भारतीय सेना ने 13 जुलाई 2024 को म्यांमार-भारत सीमा के पास छिपे आतंकी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक की। यह ऑपरेशन उल्फा-इंडिपेंडेंट (ULFA-I) और एनएससीएन-खापलांग (NSCN-K) जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ किया गया, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा फैलाने के लिए म्यांमार में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं।
ऑपरेशन की मुख्य बातें
✅ लक्ष्य: उल्फा-इंडिपेंडेंट और एनएससीएन-खापलांग के कैंप्स।
✅ तकनीक: 100+ ड्रोन्स का इस्तेमाल, जिसमें इजरायली “हीरोन” और भारतीय कॉम्बैट ड्रोन शामिल।
✅ नुकसान:
- उल्फा के 3 सीनियर लीडर्स ढेर।
- एनएससीएन-खापलांग के कई आतंकी मारे गए।
✅ लोकेशन: म्यांमार का सगाइंग डिवीजन, जो नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटा है।
क्यों यह स्ट्राइक जरूरी थी?
🔹 सीमा पार आतंकवाद: ये गुट भारत में घुसपैठ कर हमले करते थे और म्यांमार के घने जंगलों में छिप जाते थे।
🔹 सेफ हेवन का खात्मा: म्यांमार में इनके कैंप्स को नष्ट कर भारत ने उनकी शरणस्थली छीन ली।
🔹 टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: पहली बार इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन वॉरफेयर का प्रयोग हुआ, जिससे सैनिकों की जान को खतरा नहीं हुआ।
प्रभावित आतंकी गुट
1. उल्फा-इंडिपेंडेंट (ULFA-I)
- स्थापना: 1979 (असम की “आजादी” के लिए)।
- लीडर: परेश बरुआ (म्यांमार में बेस्ड)।
- हालिया गतिविधियां: असम और अरुणाचल में हिंसक हमले।
2. एनएससीएन-खापलांग (NSCN-K)
- मांग: “ग्रेटर नागालैंड” (भारत-म्यांमार के नागा इलाकों को मिलाकर एक अलग देश)।
- कनेक्शन: चीन और म्यांमार की सेना से संबंधों के आरोप।
भारत की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- म्यांमार की चुप्पी: म्यांमार सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच गुप्त समझौता हो सकता है।
- चीन की भूमिका: चीन इन गुटों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष समर्थन देता रहा है, लेकिन इस ऑपरेशन के बाद उसकी प्रतिक्रिया देखने वाली होगी।
- भविष्य की चुनौतियां: उल्फा ने बदले की धमकी दी है, इसलिए सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
UPSC परिप्रेक्ष्य
📌 आंतरिक सुरक्षा: क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद और ड्रोन तकनीक का उपयोग।
📌 अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत-म्यांमार सहयोग और चीन की भूमिका।
📌 रक्षा प्रौद्योगिकी: ड्रोन वॉरफेयर में भारत की बढ़ती क्षमता।
निष्कर्ष
यह ऑपरेशन भारत के लिए एक बड़ी सफलता है, जिससे पूर्वोत्तर में आतंकवाद पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, म्यांमार और चीन की प्रतिक्रिया अभी बाकी है, जो भविष्य की रणनीति तय करेगी।
