नई दिल्ली: स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में हाल के दिनों में हुई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। TCS की जगह नई कंपनी (ADT) को ठेका दिए जाने के बाद सेंटर अलॉटमेंट, तकनीकी खामियाँ और पेपर की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
SSC परीक्षा में समस्याएं
SSC की परीक्षाएं, जो केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में नौकरियों के लिए आयोजित की जाती हैं, हाल के वर्षों में कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं। ये समस्याएं मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटी जा सकती हैं:
1. परीक्षा केंद्रों से संबंधित समस्याएं
- दूरस्थ केंद्र आवंटन: अभ्यर्थियों को उनके घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, लखनऊ के अभ्यर्थी को आगरा या बुंदेलखंड में केंद्र दिया जा रहा है। इससे यात्रा का खर्च, समय, और मानसिक तनाव बढ़ता है।
- केंद्रों की खराब स्थिति: कई केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। टीन की छतें, बिना पंखे की गर्मी, और ऊपरी मंजिल पर शादी जैसे आयोजनों के कारण शोर-शराबा अभ्यर्थियों की एकाग्रता को प्रभावित करता है।
- इनविजिलेटर्स की अक्षमता: कुछ इनविजिलेटर्स अनप्रोफेशनल व्यवहार करते हैं, जैसे फोन पर जोर-जोर से बात करना या अभ्यर्थियों के साथ गुंडागर्दी। कुछ केंद्रों पर परीक्षा रद्द होने या देरी की भी शिकायतें हैं।
- अतिरिक्त शुल्क: बैग जमा करने के लिए ₹50-100 का शुल्क लिया जा रहा है, जो अभ्यर्थियों के लिए अनुचित बोझ है।
2. पेपर और सिलेबस से संबंधित समस्याएं
- आउट ऑफ सिलेबस सवाल: कई अभ्यर्थियों ने शिकायत की कि CGL और CHSL के पेपर में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे गए, विशेष रूप से गणित में स्टैटिस्टिक्स और प्रोबेबिलिटी जैसे जटिल विषयों से। यह उन अभ्यर्थियों के लिए अनुचित है जो सिलेबस के अनुसार तैयारी करते हैं।
- अनुवाद की गलतियां: अंग्रेजी से हिंदी में सवालों के अनुवाद में त्रुटियां पाई गईं, जिससे सवालों का अर्थ बदल गया और अभ्यर्थियों को भ्रम हुआ।
- सवालों की गुणवत्ता: कुछ सवालों के जवाब अस्पष्ट थे या गलत विकल्प दिए गए, जिससे अभ्यर्थियों का समय बर्बाद हुआ।
3. तकनीकी और सिस्टम की समस्याएं
- सर्वर और बायोमेट्रिक विफलता: ऑनलाइन परीक्षाओं में सर्वर बार-बार बंद हो रहा है, बायोमेट्रिक सिस्टम काम नहीं कर रहा, और टाइमर चलता रहता है, जिससे अभ्यर्थियों का समय बर्बाद होता है।
- खराब गुणवत्ता के उपकरण: रफ शीट और पेन की गुणवत्ता इतनी खराब है कि लिखते समय शीट फट रही है। गणित जैसे विषयों में रफ वर्क के लिए पर्याप्त शीट्स उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
- नई कंपनी (ADT) की अक्षमता: पहले TCS के पास SSC परीक्षाओं का ठेका था, जो सुचारू रूप से काम करता था। अब ADT नामक कंपनी को ठेका दिया गया है, जिस पर ब्लैकलिस्ट होने का आरोप है। इस कंपनी की कम बोली के कारण सस्ते संसाधनों का उपयोग हो रहा है, जिससे सिस्टम की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
SSC की तुलना अन्य परीक्षाओं से
- बैंकिंग और UPSC: SBI और IBPS जैसी बैंकिंग परीक्षाएं और UPSC की परीक्षाएं ऑनलाइन मोड में सुचारू रूप से आयोजित होती हैं। इनमें केंद्र आवंटन, पेपर की गुणवत्ता, और तकनीकी व्यवस्था में कोई बड़ी शिकायत नहीं होती।
- राज्य स्तरीय परीक्षाएं: UPPCS, RPSC, या RO/ARO जैसी राज्य स्तरीय परीक्षाओं में अक्सर गड़बड़ियां होती हैं, लेकिन SSC जैसी केंद्रीय परीक्षा से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
- ऑफलाइन बनाम ऑनलाइन: 2010-15 के दौरान SSC की ऑफलाइन परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक या केंद्र की समस्या के शानदार तरीके से आयोजित होती थीं। ऑनलाइन सिस्टम शुरू होने (2016-17 से) के बाद समस्याएं बढ़ी हैं।
SSC की जवाबदेही
SSC ने परीक्षा प्रक्रिया को आउटसोर्स कर दिया है, लेकिन यह इसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। निम्नलिखित कारणों से SSC की जवाबदेही बनती है:
- ठेके का गलत आवंटन: ADT जैसी कंपनी को ठेका देना, जिसकी क्षमता और विश्वसनीयता पर सवाल हैं, SSC की लापरवाही को दर्शाता है।
- पेपर सेटिंग: SSC पेपर सेटिंग भी तीसरे पक्ष को देता है, जिसके कारण सिलेबस से बाहर सवाल और अनुवाद की गलतियां हो रही हैं। SSC को स्वयं विशेषज्ञों की टीम बनाकर पेपर सेट करना चाहिए।
- केंद्र प्रबंधन: केंद्रों का चयन और प्रबंधन ठेकेदार कंपनी करती है, लेकिन SSC को इसकी निगरानी करनी चाहिए।
युवाओं पर प्रभाव
SSC की परीक्षाएं केंद्र सरकार के 35 विभागों में नौकरियों का प्रवेश द्वार हैं। इनमें गड़बड़ियां न केवल अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि देश के प्रशासनिक ढांचे को भी कमजोर करती हैं। लाखों युवा, जो वर्षों तक कठिन तैयारी करते हैं, इन समस्याओं के कारण निराश हो रहे हैं। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि युवाओं का धैर्य टूट रहा है।
समाधान के सुझाव
- TCS जैसे विश्वसनीय ठेकेदार को वापस लाएं: TCS ने पहले SSC परीक्षाओं को सुचारू रूप से आयोजित किया था। उनकी विशेषज्ञता का उपयोग दोबारा किया जाना चाहिए।
- SSC स्वयं पेपर सेट करे: विशेषज्ञों की एक आंतरिक टीम बनाकर पेपर सेटिंग की जिम्मेदारी SSC को लेनी चाहिए, ताकि सिलेबस के अनुसार सवाल पूछे जाएं।
- केंद्र आवंटन में सुधार: अभ्यर्थियों को उनके निवास स्थान के पास केंद्र आवंटित किए जाएं। इसके लिए AI-आधारित कोडिंग का उपयोग किया जा सकता है, जो निकटतम केंद्रों को प्राथमिकता दे।
- सुविधाओं में सुधार: केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं (पंखे, उचित बैठने की व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण रफ शीट्स) सुनिश्चित की जाएं। इनविजिलेटर्स को प्रशिक्षित किया जाए।
- तकनीकी ढांचे को मजबूत करें: सर्वर और बायोमेट्रिक सिस्टम की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। नियमित तकनीकी ऑडिट हो।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: SSC को अभ्यर्थियों की शिकायतों के लिए एक त्वरित निवारण तंत्र स्थापित करना चाहिए। ठेकेदार कंपनियों पर सख्त निगरानी हो।
निष्कर्ष
SSC परीक्षाओं में सिस्टम की विफलता लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। केंद्र आवंटन, पेपर की गुणवत्ता, और तकनीकी समस्याओं ने अभ्यर्थियों का विश्वास तोड़ा है। सरकार और SSC को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे, जैसे विश्वसनीय ठेकेदारों का चयन, पेपर सेटिंग में आत्मनिर्भरता, और केंद्रों की बेहतर व्यवस्था। यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के युवा, जो भविष्य के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ हैं, बिना किसी बाधा के अपनी प्रतिभा साबित कर सकें।
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