लखनऊ में 1 अगस्त 2025 से नया डीएम सर्किल रेट लागू हो गया है, जिसके चलते ज़मीन, मकान, दुकान और फ्लैट की खरीद-फरोख्त अब पहले से कहीं अधिक महंगी हो जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा जारी संशोधित सर्किल रेट के अनुसार:
- कृषि भूमि: 15% की वृद्धि
- व्यावसायिक भूमि: 25% तक की बढ़ोतरी
- बहुमंजिला इमारतें: 20% की वृद्धि
- औसत बढ़ोतरी: सभी संपत्तियों के सर्किल रेट में औसतन 20% का इजाफा
प्रमुख क्षेत्रों में सर्किल रेट
- गोमती नगर: सर्किल रेट ₹33,000 से बढ़कर ₹77,000 प्रति वर्ग मीटर।
- इंदिरा नगर: ₹27,000 से बढ़कर ₹62,000 प्रति वर्ग मीटर।
- विभूति खंड: ₹40,000 से बढ़कर ₹70,000 प्रति वर्ग मीटर।
- महानगर: ₹41,000 से ₹65,000 प्रति वर्ग मीटर।
रजिस्ट्री लागत पर असर
इस बढ़ोतरी का सीधा असर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए:
- गोमती नगर में 100 वर्ग मीटर का प्लॉट खरीदने पर पहले ₹33 लाख का सर्किल रेट मूल्य था, जो अब ₹77 लाख हो गया है। इससे स्टाम्प ड्यूटी (7% मानकर) ₹2.31 लाख से बढ़कर ₹5.39 लाख हो जाएगी।
- रजिस्ट्री शुल्क, जो प्रॉपर्टी वैल्यू का 2% (अधिकतम ₹20,000) है, भी बढ़े हुए मूल्य के आधार पर लागू होगा।
छूट और सुविधाएं
- महिलाओं के लिए: ₹1 करोड़ तक की संपत्ति पर 1% स्टाम्प ड्यूटी छूट (अधिकतम ₹1 लाख)।
- भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांगजन, और कमजोर आय वर्ग: विशेष छूट उपलब्ध।
- पारिवारिक दान: स्टाम्प शुल्क की अधिकतम सीमा ₹5,000।
सर्किल रेट कैसे चेक करें
- उत्तर प्रदेश स्टाम्प और रजिस्ट्री विभाग की वेबसाइट (igrsup.gov.in) पर जाएं।
- अपने क्षेत्र का नाम, संपत्ति प्रकार, और अन्य विवरण दर्ज करें।
- डीएम कार्यालय द्वारा जारी क्यूआर कोड स्कैन करके भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
क्यों हुई बढ़ोतरी
- बाजार मूल्य के साथ तालमेल: निजी बिल्डर ऊंची कीमतों पर प्रॉपर्टी बेच रहे थे, जबकि सर्किल रेट कम थे।
- शहरी विकास: आउटर रिंग रोड, किसान पथ, और एक्सप्रेसवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने मांग बढ़ाई है।
- राजस्व वृद्धि: सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
खरीदारों के लिए सुझाव
- बजट पुनर्विचार: बढ़ी हुई रजिस्ट्री लागत को ध्यान में रखकर बजट बनाएं।
- स्थानीय कार्यालय से संपर्क: सटीक सर्किल रेट जानने के लिए नजदीकी उप-पंजीयक कार्यालय जाएं।
- आपत्ति दर्ज करें: यदि सर्किल रेट में कोई विसंगति लगे, तो 17 जुलाई तक आपत्ति दर्ज की जा सकती थी। अब अंतिम दरें लागू हो चुकी हैं।
लखनऊ में यह बदलाव रियल एस्टेट मार्केट में पारदर्शिता लाने और बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, खरीदारों को अब अपने सपनों का घर या ज़मीन खरीदने के लिए अधिक बजट की आवश्यकता होगी।
