जीएसटी काउंसिल की बैठक में लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाले 18% जीएसटी को पूरी तरह हटा दिया गया है, लेकिन ग्राहकों को इसका पूरा फायदा शायद ही मिले। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोगों को 14-15% तक की बचत हो सकती है। कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट न मिलने की वजह से पूरी छूट नहीं देंगी।
जीएसटी कम होने से ग्राहकों को कितना फायदा मिलेगा, बीमा प्रीमियम से लेकर चिप्स तक हर चीज पर असर पड़ेगा।
राजीव कुमार, नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की बैठक में लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर 18 प्रतिशत जीएसटी को खत्म कर दिया गया है, लेकिन ग्राहकों को इसका पूरा लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, बिना जीएसटी वाले इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने के लिए कंपनियों को नए सिरे से भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) से अप्रूवल लेना पड़ेगा।
कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इंश्योरेंस प्रीमियम में 18 प्रतिशत की बजाय ग्राहकों को 14-15 प्रतिशत तक का फायदा मिल सकता है, या फिर कंपनियां प्रोडक्ट्स में एक्स्ट्रा बेनिफिट्स जोड़ सकती हैं। कंपनियां भी इस पर विचार कर रही हैं और अगले हफ्ते में वे अपनी कटौती और नए प्रोडक्ट्स की अनाउंसमेंट कर सकती हैं। 22 सितंबर से उन्हें बिना जीएसटी के लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने होंगे।
इंश्योरेंस की कीमत कौन तय करता है
डेलायट के पार्टनर (अप्रत्यक्ष कर) एम.एस. मनी ने बताया कि इंश्योरेंस एक रेगुलेटेड सेक्टर है और बीमा कंपनियां अपनी मर्जी से प्रोडक्ट्स की कीमत नहीं तय कर सकतीं। उन्हें कवरेज के आधार पर प्रीमियम सेट करना होता है और उसकी मंजूरी इरडा से लेनी पड़ती है।
मनी ने कहा कि अब हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी पूरी तरह हटने से कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, जिससे उन्हें थोड़ा नुकसान होगा। इसलिए वे 18 प्रतिशत का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं देंगी।
प्रीमियम में 18 प्रतिशत की जगह ग्राहकों को 14-15 प्रतिशत तक की राहत मिल सकती है। कुछ कंपनियां प्रीमियम वही रख सकती हैं और कवरेज में अतिरिक्त फीचर्स ऐड कर सकती हैं।
अप्रत्यक्ष कर विभाग के मुख्य आयुक्त (मेरठ) संजय मंगल भी मानते हैं कि इनपुट टैक्स क्रेडिट न मिलने से ग्राहकों को 18 प्रतिशत कटौती का पूरा लाभ नहीं मिलेगा।
इफको टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के एमडी व सीईओ सुब्रत मोंडल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस की तरफ ज्यादा लोग आकर्षित होंगे और सेल्स बढ़ने से कंपनियों को भी फायदा होगा।
कीमत घटने से चिप्स, कुरकुरे का बढ़ सकता है वजन
जीएसटी काउंसिल की बैठक में पैकेटेड चिप्स, कुरकुरे जैसे प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इन प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां गुरुवार सुबह से ही ग्राहकों को फायदा पहुंचाने की तैयारी में लग गई हैं।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कंपनियां कीमत कम करने की बजाय प्रोडक्ट के वजन को बढ़ाकर ग्राहकों को जीएसटी कटौती का लाभ दे सकती हैं।
मनी ने बताया कि अभी कुरकुरे का 10 रुपए वाला पैकेट मिलता है। 12 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से इसमें 1.20 रुपए टैक्स शामिल होता है। अब सात प्रतिशत की राहत मिलने से 10 रुपए वाला पैकेट 9.30 रुपए में मिलना चाहिए।
चिप्स, कुरकुरे जैसे प्रोडक्ट्स बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां बनाती हैं और उन्हें 9.30 रुपए में बेचने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन दुकानदारों को 70 पैसे लौटाने में परेशानी होगी। इसलिए कंपनियां कीमत कम करने की जगह उस अमाउंट के बराबर फूड की मात्रा बढ़ा देंगी।
किसको मिलेगा लाभ
अप्रत्यक्ष कर विभाग के मुख्य आयुक्त संजय मंगल ने कहा कि आदर्श स्थिति में जीएसटी कम होने पर कीमत में कटौती होनी चाहिए। जीएसटी कटौती का मकसद ग्राहकों को फायदा पहुंचाना है। अगर मात्रा बढ़ाकर लाभ मिल जाता है तो सरकार को कोई ऐतराज नहीं होगा। लेकिन अगर कंपनियां न मात्रा बढ़ाती हैं और न कीमत घटाती हैं तो उन पर ऐक्शन लिया जाएगा।
एसी और बड़े साइज के टीवी, बाइक पर कटौती का पूरा लाभ दूसरी तरफ ग्राहकों को बाइक, कार, एसी और 32 इंच से बड़े टेलीविजन की खरीद पर 10 प्रतिशत कटौती का पूरा फायदा मिलेगा। अभी ये आइटम 28 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में हैं, जिन्हें अब 18 प्रतिशत में शिफ्ट कर दिया गया है।
