लेह में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की NSA के तहत गिरफ्तारी पर PDP चीफ महबूबा मुफ्ती ने की कड़ी निंदा, कश्मीर जैसी कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी पर जताई चिंता।
श्रीनगर: लेह में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि शांति और सच्चाई के लिए जीवन भर लड़ने वाले सोनम को सिर्फ वादों को पूरा करने की मांग करने के लिए सजा दी जा रही है। महबूबा ने इसे आज के भारत में ‘सच बोलने की भारी कीमत’ बताया है।
महबूबा मुफ्ती ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा, “सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी बहुत चिंताजनक है। शांति, स्थिरता और सच्चाई के लिए हमेशा लड़ने वाले व्यक्ति को सिर्फ वादे पूरे करने की मांग करने के लिए सजा दी जा रही है।” उन्होंने आगे लिखा, “आज लेह में कर्फ्यू है और इंटरनेट बंद है, यह कश्मीर में लंबे समय से हो रही घटनाओं की एक दुखद याद दिलाता है।”
महबूबा का सवाल: जेल में क्यों पहुंचे शांति के सिपाही
महबूबा ने सोनम की गिरफ्तारी को गहरी चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यह दिखाता है कि मौजूदा हालात में सत्ता को सच बताना बहुत महंगा पड़ रहा है। उन्होंने लिखा, “आज के भारत में सत्ता को सच बताना बहुत महंगा पड़ता है, वरना जो व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी शांति और अहिंसा के लिए लड़ा, वह जेल में कैसे पहुंच सकता है?” सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है, जो लेह में राज्यhood और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हुआ।
लेह में क्या हो रहा है
लेह में राज्यhood, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, नौकरियों और जमीन के अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज हो गए थे। 24 सितंबर को शांतिपूर्ण बंद हिंसक हो गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए। इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया गया और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। सोनम ने 10 सितंबर से अनशन शुरू किया था, जो 24 सितंबर को हिंसा के बाद खत्म कर दिया। सरकार ने सोनम पर प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप लगाया है।
महबूबा की निंदा ने बढ़ाई बहस
महबूबा की यह प्रतिक्रिया लेह की घटनाओं पर राजनीतिक बहस को और हवा दे रही है। पूर्व जम्मू-कश्मीर सीएम फारूक अब्दुल्ला ने भी सोनम का समर्थन किया है। महबूबा का यह बयान कश्मीर और लेह के बीच समानताओं को रेखांकित करता है, जहां अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठ रहे हैं।
