20 सितंबर 2025 अमेरिका में ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाला राग फिर बजने लगा है। यूएस लेबर डिपार्टमेंट ने ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ नाम की नई मुहिम लॉन्च की है, जो H-1B वीजा को सीधा निशाना बना रही है। ये कदम ट्रंप के इमिग्रेशन कटौती वाले एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है। इस ऑर्डर से हर H-1B वीजा अप्लाई करने वाली कंपनी को 1 लाख डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) सालाना चुकाना पड़ेगा।
लेबर डिपार्टमेंट के अफसरों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट अमेरिकी वर्कर्स की सैलरी और जॉब्स को बचाएगा, साथ ही H-1B प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करने वालों को सजा देगा।
प्रोजेक्ट फायरवॉल क्या है? 10 बड़ी बातें प्रोजेक्ट फायरवॉल यूएस लेबर डिपार्टमेंट की नई कोशिश है, जो ये यकीन दिलाएगी कि अमेरिकी कंपनियां H-1B वीजा का गलत फायदा न उठाएं। खासकर IT जैसे हाई-स्किल्ड सेक्टर्स में विदेशी वर्कर्स को हायर करने वाली कंपनियों की सख्त जांच होगी।
क्यों इतना बड़ा मुद्दा? IT इंडस्ट्री और उन कंपनियों के लिए, जो H-1B वर्कर्स पर डिपेंड करती हैं, ये मुसीबत ला सकता है – सख्त चेकिंग, ज्यादा खर्च और रूल्स का पालन। अमेरिकी वर्कर्स के लिए इसे जॉब सिक्योरिटी का नाम दिया जा रहा है।
ट्रंप के इस 100,000 डॉलर वाले नए फीस के साथ मिलकर प्रोजेक्ट फायरवॉल विदेशी टैलेंट, खासकर भारतीयों को हायर करना महंगा कर देगा। H-1B वीजा होल्डर्स में करीब 75% भारतीय हैं। सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियां और IT सर्विस प्रोवाइडर्स को अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे, कम हायरिंग होगी और क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स में एक्सपर्ट्स की कमी से देरी हो सकती है।
अमेरिकी यूनिवर्सिटी अभी भी इतने स्किल्ड वर्कर्स तैयार नहीं कर पा रही हैं, जितनी डिमांड है। इससे टैलेंट गैप और गहरा हो सकता है, जो इनोवेशन और कॉम्पिटिशन को ठेस पहुंचाएगा – वो भी तब जब अमेरिका AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक में चीन जैसे राइवल्स से भिड़ रहा है।
ट्रंप का असर साफ दिख रहा ये स्टेप ट्रंप के अमेरिकी वर्कर्स को प्रायोरिटी देने और विदेशी वीजा पर ब्रेक लगाने के वादे को पूरा करता है। टाइमिंग भी उनके एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के साथ मैच कर रही है, जो एक कोऑर्डिनेटेड अटैक लगता है।
अमेरिका फर्स्ट पर जोर लेबर डिपार्टमेंट ने कहा, “ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अमेरिकंस को पीछे छोड़ने वाली प्रैक्टिसेस खत्म करने के अपने कमिटमेंट पर अड़ा है। इकोनॉमिक डोमिनेंस वापस लाते हुए हमें अपने सबसे वैल्युएबल रिसोर्स – अमेरिकी वर्कर – की हिफाजत करनी होगी।”
ट्रंप ने खुद क्या कहा? ट्रंप ने ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ की घोषणा करते हुए अवैध इमिग्रेंट्स को टारगेट किया और कहा कि ये इमिग्रेशन सिस्टम को मजबूत बनाएगा। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में उन्होंने लिखा, “आज हमें ट्रंप गोल्ड कार्ड की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। ये कार्ड इंडिविजुअल्स के लिए 1 मिलियन डॉलर और कॉर्पोरेशंस के लिए 2 मिलियन डॉलर में मिलेगा।”
“बहुत लंबे समय से हमारे देश में लाखों अवैध फॉरेनर्स घुस रहे हैं, और हमारा इमिग्रेशन सिस्टम चरमरा गया है। अब वक्त है कि अमेरिकी लोग और टैक्सपेयर्स हमारी लीगल इमिग्रेशन सिस्टम से फायदा उठाएं। हमारा अंदाजा है कि ट्रंप गोल्ड कार्ड जल्द ही 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करेगा। इस पैसों का यूज टैक्स कट्स, डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को बूस्ट देने और हमारे डेब्ट चुकाने के लिए होगा।”
लेबर डिपार्टमेंट ने X पर पोस्ट किया, “H-1B वीजा का दुरुपयोग करने वाली कंपनियों के दिन लद गए। प्रोजेक्ट फायरवॉल हमारी प्लान है, जो हाई-स्किल्ड जॉब्स को सबसे पहले अमेरिकंस को दिलाएगी।”
श्रम सचिव खुद रखेंगी नजर इतिहास में पहली बार, लेबर सेक्रेटरी लोरी शावेज-डेरेमर H-1B इन्वेस्टिगेशंस की पर्सनली सर्टिफाई करेंगी। ये स्टेप इस एक्शन की सीरियसनेस को हाइलाइट करता है।
जांच कैसे चलेगी? फेडरल लॉ के तहत मिले पावर्स का इस्तेमाल करते हुए, डिपार्टमेंट H-1B फ्रॉड या मिसयूज के शक वाली कंपनियों की जांच करेगा। इन्वेस्टिगेशन तब शुरू हो सकती है, जब रीजन हो कि कोई एम्प्लॉयर वीजा रूल्स फॉलो नहीं कर रहा।
रूल्स तोड़े तो सजा नियम तोड़ने पर कंपनियों को भारी नतीजे भुगतने पड़ेंगे। प्रभावित वर्कर्स को बैक वेजेस का पेमेंट। सिविल पेनल्टी। कुछ टाइम के लिए H-1B प्रोग्राम से बैन।
कई एजेंसियां मिलकर करेंगी काम प्रोजेक्ट फायरवॉल अकेला नहीं चलेगा। लेबर डिपार्टमेंट कंप्लायंस चेक करने और अमेरिकी वर्कर्स के खिलाफ डिस्क्रिमिनेशन रोकने के लिए दूसरी गवर्नमेंट एजेंसियों के साथ इंफो शेयरिंग और कोऑर्डिनेशन करेगा।
मेन गोल ‘अमेरिका फर्स्ट’ प्रोजेक्ट फायरवॉल का चीफ टारगेट जॉब मार्केट में ‘अमेरिका फर्स्ट’ प्रिंसिपल को री-इस्टेब्लिश करना है। ये कन्फर्म करेगा कि हाई-स्किल्ड पोजिशंस अमेरिकी सिटिजंस को मिलें और वीजा पर विदेशी वर्कर्स का डोमिनेशन न हो।
भारतीयों पर सबसे ज्यादा मार प्रोजेक्ट फायरवॉल का सबसे बुरा असर भारतीयों पर पड़ेगा, क्योंकि पिछले साल भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा फायदा लेने वाला देश था। गवर्नमेंट डेटा के मुताबिक, करीब 71% बेनिफिशरी इंडियन थे, जबकि चाइना 11.7% के साथ सेकंड पर था।
ट्रंप का ये नया फरमान IT वर्ल्ड में तूफान ला सकता है। भारतीय टैलेंट अब कनाडा, UK या गल्फ कंट्रीज की तरफ रुख कर सकता है। क्या होगा आगे? वेट एंड वॉच!