओं (जैसे BNS की धारा 353(2)) को खारिज कर दिया गया, क्योंकि उनके लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। कोर्ट ने विकास को 22 जुलाई 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया, और गवाहों की सूची प्रस्तुत करने के लिए शिकायतकर्ता को निर्देश दिया।

सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया

यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। X पर कुछ यूजर्स ने विकास की आलोचना की, उन्हें “लिबरल लॉबी का पोस्टर बॉय” कहकर उनकी मंशा पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताया और विकास का समर्थन किया। इस विवाद ने सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करने की जिम्मेदारी और शिक्षकों की सार्वजनिक टिप्पणियों पर सवाल उठाए हैं।

क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है?

यह मामला न केवल विकास दिव्यकीर्ति और दृष्टि IAS के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करने की जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर भी बहस छेड़ता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है और इसका इस्तेमाल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, विकास का दावा है कि उनके बयान सामान्य और अकादमिक थे, जिनमें कोई दुर्भावना नहीं थी।

कोर्ट का फैसला बाकी

विकास दिव्यकीर्ति का यह मामला अभी कोर्ट में लंबित है, और 22 जुलाई 2025 को होने वाली अगली सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट होगी। क्या यह वीडियो वाकई न्यायपालिका की छवि को ठेस पहुंचाता है, या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है? इस सवाल का जवाब कोर्ट के अंतिम फैसले से मिलेगा। फिलहाल, यह मामला शिक्षकों, कोचिंग संस्थानों, और सोशल मीडिया प्रभावितों के लिए एक सबक है कि सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियां गंभीर कानूनी परिणाम भुगत सकती हैं। आप इस मामले के बारे में क्या सोचते हैं? क्या विकास की टिप्पणियां अपमानजनक थीं, या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।

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